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बख्तियारपुर का नाम बदलने की मांग: क्या ज्ञान की धरती से मिट पाएगा आक्रांता का नाम?बिहार
28 जून 2026, 1:06 pm (31 दिन पहले)· 2

बख्तियारपुर का नाम बदलने की मांग: क्या ज्ञान की धरती से मिट पाएगा आक्रांता का नाम?

सद्गुरु जग्गी वासुदेव समेत कई प्रमुख नेताओं ने बख्तियारपुर का नाम बदलने की पुरजोर मांग की है। यह चर्चा नालंदा विश्वविद्यालय को नष्ट करने वाले बख्तियार खिलजी के क्रूर इतिहास से जुड़ी है।

जब हम प्राचीन भारत के शैक्षिक वैभव और नालंदा जैसे वैश्विक ज्ञान केंद्र की गौरव गाथा का बखान करते हैं, तो यह बात अक्सर चुभती है कि उस ज्ञान की भूमि के निकट स्थित एक शहर का नाम बख्तियार खिलजी जैसे विनाशकारी आक्रांता के नाम पर है। आध्यात्मिक गुरु सद्गुरु जग्गी वासुदेव ने इस विसंगति पर सवाल उठाते हुए बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से बख्तियारपुर का नाम बदलने की स्पष्ट मांग की है। सद्गुरु का तर्क है कि भारत के समृद्ध अतीत और सांस्कृतिक विरासत के अनुरूप ही शहरों का नाम होना चाहिए। इस आह्वान के बाद बिहार की राजनीति में एक बार फिर हलचल मच गई है।

बढ़ता राजनीतिक समर्थन और सवाल

सद्गुरु की इस मांग के बाद कई राजनेताओं ने भी अपनी आवाज मुखर की है। बिहार विधान परिषद के सभापति अवधेश नारायण सिंह ने इस विचार का पूर्ण समर्थन करते हुए सुझाव दिया है कि बख्तियारपुर का नाम बदलकर भारतीय संस्कृति से जुड़े किसी महान व्यक्तित्व या स्थान के नाम पर रखा जाना चाहिए। इसी क्रम में भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता अजय आलोक ने भी तीखे तेवर अपनाते हुए पूछा है कि आखिर एक ऐसे व्यक्ति के नाम को कैसे ढोया जा सकता है जिसने देश की धरोहर को जलाकर राख कर दिया। उनका कहना है कि इस नाम का विरोध करने वालों की मंशा पर संदेह करना स्वाभाविक है।

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इतिहास का वो काला पन्ना

बख्तियारपुर, जो आज बिहार की राजधानी पटना से महज 50 किलोमीटर की दूरी पर स्थित एक महत्वपूर्ण रेलवे जंक्शन है, का नाम 12वीं सदी के तुर्क आक्रांता इख्तियारुद्दीन मोहम्मद बिन बख्तियार खिलजी के नाम पर पड़ा। इतिहास के पन्नों में दर्ज है कि 1193 के आसपास उसने अपने अभियानों के दौरान बिहार और बंगाल को दहला दिया था। नालंदा विश्वविद्यालय पर उसका हमला भारतीय शिक्षा प्रणाली के लिए सबसे दुखद घटना थी। उसने न केवल वहां के हजारों बौद्ध भिक्षुओं की निर्मम हत्या की, बल्कि दुनिया की सबसे बड़ी लाइब्रेरी में आग लगवा दी। जानकारों के अनुसार, वहां मौजूद लाखों पांडुलिपियां जलकर राख हो गईं और वह आग कई महीनों तक धधकती रही थी। इसी आक्रांता ने पटना के निकट अपनी छावनी बनाई थी, जो कालांतर में बख्तियारपुर कहलाने लगी।

विकास बनाम इतिहास की बहस

शहर का नाम बदलने की यह मांग नई नहीं है। इससे पहले भी विभिन्न सामाजिक संगठनों और राजनीतिक हस्तियों ने इसे 'नीतीश नगर' या किसी अन्य ऐतिहासिक नाम से बदलने का प्रस्ताव रखा है। जब यह मुद्दा तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के समक्ष आया था, तो उनका रुख विकासवादी रहा। उन्होंने अक्सर यह तर्क दिया है कि इतिहास में जो हो गया उसे बदला नहीं जा सकता, और चूंकि यह उनका गृह स्थान है, इसलिए वहां का आधारभूत ढांचा और नागरिक सुविधाएं सुधारना नाम बदलने से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है। हालांकि, हर बार जब देश में किसी स्थान का नाम बदलने का माहौल बनता है, तो बख्तियारपुर का यह मुद्दा सुर्खियों में आ ही जाता है।

आधुनिक बख्तियारपुर और जनभावना

आज का बख्तियारपुर एक तेजी से फैलता हुआ उपनगरीय इलाका है। यह शहर पटना और हावड़ा के बीच रेल मार्ग का एक व्यस्त बिंदु है, जहां से राजगीर और नालंदा जैसे पर्यटन स्थलों के लिए मार्ग गुजरता है। यहां के बाजारों में कोचिंग सेंटरों की भरमार है और युवाओं की चहल-पहल रहती है। लेकिन स्टेशन के बोर्ड और सरकारी दस्तावेजों पर लिखा वह नाम खिलजी के उस क्रूर इतिहास की याद दिलाता है। बाहरी पर्यटकों के लिए यह एक अजीब विरोधाभास है कि जिस नालंदा को देखने के लिए वे आ रहे हैं, उसी के रास्ते में एक आक्रांता के नाम का बोर्ड लगा है।

स्थानीय लोगों का दर्द

नाम परिवर्तन को लेकर यहां के निवासियों में बंटी हुई राय है। बुजुर्गों का एक बड़ा वर्ग मानता है कि केवल नाम बदलने से सड़कें, ड्रेनेज या रोजगार नहीं सुधरते, इसलिए उनका ध्यान बुनियादी सुविधाओं पर अधिक है। इसके उलट, शहर के छात्र और युवा इस नाम को एक ऐतिहासिक कलंक मानते हैं। बाहर जाने पर जब उनसे उनके शहर का नाम पूछा जाता है, तो उन्हें अक्सर शर्मिंदगी का अहसास होता है। उनके अनुसार, यह नाम उस घाव की तरह है जो वर्षों बाद भी रिस रहा है और नई पीढ़ी इसे हटाकर गौरव वापस लाना चाहती है।

सवाल-जवाब

बख्तियारपुर का नाम किसके नाम पर रखा गया है?
बख्तियारपुर का नाम 12वीं सदी के तुर्क आक्रांता इख्तियारुद्दीन मोहम्मद बिन बख्तियार खिलजी के नाम पर रखा गया है।
सद्गुरु ने क्या मांग की है?
सद्गुरु ने बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से बख्तियारपुर का नाम बदलने की मांग की है, ताकि यह भारत के गौरवशाली अतीत को दर्शा सके।
बख्तियार खिलजी को आक्रांता क्यों कहा जाता है?
बख्तियार खिलजी को इसलिए आक्रांता कहा जाता है क्योंकि उसने नालंदा विश्वविद्यालय को नष्ट किया, वहां के बौद्ध भिक्षुओं की हत्या की और विश्वविद्यालय की विशाल लाइब्रेरी को जला दिया था।
बख्तियारपुर का नाम बदलने के बारे में नीतीश कुमार का क्या रुख रहा है?
नीतीश कुमार का मानना रहा है कि इतिहास को बदला नहीं जा सकता और नाम बदलने से अधिक महत्वपूर्ण शहर का विकास और वहां की बुनियादी सुविधाएं हैं।
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