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असम के हैलाकांडी में पाकिस्तान समर्थित शहजाद भट्टी नेटवर्क का 21 वर्षीय संदिग्ध सहयोगी गिरफ्तारअसम
26 अग॰ 2026, 2:28 pm (36 दिन पहले)· 5

असम के हैलाकांडी में पाकिस्तान समर्थित शहजाद भट्टी नेटवर्क का 21 वर्षीय संदिग्ध सहयोगी गिरफ्तार

असम पुलिस स्पेशल टास्क फोर्स और हैलाकांडी पुलिस ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए रामनाथपुर इलाके से पाकिस्तान आधारित शहजाद भट्टी नेटवर्क के 21 वर्षीय संदिग्ध को पकड़ा है।

असम पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने राज्य में सक्रिय देश विरोधी नेटवर्क के खिलाफ अपनी कार्रवाई को तेज करते हुए हैलाकांडी जिले से एक संदिग्ध को गिरफ्तार किया है। अधिकारियों द्वारा बुधवार को दी गई जानकारी के मुताबिक, पकड़ा गया 21 वर्षीय युवक पाकिस्तान स्थित शहजाद भट्टी नेटवर्क (SBN) से जुड़े होने के संदेह के घेरे में है।

रामनाथपुर में संयुक्त कार्रवाई और दस्तावेज बरामद

यह गिरफ्तारी हैलाकांडी जिले के रामनाथपुर इलाके में चलाए गए एक विशेष अभियान के दौरान संभव हो सकी। एसटीएफ और हैलाकांडी पुलिस की टीमों ने इस नेटवर्क की गतिविधियों की पहले से जारी जांच के आधार पर मिले इनपुट के बाद यह संयुक्त कदम उठाया। अभियान के दौरान गिरफ्तार किए गए आरोपी के पास से कई दस्तावेज बरामद किए गए हैं, जिनकी गहनता से जांच की जा रही है।

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जुलाई में हुई गिरफ्तारियों से जुड़े तार

सुरक्षा एजेंसियों की यह सफलता 25 जुलाई को की गई कार्रवाई के बाद सामने आई है, जब एसटीएफ ने राज्य के धुबरी, चिरांग और बरपेटा जिलों से शहजाद भट्टी नेटवर्क के तीन अन्य संदिग्ध सहयोगियों को हिरासत में लिया था। हालिया गिरफ्तारी को राज्य में उग्रवादी और राष्ट्रविरोधी तत्वों के नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए चलाए जा रहे निरंतर अभियान के हिस्से के रूप में देखा जा रहा है।

शहजाद भट्टी नेटवर्क की गतिविधियां और कार्यप्रणाली

एक आधिकारिक सरकारी बयान के अनुसार, पाकिस्तान में स्थित शहजाद भट्टी नेटवर्क एक आतंकी सिंडिकेट है। यह संगठन भारत के अलग-अलग हिस्सों में ग्रेनेड हमले, इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (IED) धमाके, पेट्रोल बम से हमले और लक्षित हत्याओं (टारगेट किलिंग) जैसी गतिविधियों में संलिप्त रहा है। जांच में सामने आया है कि यह नेटवर्क स्थानीय स्तर पर लोगों को पैसे का लालच देकर भर्ती करता है। इन स्थानीय संपर्कों को पुलिस थानों, रक्षा प्रतिष्ठानों और धार्मिक स्थलों की जासूसी व रेकी करने के अलावा खुफिया जानकारी जुटाने के मकसद से CCTV कैमरे लगाने जैसे काम सौंपे जाते हैं। एसटीएफ फिलहाल नेटवर्क के अन्य सहयोगियों की पहचान करने और असम में इसके प्रसार का पता लगाने में जुटी है।

सवाल-जवाब

हैलाकांडी में किस संगठन के संदिग्ध को गिरफ्तार किया गया है?
असम पुलिस एसटीएफ ने हैलाकांडी से पाकिस्तान आधारित शहजाद भट्टी नेटवर्क (SBN) से जुड़े 21 वर्षीय संदिग्ध को गिरफ्तार किया है।
आरोपी को किस जगह से और कैसे पकड़ा गया?
आरोपी को हैलाकांडी जिले के रामनाथपुर इलाके से एसटीएफ और स्थानीय पुलिस के संयुक्त अभियान के दौरान पकड़ा गया।
क्या इस कार्रवाई के दौरान कोई सामान जब्त हुआ है?
हां, सुरक्षा बलों ने आरोपी के पास से कई दस्तावेज बरामद किए हैं, जिनकी जांच की जा रही है।
शहजाद भट्टी नेटवर्क भारत में किस तरह की गतिविधियों में शामिल रहा है?
सरकारी बयान के अनुसार, यह नेटवर्क ग्रेनेड, आईईडी व पेट्रोल बम हमलों और लक्षित हत्याओं (टारगेट किलिंग) में संलिप्त रहा है।
क्या असम में इस नेटवर्क के अन्य सदस्य भी पहले पकड़े गए हैं?
हां, 25 जुलाई को एसटीएफ ने धुबरी, चिरांग और बरपेटा जिलों से तीन अन्य संदिग्धों को गिरफ्तार किया था।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Karan Malhotra@karan-malhotra·35 दिन पहले

असम पुलिस की यह कार्रवाई पूर्वोत्तर में पाकिस्तान पोषित आतंकी मॉड्यूल की गहरी होती जड़ों की ओर इशारा करती है। जिस तरह से स्थानीय युवाओं को वित्तीय प्रलोभन देकर रेकी और जासूसी जैसे कृत्यों में इस्तेमाल किया जा रहा है, वह आंतरिक सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती है। जुलाई के बाद हुई यह गिरफ्तारियां दर्शाती हैं कि जांच एजेंसियां इस सिंडिकेट के स्लीपर सेल नेटवर्क को नेस्तनाबूद करने के लिए कितनी मुस्तैदी से काम कर रही हैं, और आने वाले दिनों में इसके अन्य स्थानीय संपर्कों पर भी बड़ा शिकंजा कसा जा सकता है।

Ravikash Gupta@ravikash·35 दिन पहले

यह घटनाक्रम केवल आंतरिक सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि सीमावर्ती क्षेत्रों में डिजिटल फाइनेंशियल चैनल्स और हवाला जैसी अवैध वित्तीय प्रणालियों के दुरुपयोग की ओर भी गंभीर संकेत देता है। पाकिस्तान स्थित इस नेटवर्क द्वारा स्थानीय युवाओं को धन का लालच देकर भर्ती करना और जासूसी जैसी गतिविधियों में शामिल करना यह स्पष्ट करता है कि अब सीमा-पार से होने वाले आतंक को वित्तपोषित करने के तौर-तरीके पूरी तरह बदल चुके हैं। हालांकि सुरक्षा एजेंसियों की मुस्तैदी से स्लीपर सेल बेनकाब हो रहे हैं, लेकिन वित्तीय प्रवाह के इस डिजिटल और गुप्त जाल को पूरी तरह तोड़ने के लिए बैंकिंग और डिजिटल ट्रांजैक्शन की बारीक निगरानी बेहद आवश्यक होगी, ताकि ऐसे नेटवर्क की फंडिंग की रीढ़ को हमेशा के लिए तोड़ा जा सके।

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