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बागेश्वर में सरकारी कैंटीन चलाकर आत्मनिर्भर बनीं 15 से ज्यादा महिलाएं, ऐपण और मसाले भी बेच रहा समूहउत्तराखंड
8 सित॰ 2026, 5:27 pm (59 दिन पहले)· 3

बागेश्वर में सरकारी कैंटीन चलाकर आत्मनिर्भर बनीं 15 से ज्यादा महिलाएं, ऐपण और मसाले भी बेच रहा समूह

बागेश्वर के विकास भवन और जिला कार्यालय की कैंटीन अब स्वयं सहायता समूह की महिलाएं चला रही हैं, जिनसे जुड़कर 15 से ज्यादा महिलाओं को रोजगार मिल रहा है और वे ऐपण, मसाले जैसे स्थानीय उत्पाद बेचकर भी कमाई कर रही हैं।

उत्तराखंड के बागेश्वर जिले में स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिलाएं सरकारी दफ्तरों की कैंटीन संभालकर न सिर्फ खुद कमा रही हैं, बल्कि दूसरी महिलाओं को भी रोजगार से जोड़ रही हैं। जिले के विकास भवन और जिला कार्यालय में चल रही कैंटीन आज इसी पहल की मिसाल बन चुकी हैं, जहां अब 15 से ज्यादा महिलाएं जुड़कर आजीविका कमा रही हैं।

पांच महिलाओं से शुरू हुआ सफर

समूह से जुड़ी सुनीता टम्टा के मुताबिक, विकास भवन में मई 2025 में नमन स्वयं सहायता समूह के नाम से कैंटीन शुरू की गई थी। उस वक्त टीम में सिर्फ पांच महिलाएं थीं और संसाधन भी बेहद सीमित थे। शुरुआती दिनों में कामकाज संभालना आसान नहीं था, लेकिन महिलाओं ने मेहनत में कोई कमी नहीं रखी। कैंटीन में साफ-सफाई और खाने की गुणवत्ता पर खास ध्यान दिया गया, जिसका नतीजा यह निकला कि धीरे-धीरे दफ्तर के स्टाफ और अफसरों का भरोसा उन पर बढ़ने लगा और कैंटीन को अच्छा सहयोग मिलने लगा।

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काम बढ़ा तो जिला कार्यालय की जिम्मेदारी भी मिली

विकास भवन की कैंटीन के बेहतर संचालन को देखते हुए समूह की महिलाओं को जिला कार्यालय में भी स्वयं सहायता समूह कैंटीन चलाने का मौका मिला। महिलाओं ने यहां भी उसी लगन से काम शुरू किया और यह नई जिम्मेदारी सफलतापूर्वक निभाई। शुरुआत में यहां भी टीम छोटी थी, लेकिन जैसे-जैसे कामकाज बढ़ता गया, समूह से जुड़ने वाली महिलाओं की तादाद भी लगातार बढ़ती चली गई। आज दोनों कैंटीन मिलाकर 15 से अधिक महिलाएं इस काम से सीधे जुड़ी हैं और नियमित आय अर्जित कर रही हैं, जो शुरुआती पांच महिलाओं की तुलना में तीन गुना से भी ज्यादा है।

कैंटीन तक सीमित नहीं, ऐपण और मसालों तक पहुंची कमाई

सुनीता टम्टा बताती हैं कि समूह की कमाई का जरिया सिर्फ कैंटीन तक सीमित नहीं है। महिलाएं ऐपण, कई तरह के मसाले और अन्य स्थानीय उत्पाद भी खुद तैयार करती हैं और उन्हें बाजार में बेचती हैं। त्योहारों और खास मौकों को ध्यान में रखते हुए समूह पहले से स्थानीय उत्पाद तैयार करता है, ताकि उन्हें सही समय पर बाजार तक पहुंचाया जा सके। इस वजह से महिलाओं के पास साल भर आय के अतिरिक्त जरिए मौजूद रहते हैं और उनकी कमाई सिर्फ कैंटीन की आमदनी पर निर्भर नहीं रहती।

सरकारी योजनाओं से मिला सहारा, बढ़ा आत्मविश्वास

समूह के साथ काम कर रहीं भावना रावत के अनुसार, स्वयं सहायता समूह के जरिए काम करने से महिलाओं को कई तरह के फायदे मिले हैं। समूह से जुड़े होने के कारण महिलाओं को सरकारी योजनाओं का लाभ भी आसानी से मिल पाता है, जो उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत करने में अहम भूमिका निभा रहा है। भावना कहती हैं कि समूह के जरिए काम करने से महिलाओं के भीतर आत्मविश्वास बढ़ा है और वे अपनी मेहनत की कमाई से आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।

जिला विकास अधिकारी बोलीं, यह महिला सशक्तीकरण की मिसाल

जिला विकास अधिकारी संगीता आर्य ने कहा कि स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिलाएं बेहद बेहतर तरीके से काम कर रही हैं और सरकार की मंशा यही है कि महिलाएं अपनी आर्थिकी मजबूत करते हुए आत्मनिर्भर बनें। उनके मुताबिक इन महिलाओं ने कैंटीन का संचालन बेहतर ढंग से करते हुए न सिर्फ अपनी कमाई बढ़ाई है, बल्कि गांव की दूसरी महिलाओं को भी अपने साथ जोड़कर उन्हें रोजगार का जरिया दिया है। कैंटीन संचालन से लेकर ऐपण, मसालों और अन्य स्थानीय उत्पादों तक फैली यह पहल स्वरोजगार को नई दिशा देने के साथ ही महिला सशक्तीकरण की एक मजबूत मिसाल बन गई है।

सवाल-जवाब

बागेश्वर में यह कैंटीन कहां-कहां चल रही हैं?
यह कैंटीन बागेश्वर के विकास भवन और जिला कार्यालय में चल रही हैं।
कैंटीन की शुरुआत कब और किसने की?
मई 2025 में नमन स्वयं सहायता समूह ने पांच महिलाओं के साथ विकास भवन में कैंटीन शुरू की थी।
अभी कितनी महिलाएं इस काम से जुड़ी हैं?
वर्तमान में दोनों कैंटीन मिलाकर 15 से अधिक महिलाएं समूह से जुड़कर रोजगार पा रही हैं।
जिला कार्यालय की कैंटीन कब मिली?
विकास भवन में काम बेहतर होने के बाद समूह की महिलाओं को जिला कार्यालय की कैंटीन संचालित करने का अवसर मिला।
क्या समूह की कमाई सिर्फ कैंटीन से होती है?
नहीं, समूह ऐपण, कई तरह के मसाले और अन्य स्थानीय उत्पाद भी बनाकर बेचता है, जिससे अतिरिक्त आय होती है।
इस पहल पर जिला प्रशासन का क्या कहना है?
जिला विकास अधिकारी संगीता आर्य ने इसे महिला सशक्तीकरण की मिसाल बताते हुए कहा कि सरकार चाहती है कि महिलाएं आत्मनिर्भर बनें।
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