केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट-यूजी 2024 के बहुचर्चित पेपर लीक मामले में एक बड़ा और चौंकाने वाला अपडेट दिया है। जांच एजेंसी ने इस पूरे राष्ट्रीय विवाद में लंबे समय से मुख्य संदिग्ध माने जा रहे संजीव मुखिया को बड़ी राहत देते हुए स्पष्ट किया है कि इस बड़े अपराध में उनकी कोई संलिप्तता नहीं पाई गई है। सीबीआई की इस क्लीन चिट के बाद उन तमाम अटकलों और राजनीतिक बहसों पर पूरी तरह से विराम लग गया है, जिनमें लगातार संजीव मुखिया को इस विशाल साजिश का मुख्य सूत्रधार और मास्टरमाइंड बताया जा रहा था, जिसने लाखों छात्रों के भविष्य को भारी संकट में डाल दिया था।
सीबीआई की गहन जांच में क्या सामने आया?
सीबीआई के वरिष्ठ अधिकारियों ने कई राज्यों में फैली अपनी बारीकी पड़ताल के बाद यह निष्कर्ष निकाला है कि संजीव मुखिया के खिलाफ कोई भी ऐसा ठोस सबूत मौजूद नहीं है, जो उन्हें इस मामले से सीधे तौर पर जोड़ सके। जांच एजेंसी ने स्पष्ट रूप से कहा है कि इस बात का कोई भी प्रमाण नहीं मिला कि संजीव मुखिया ने हजारीबाग से प्रश्नपत्र चुराया या फिर उसे लीक करवाने में किसी तरह की तकनीकी या लॉजिस्टिक मदद की। इसके अलावा, उन पर प्रश्नपत्र और उसके हल को मेडिकल अभ्यर्थियों तक पहुंचाने का जो गंभीर संदेह था, वह भी जांच में पूरी तरह से निराधार साबित हुआ है। जांच में यह भी साफ हो गया है कि संजीव मुखिया ने इस पूरे षड्यंत्र का ना तो कोई संचालन किया और ना ही इसके बड़े वित्तीय प्रबंधन में कोई भूमिका निभाई। गौरतलब है कि अपनी इसी जांच रिपोर्ट के आधार पर एजेंसी ने अपनी चार्जशीट और सुप्रीम कोर्ट में दी गई विस्तृत रिपोर्ट में भी उनका नाम शामिल नहीं किया था।
हजारीबाग का ओएसिस स्कूल था मुख्य केंद्र
संजीव मुखिया को संदेह के घेरे से बाहर निकालने के साथ ही सीबीआई ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि आखिर इस पूरी धांधली की असली शुरुआत कहां से हुई थी। जांच के अनुसार, झारखंड के हजारीबाग में स्थित ओएसिस स्कूल इस पूरे पेपर लीक कांड का मुख्य केंद्र था। सीबीआई ने बताया कि इसी स्कूल से परीक्षा शुरू होने से कुछ घंटे पहले ट्रंक में रखे गए प्रश्नपत्र तक बेहद ही अवैध तरीके से पहुंच बनाई गई थी।
सॉल्वर गैंग ने कैसे दिया वारदात को अंजाम
ओएसिस स्कूल से पेपर लीक होने के तुरंत बाद एक अत्यधिक संगठित और शातिर सॉल्वर गैंग सक्रिय हुआ। इस नेटवर्क ने सबसे पहले प्रश्नपत्र को हल किया और फिर उस आंसर की को बेहद सीमित संख्या में कुछ खास अभ्यर्थियों तक सुरक्षित तरीके से पहुंचा दिया, जिन्होंने इसके लिए मोटी रकम चुकाई थी। सीबीआई ने इस पूरी साजिश का पर्दाफाश करने के लिए मोबाइल लोकेशन, तकनीकी डेटा और फॉरेंसिक सबूतों का भारी मात्रा में सहारा लिया है। इन पुख्ता सबूतों के आधार पर ही कई असली आरोपियों की गिरफ्तारी की गई और बाद में अदालत में चार्जशीट दायर की गई, जिसमें गैंग के काम करने के तरीके को विस्तार से समझाया गया है।
संजीव मुखिया का दो दशक पुराना आपराधिक इतिहास
भले ही मौजूदा नीट 2024 मामले में संजीव मुखिया को एक बड़ी राहत मिल गई हो, लेकिन उनका अतीत बेहद दागी और विवादों से भरा रहा है। मूल रूप से बिहार में नालंदा जिले के नगरनौसा के रहने वाले संजीव मुखिया का अंतरराज्यीय सॉल्वर गैंग से काफी पुराना और गहरा नाता रहा है। वह पिछले करीब बीस सालों से विभिन्न प्रतियोगी और सरकारी परीक्षाओं में सेटिंग और धांधली कराने के मामलों में सक्रिय रूप से शामिल रहे हैं। अपने इन्हीं आपराधिक कारनामों की वजह से वह पहले भी कई बार पुलिस के हत्थे चढ़ चुके हैं और उन्हें लंबे समय तक जेल की हवा भी खानी पड़ी है।
सरकारी नौकरी और परिवार का विवादों से नाता
संजीव मुखिया के बारे में यह भी जानकारी मिली है कि वह कभी मुख्यधारा में बिहार सरकार के एक नियमित कर्मचारी हुआ करते थे। वह विभाग में लोअर डिविजनल क्लर्क (एलडीसी) के पद पर तैनात थे। लेकिन पेपर लीक के इन मामलों में सिर्फ संजीव ही नहीं, बल्कि उनका अपना परिवार भी सीधे तौर पर शामिल रहा है। उनके बेटे डॉक्टर शिव को भी बिहार में हुई एक बड़ी शिक्षक बहाली परीक्षा का पेपर लीक करने के गंभीर आरोप में गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है।
पत्नी का राजनीतिक सफर और निजी जीवन
संजीव मुखिया ने अंतरजातीय विवाह किया है और उनका परिवार स्थानीय स्तर पर राजनीतिक रूप से भी काफी सक्रिय रहा है, जिससे उन्हें इलाके में रसूख मिलता है। उनकी पत्नी ममता देवी पहले अपने पंचायत की मुखिया रह चुकी हैं, और इसी वजह से संजीव के नाम में 'मुखिया' जुड़ गया। इतना ही नहीं, अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं को आगे बढ़ाते हुए ममता देवी ने लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) के टिकट पर बिहार विधानसभा का अहम चुनाव भी लड़ा था, हालांकि उन्हें इस बड़े चुनाव में हार का ही सामना करना पड़ा था।




















