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असम में एक सींग वाले गैंडों का शिकार पूरी तरह थमा, मुख्यमंत्री ने साझा किए आंकड़ेअसम
22 सित॰ 2026, 1:16 pm (9 दिन पहले)· 2

असम में एक सींग वाले गैंडों का शिकार पूरी तरह थमा, मुख्यमंत्री ने साझा किए आंकड़े

विश्व गैंडा दिवस पर असम सरकार ने बताया कि वर्ष 2025 में राज्य में अवैध शिकार का कोई मामला सामने नहीं आया। दुनिया भर के लगभग 80 फीसदी एक सींग वाले गैंडे असम में सुरक्षित हैं।

विश्व गैंडा दिवस के मौके पर असम ने एक सींग वाले विशालकाय गैंडों के संरक्षण में एक उल्लेखनीय मील का पत्थर हासिल किया है। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने जानकारी साझा की कि राज्य दुनिया भर के लगभग 80 प्रतिशत एक सींग वाले गैंडों का आशियाना बना हुआ है। इसके साथ ही संरक्षण प्रयासों की बड़ी सफलता यह रही कि वर्ष 2025 के दौरान राज्य में गैंडों के अवैध शिकार की एक भी ज्ञात घटना दर्ज नहीं की गई।

मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने सोशल मीडिया पर लिखा कि इस विश्व गैंडा दिवस पर वे आंकड़ों को अपनी बात कहने दे रहे हैं। उन्होंने रेखांकित किया कि ये संख्याएं साबित करती हैं कि असम इस अनूठी प्रजाति का दुनिया में सबसे मजबूत और सुरक्षित गढ़ बन चुका है।

वैश्विक आबादी में बढ़ोतरी और असम की भूमिका

इंटरनेशनल राइनो फाउंडेशन की वर्ष 2026 की स्टेट ऑफ द राइनो रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया भर में एक सींग वाले गैंडों की अनुमानित संख्या बढ़कर 4,075 तक पहुंच गई है। यह आंकड़ा वर्ष 2022 में दर्ज 4,014 की तुलना में स्पष्ट वृद्धि दर्शाता है। इस वैश्विक आबादी में अकेले असम की हिस्सेदारी लगभग 3,260 गैंडों की है, जो दुनिया भर की कुल तादाद का करीब 80 प्रतिशत बैठता है।

राज्य में अवैध शिकार का लंबा इतिहास रहा है, जिसे देखते हुए वर्ष 2025 में शिकार की शून्य घटनाएं दर्ज होना बेहद महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है। रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 1970 के दशक के बाद से यह केवल दूसरा अवसर है जब असम में पूरे साल के दौरान अवैध शिकार का कोई ज्ञात मामला सामने नहीं आया। इससे पहले राज्य ने वर्ष 2022 में भी शिकार की शून्य घटनाओं का रिकॉर्ड हासिल किया था।

काजीरंगा और मानस में सुरक्षा व्यवस्था

काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान असम के गैंडा संरक्षण अभियान की मुख्य रीढ़ बना हुआ है। इस संरक्षित क्षेत्र में 2,600 से अधिक एक सींग वाले गैंडे मौजूद हैं, जो दुनिया भर में किसी भी एक स्थान पर रहने वाली इस प्रजाति की सबसे बड़ी आबादी है। इसके अलावा राज्य के अन्य संरक्षित इलाकों, जैसे मानस राष्ट्रीय उद्यान में भी गैंडों की संख्या को पुनर्स्थापित करने के लिए विशेष संरक्षण कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं।

अवैध शिकार में आई इस व्यापक गिरावट के पीछे कई ठोस कदम रहे हैं। बेहतर खुफिया जानकारी जुटाने, विभिन्न सुरक्षा बलों के बीच साझा तालमेल, कड़ी निगरानी, वन कर्मियों की पुख्ता तैनाती और स्थानीय समुदायों की सक्रिय भागीदारी ने शिकारियों के नेटवर्क को तोड़ा है। काजीरंगा की सुरक्षा प्रणाली में सैकड़ों निगरानी शिविर, ड्रोन तकनीक और विशेषज्ञ फ्रंटलाइन कर्मियों की तैनाती शामिल की गई है।

पर्यावरण मंत्री का संकल्प और भविष्य की चुनौतियां

असम के पर्यावरण एवं वन मंत्री जयंत मल्ला बरुआ ने कहा कि राज्य सरकार गैंडों की सुरक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने एक सींग वाले गैंडे को असम की प्राकृतिक धरोहर का सबसे मूल्यवान प्रतीक बताया। हालांकि वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि अवैध शिकार पर काबू पाना संरक्षण की बड़ी चुनौती का सिर्फ एक पहलू है।

जैसे-जैसे गैंडों की आबादी बढ़ रही है, उनके सामने दूसरी गंभीर पारिस्थितिक चुनौतियां खड़ी हो रही हैं। इनमें पर्यावास का सिकुड़ना और बिखरना, आक्रामक पौधों का प्रसार, पानी की किल्लत और इंसानी गतिविधियों का दबाव शामिल हैं। हर वर्ष 22 सितंबर को मनाया जाने वाला विश्व गैंडा दिवस इन्हीं संकटों के प्रति जागरूकता बढ़ाने और वन्यजीवों को सुरक्षित प्राकृतिक माहौल देने का संदेश देता है।

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सवाल-जवाब

विश्व गैंडा दिवस कब मनाया जाता है?
विश्व गैंडा दिवस हर साल 22 सितंबर को मनाया जाता है।
वर्ष 2025 में असम में गैंडों के अवैध शिकार की कितनी घटनाएं दर्ज हुईं?
वर्ष 2025 के दौरान असम में गैंडों के अवैध शिकार की शून्य घटनाएं दर्ज की गईं।
दुनिया भर में एक सींग वाले गैंडों की कुल अनुमानित आबादी कितनी है?
इंटरनेशनल राइनो फाउंडेशन की वर्ष 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया भर में इनकी कुल आबादी 4,075 है।
असम में कितने एक सींग वाले गैंडे पाए जाते हैं?
असम में लगभग 3,260 एक सींग वाले गैंडे हैं, जो वैश्विक आबादी का करीब 80 प्रतिशत है।
काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान में कितने गैंडे मौजूद हैं?
काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान में 2,600 से अधिक एक सींग वाले गैंडे रहते हैं, जो दुनिया की सबसे बड़ी एकल आबादी है।
वर्ष 1970 के बाद असम में किन-किन वर्षों में शिकार की शून्य घटनाएं दर्ज हुईं?
1970 के दशक के बाद से केवल 2022 और 2025 में ही अवैध शिकार का कोई ज्ञात मामला सामने नहीं आया।
अवैध शिकार के अलावा गैंडों के सामने कौन-सी मुख्य चुनौतियां हैं?
पर्यावास का विखंडन, आक्रामक वनस्पति, पानी की कमी और इंसानी गतिविधियां प्रमुख चुनौतियां हैं।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Nyra Kaif@nyra-kaif·8 दिन पहले

जीरो शिकार वाला आंकड़ा सुनकर खुशी तो हुई, पर क्या सच में ऐसा एक साल निकल गया बिना किसी घटना के?

Ravikash Gupta@ravikash·8 दिन पहले

असम में गैंडों का शिकार रुकना वाकई बहुत बड़ी राहत की खबर है। जब वन्यजीव बचते हैं और पर्यटन बढ़ता है, तो उस पूरे इलाके की इकॉनमी और लोकल बिजनेस को भी मजबूती मिलती है। सरकार और वन विभाग की यह सख्ती वाकई काबिले तारीफ है।

Omar AL Mansoori@omar-mansoori·8 दिन पहले

रविकश जी, आपकी बात बिल्कुल सही है कि इससे लोकल इकॉनमी मजबूत होगी। पर क्या आपको लगता है कि बाकी राज्यों के नेशनल पार्क्स में भी ऐसी ही सख्त सुरक्षा व्यवस्था लागू हो सकती है?

Karan Malhotra@karan-malhotra·8 दिन पहले

वन्यजीव अपराधों पर ऐसी लगाम वाकई बड़ी बात है, खासकर जब शिकारियों का नेटवर्क तोड़ना सबसे मुश्किल काम होता है।

Arjun Mehta@arjun-mehta·8 दिन पहले

करण भाई, शिकारियों का नेटवर्क तो टूटना बड़ी बात है ही, पर क्या ड्रोन और तकनीक ही इसके पीछे की असली वजह हैं या स्थानीय लोगों का साथ?

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