असम और अरुणाचल प्रदेश के बीच दशकों पुराना सीमा विवाद एक बार फिर हिंसक मोड़ ले चुका है। धेमाजी जिले के सिलापाथर क्षेत्र में लिकाबली प्रवेश बिंदु पर उस समय स्थिति अत्यंत नाजुक हो गई, जब आर्थिक नाकेबंदी कर रहे आंदोलनकारियों और सीमा पार से आए लोगों के बीच तीखी बहस के बाद पत्थरबाजी और हाथापाई शुरू हो गई। हालात को बेकाबू होते देख अरुणाचल प्रदेश पुलिस ने अपनी ओर मौजूद आक्रोशित भीड़ को पीछे खदेड़ने और स्थिति पर नियंत्रण पाने के लिए हवा में तीन चक्र गोलियां चलाईं। इस घटना में किसी के गोली से घायल होने की सूचना नहीं है, लेकिन दोनों पूर्वोत्तर राज्यों को जोड़ने वाले मुख्य मार्गों पर वाहनों की आवाजाही पूरी तरह ठप हो चुकी है। यह तनाव 10 अगस्त को हुई उस हिंसक झड़प की देन है जिसमें असम के 12 नागरिक घायल हो गए थे, जिसके बाद स्थानीय छात्र व नागरिक संगठनों ने अनिश्चितकालीन आर्थिक नाकेबंदी का आह्वान कर दिया।
लिकाबली प्रवेश द्वार पर बढ़ा टकराव और रास्तों की नाकेबंदी
सीमावर्ती धेमाजी जिले के सिलापाथर स्थित लिकाबली चेकपोस्ट पर गुरुवार को अनिश्चितकालीन आर्थिक नाकेबंदी का दूसरा दिन था। मौके पर मौजूद अधिकारियों के अनुसार, नाकेबंदी कर रहे प्रदर्शनकारियों को निशाना बनाकर सीमा के दूसरी तरफ से कुछ लोगों ने अचानक पथराव शुरू कर दिया। इस पथराव में कुछ आंदोलनकारियों को चोटें आईं, जिसके बाद दोनों पक्षों के बीच सीधे हाथापाई होने लगी। स्थिति को और बिगड़ने से रोकने के लिए अरुणाचल प्रदेश की पुलिस टीम ने हवा में तीन गोलियां चलाकर चेतावनी दी। हालांकि गोलीबारी से कोई हताहत नहीं हुआ, लेकिन इलाके में भारी पुलिस बल तैनात करना पड़ा है।
यह आर्थिक नाकेबंदी मिसिंग समुदाय के शीर्ष छात्र निकाय 'तकाम मिसिंग पोरिन केबांग' यानी टीएमपीके के नेतृत्व में आयोजित की जा रही है। इस आंदोलन में मिसिंग मिमाग केबांग और तकाम मिसिंग महिला केबांग जैसे अन्य स्थानीय जनसंगठन भी पूरी मजबूती से साथ दे रहे हैं। प्रदर्शनकारियों ने अरुणाचल प्रदेश की ओर जाने और वहां से आने वाले सभी व्यापारिक व व्यावसायिक वाहनों को पूरी तरह रोक दिया है। हालांकि, आम जनता की सहूलियत को ध्यान में रखते हुए एम्बुलेंस, आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं और स्कूली वाहनों को इस बंदी से पूरी तरह मुक्त रखा गया है।
10 अगस्त की घटना और आंदोलनकारियों की प्रमुख मांगें
इस ताजा अशांति की शुरुआत 10 अगस्त को हुई थी, जब गेरुकामुख थाना क्षेत्र के अंतर्गत गोगामुख राजस्व सर्किल की मिंगमांग बस्ती के पास असम और अरुणाचल सीमा पर हिंसक झड़प हुई। आरोप है कि असम की भूमि पर अरुणाचल प्रदेश के निवासियों द्वारा कथित तौर पर किए जा रहे अतिक्रमण को लेकर विवाद बढ़ा और गोलीबारी हुई, जिसमें असम के कम से कम 12 लोग गोली लगने व झड़प से घायल हो गए। इस घटना के विरोध में ही मिसिंग समाज के संगठनों ने सड़कों पर उतरकर आर्थिक नाकेबंदी का रास्ता चुना।
संगठनों ने असम और अरुणाचल को जोड़ने वाले कई रणनीतिक राजमार्गों पर यातायात पूरी तरह ठप कर दिया है। धेमाजी जिले में द्वारमुख-बंदरदेवा, रुक्सिन और सिलापाथर के लिकाबली चेकपोस्ट को पूरी तरह सील कर दिया गया है। इसके अलावा लखीमपुर जिले में बंदरदेवा, गोहपुर में सोलेन्गी और बिश्वनाथ जिले में पाभोई मार्ग पर भी नाकेबंदी की गई है। टीएमपीके के महासचिव सान पैंगिंग ने स्पष्ट किया कि सीमा पर अतिक्रमण और नागरिकों पर हमले की घटनाएं लंबे समय से हो रही हैं, लेकिन राज्य सरकारों द्वारा कड़े कदम न उठाए जाने से स्थिति बिगड़ी है। आंदोलनकारियों की स्पष्ट मांग है कि असम की भूमि से अवैध अतिक्रमण तुरंत हटाया जाए, 10 अगस्त की गोलीबारी के दोषियों को तत्काल गिरफ्तार कर असम पुलिस के हवाले किया जाए और सीमा समस्या का स्थायी समाधान निकाला जाए।
मंत्रिस्तरीय वार्ता और मुख्यमंत्रियों का रुख
बढ़ते आर्थिक संकट और दोनों राज्यों के बीच आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति बाधित होने के खतरे को देखते हुए असम सरकार ने वार्ता की पहल की है। असम के सीमा सुरक्षा और विकास मंत्री अतुल बोरा तथा शिक्षा मंत्री रानोज पेगू को धेमाजी भेजा गया है, जहां वे धेमाजी सर्किट हाउस में टीएमपीके के वरिष्ठ प्रतिनिधियों और आंदोलनकारी नेताओं के साथ उच्च स्तरीय बैठक करके नाकेबंदी समाप्त कराने का रास्ता तलाशेंगे।
दूसरी ओर, असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू से संपर्क साधा है। हिमंत बिस्वा सरमा ने मांग की है कि अरुणाचल प्रदेश सरकार 10 अगस्त की घटना की उच्चस्तरीय निष्पक्ष जांच कराए और दोषियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई करे। मुख्यमंत्री के अनुसार, पेमा खांडू ने आश्वासन दिया है कि सीमा पर शांति भंग करने और गोलीबारी में शामिल किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा और उनके खिलाफ कठोर कदम उठाए जाएंगे।
804 किलोमीटर लंबी सीमा और 1,200 विवादित बिंदुओं का इतिहास
असम और अरुणाचल प्रदेश के बीच लगभग 804.1 किलोमीटर लंबी अंतरराज्यीय सीमा साझा होती है। यह विस्तृत सीमा रेखा असम के आठ प्रमुख जिलों से होकर गुजरती है, जिनमें उदलगुरी, सोनितपुर, बिस्वनाथ, लखीमपुर, धेमाजी, तिनसुकिया, डिब्रूगढ़ और चराइदेव शामिल हैं। भौगोलिक जटिलताओं और ऐतिहासिक दावों के कारण दोनों राज्यों के बीच लगभग 1,200 ऐसे स्थान हैं जो विवादित बिंदु माने जाते हैं।
हाल ही में 29 जुलाई को असम सरकार ने राज्य विधानसभा में एक लिखित विवरण प्रस्तुत किया था, जिसके अनुसार अरुणाचल प्रदेश ने असम की 16,144.01 हेक्टेयर भूमि पर कथित तौर पर अतिक्रमण कर रखा है। वहीं दूसरी तरफ, अरुणाचल प्रदेश प्रशासन असम के 858.91 वर्ग किलोमीटर के भौगोलिक क्षेत्र पर अपना दावा पेश करता रहा है। 1987 में केंद्र शासित प्रदेश से पूर्ण राज्य का दर्जा मिलने के बाद से ही अरुणाचल प्रदेश और असम के बीच सीमा का सीमांकन एक जटिल विषय बना हुआ है।
नामसाई घोषणा पत्र, समझौता ज्ञापन और सर्वोच्च न्यायालय में लंबित मामला
सीमा विवाद को सुलझाने के लिए दोनों राज्यों ने मिलकर 12 क्षेत्रीय समितियों का गठन किया था, जिन्होंने सीमावर्ती क्षेत्रों का दौरा कर स्थानीय समुदायों से संवाद किया था। इसके सकारात्मक परिणाम स्वरूप 15 जुलाई 2022 को असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा और अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने ऐतिहासिक 'नामसाई घोषणा पत्र' पर हस्ताक्षर किए। इस घोषणा पत्र के जरिए अरुणाचल प्रदेश द्वारा दावा किए गए असम के 123 विवादित गांवों के मसले को चरणबद्ध तरीके से सुलझाने की रूपरेखा तैयार की गई।
इसके बाद 20 अप्रैल 2023 को नई दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री की उपस्थिति में दोनों राज्य सरकारों के बीच एक द्विपक्षीय समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए। इस ऐतिहासिक समझौते के तहत 123 विवादित गांवों में से 71 गांवों पर सीमा सहमति बन चुकी है, जबकि शेष 52 गांवों को लेकर क्षेत्रीय समितियों और प्रशासनिक स्तर पर वार्ता जारी है। यद्यपि यह मामला भारत के सर्वोच्च न्यायालय में भी विचारणाधीन है, लेकिन जमीनी स्तर पर अचानक भड़कने वाली झड़पें दर्शाती हैं कि कूटनीतिक समझौतों के बावजूद सीमावर्ती इलाकों में स्थायी शांति स्थापित करना अभी भी एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।



















