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असम बाढ़ पीड़ितों की सहायता के लिए आगे आया चाय उद्योग, मुख्यमंत्री राहत कोष में दिए 81.36 लाख रुपयेअसम
13 अग॰ 2026, 5:32 pm (4 दिन पहले)· 3

असम बाढ़ पीड़ितों की सहायता के लिए आगे आया चाय उद्योग, मुख्यमंत्री राहत कोष में दिए 81.36 लाख रुपये

फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया टी ट्रेडर्स एसोसिएशन (FAITTA) के प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा से मुलाकात कर आपदा राहत के लिए 81.36 लाख रुपये का योगदान दिया, जबकि राज्य में बाढ़ से मौतों का आंकड़ा 103 तक पहुंच गया है।

असम में जारी भीषण बाढ़ के बीच राहत और बचाव कार्यों को मजबूती देने के लिए देश का चाय उद्योग आगे आया है। चाय व्यापारियों के प्रमुख संगठन फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया टी ट्रेडर्स एसोसिएशन (FAITTA) के एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने गुवाहाटी में मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा से मुलाकात की। इस दौरान संगठन की ओर से बाढ़ प्रभावित लोगों की मदद के लिए मुख्यमंत्री सहायता कोष में 81.36 लाख रुपये का अंशदान सौंपा गया।

मुख्यमंत्री के साथ मुलाकात और चाय उद्योग के मुद्दों पर चर्चा

बैठक के दौरान प्रतिनिधिमंडल ने 81.36 लाख रुपये का चेक मुख्यमंत्री सहायता कोष (CMRF) में जमा कराया। वित्तीय सहायता सौंपने के साथ ही चाय उद्योग के प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा को चाय व्यापार और उद्योग से जुड़ी कई महत्वपूर्ण चुनौतियों और समसामयिक मुद्दों से भी अवगत कराया। इसके अलावा प्रतिनिधिमंडल ने राज्य के बाढ़ प्रभावित समुदायों के प्रति अपनी गहरी संवेदना और एकजुटता व्यक्त की।

मुख्यमंत्री सरमा ने संकट की इस घड़ी में उदारतापूर्वक सहयोग देने के लिए संगठन का आभार व्यक्त किया। मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) की ओर से सोशल मीडिया पर साझा की गई जानकारी में कहा गया कि मुख्यमंत्री ने असम के लोगों के प्रति चाय उद्योग की इस सहायता और एकजुटता की भावना की सराहना की है।

चाय उद्योग के प्रमुख दिग्गजों की प्रतिनिधिमंडल में मौजूदगी

इस प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया टी ट्रेडर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष और वाघ बकरी टी ग्रुप के कार्यकारी निदेशक पारस देसाई ने किया। उनके साथ देश की प्रमुख चाय कंपनियों और व्यापारिक निकायों के वरिष्ठ अधिकारी भी इस मुलाकात में शामिल रहे।

प्रतिनिधिमंडल में हिंदुस्तान यूनिलीवर लिमिटेड (HUL) के सीनियर प्रोक्योरमेंट मैनेजर और टी इंडिया लीड नीलेश चौधरी, टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स लिमिटेड (TCPL) के उपाध्यक्ष एवं टी हेड गौरव भादुड़ी, FAITTA के सचिव नीरव पटेल तथा टी बोर्ड इंडिया के पूर्व उपाध्यक्ष बिद्यानंद बरकाकोटी शामिल थे। इन सभी प्रतिनिधियों ने एक स्वर में बाढ़ पीड़ितों के पुनर्वास और राहत कार्यों में सहयोग देने का संकल्प दोहराया।

असम में बाढ़ का कहर, मृतक संख्या बढ़कर 103 हुई

राज्य में यह सहायता ऐसे समय पर आई है जब असम की नदियां और बाढ़ का पानी कई इलाकों में तबाही मचा रहा है। असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (ASDMA) द्वारा जारी ताजा आधिकारिक बुलेटिन के अनुसार इस साल बाढ़ के कारण जान गंवाने वाले लोगों की कुल संख्या बढ़कर 103 हो गई है।

आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के बुलेटिन में बताया गया है कि पिछले 24 घंटों के दौरान बाढ़ के कारण 2 और लोगों की जान चली गई। जलभराव के कारण शिवसागर जिले में एक व्यक्ति की डूबने से मौत हो गई, जबकि दूसरा हादसा कारबी आंगलोंग जिले में दर्ज किया गया जहां बाढ़ के पानी में एक व्यक्ति डूब गया। प्रशासन और राहत टीमें प्रभावित क्षेत्रों में लगातार निगरानी और बचाव कार्य चला रही हैं।

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सवाल-जवाब

FAITTA ने असम मुख्यमंत्री राहत कोष में कितनी राशि का योगदान दिया?
फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया टी ट्रेडर्स एसोसिएशन (FAITTA) ने असम के बाढ़ पीड़ितों की सहायता के लिए 81.36 लाख रुपये का योगदान दिया है।
प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किसने किया?
प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व FAITTA के अध्यक्ष और वाघ बकरी टी ग्रुप के कार्यकारी निदेशक पारस देसाई ने किया।
प्रतिनिधिमंडल में कौन-कौन से प्रमुख उद्योगपति और अधिकारी शामिल थे?
प्रतिनिधिमंडल में एचयूएल (HUL) से नीलेश चौधरी, टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स (TCPL) से गौरव भादुड़ी, FAITTA सचिव नीरव पटेल और टी बोर्ड इंडिया के पूर्व उपाध्यक्ष बिद्यानंद बरकाकोटी शामिल थे।
असम में बाढ़ से अब तक कुल कितनी मौतें हुई हैं?
असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (ASDMA) की रिपोर्ट के अनुसार इस साल बाढ़ के कारण अब तक 103 लोगों की मौत हो चुकी है।
हालिया 24 घंटों में किन जिलों में डूबने से मौतें दर्ज की गईं?
पिछले 24 घंटों के दौरान शिवसागर जिले में एक व्यक्ति और कारबी आंगलोंग जिले में एक व्यक्ति की बाढ़ में डूबने से मौत हुई।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Karan Malhotra@karan-malhotra·3 दिन पहले

असम में बाढ़ से 103 मौतें होना एक गंभीर आपदा है, जहाँ राहत कार्यों के साथ-साथ आपदा प्रबंधन फंड के वित्तीय उपयोग में पारदर्शिता और प्रशासनिक जवाबदेही बेहद अहम हो जाती है। चाय उद्योग का यह योगदान संकट से उबरने में मददगार होगा, लेकिन भविष्य में इस तरह की प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए स्थायी और मजबूत बुनियादी ढांचा विकसित करने की सख्त जरूरत है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·3 दिन पहले

असम में बाढ़ के कारण 103 मौतें होने और प्रशासनिक मशीनरी के राहत कार्यों में जुटे होने के बीच, कॉरपोरेट और उद्योग जगत द्वारा 81.36 लाख रुपये की सहायता का यह कदम संकट की घड़ी में सामाजिक उत्तरदायित्व को रेखांकित करता है। यद्यपि यह राशि पुनर्वास और जान-माल के नुकसान की विशाल क्षति के मुकाबले छोटी लग सकती है, किंतु यह कॉरपोरेट सामाजिक जिम्मेदारी और सार्वजनिक-निजी सहयोग के महत्व को दर्शाती है। आगे यह देखना होगा कि इस फंड का पारदर्शी और त्वरित उपयोग ज़मीनी स्तर पर राहत और सुरक्षा अभियानों को कितनी मजबूती देता है।

Ravikash Gupta@ravikash·3 दिन पहले

असम के इस भीषण आपदा संकट के बीच टाटा कंज्यूमर, एचयूएल और वाघ बकरी जैसे दिग्गजों के नेतृत्व वाले चाय उद्योग द्वारा मुख्यमंत्री राहत कोष में 81.36 लाख रुपये का योगदान सराहनीय है। हालांकि राज्य में 103 मौतें और भारी तबाही हो चुकी है, ऐसे में आपूर्ति श्रृंखला और बागान अर्थव्यवस्था को हुए नुकसान का आकलन करना भी जरूरी है। कॉरपोरेट जगत की यह पहल न केवल सामाजिक उत्तरदायित्व को दर्शाती है, बल्कि यह भी संकेत देती है कि जब क्षेत्रीय आजीविका और कृषि-आधारित व्यापार गंभीर खतरे में हों, तो उद्योग और प्रशासन का सहयोगात्मक दृष्टिकोण दीर्घकालिक आर्थिक स्थिरता के लिए कितना महत्वपूर्ण हो जाता है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·3 दिन पहले

असम में बाढ़ से 103 मौतें होना गंभीर आपदा और प्रशासनिक चुनौती है। संकट के समय चाय उद्योग द्वारा मुख्यमंत्री राहत कोष में 81.36 लाख रुपये देना और पुनर्वास में जुटना सराहनीय है। हालांकि, आपदा प्रबंधन में पारदर्शिता और इन फंड्स का ज़मीनी स्तर पर पीड़ितों तक सही उपयोग सुनिश्चित करना प्रशासन की बड़ी जिम्मेदारी होगी।

Ravikash Gupta@ravikash·3 दिन पहले

असम में 103 मौतों के बीच चाय उद्योग द्वारा 81.36 लाख रुपये का योगदान संकट से निपटने में कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) की प्रासंगिकता को रेखांकित करता है। पारस देसाई, टाटा कंज्यूमर और एचयूएल के शीर्ष अधिकारियों की उपस्थिति यह दर्शाती है कि कृषि-आधारित और खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र क्षेत्रीय आपदाओं में आर्थिक स्थिरता बनाए रखने के लिए प्रशासन के साथ खड़े होने में अपनी नैतिक और आर्थिक भूमिका समझते हैं।

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