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बलिया के गोपाल नगर ताड़ी में घाघरा का कहर, अपने हाथों से घर तोड़ रहे ग्रामीणउत्तर प्रदेश
5 अग॰ 2026, 12:48 pm (85 दिन पहले)· 2

बलिया के गोपाल नगर ताड़ी में घाघरा का कहर, अपने हाथों से घर तोड़ रहे ग्रामीण

उत्तर प्रदेश के बलिया जिले में घाघरा नदी की तेज कटान से गोपाल नगर ताड़ी गांव के दर्जनों घर नदी में समा चुके हैं, जिससे ग्रामीण अपने हाथों से मकान तोड़कर सुरक्षित जगह भाग रहे हैं. ग्रामीणों ने कटान रोकने के कार्यों में भ्रष्टाचार और प्रशासनिक लापरवाही का आरोप लगाया है.

उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के दियारा इलाके में घाघरा नदी इन दिनों कहर बरपा रही है. गोपाल नगर ताड़ी गांव के लोग अपने ही हाथों से अपने मकान तोड़कर वहां से निकलने को मजबूर हो गए हैं, क्योंकि नदी की उफनती धारा गांव को धीरे धीरे निगलती जा रही है. दियारा इलाके ऐसे निचले, नदी किनारे बसे इलाके होते हैं जो हर साल कटान और बाढ़ की मार झेलते हैं, लेकिन इस बार हालात पहले से कहीं ज्यादा भयावह बताए जा रहे हैं.

दर्जनों घर नदी में समा गए

तेज कटान की वजह से गांव के दर्जनों मकान अब तक घाघरा नदी में विलीन हो चुके हैं. कई परिवार पूरी तरह बेघर हो चुके हैं और सुरक्षित ठिकाने की तलाश में इधर उधर भटक रहे हैं. गांव की करीब 3 किलोमीटर लंबी बस्ती अब सिर्फ नदी के पानी में तब्दील हो चुकी है, जहां पहले घर हुआ करते थे. ग्रामीणों का कहना है कि जिस जगह कुछ समय पहले तक बातचीत हो रही थी, ठीक उसके पीछे एक घर ऐसा खड़ा था जो किसी भी वक्त नदी में गिर सकता था.

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कटान रोकने के काम में भ्रष्टाचार का आरोप

गांव के लोगों का आरोप है कि कटान रोकने के लिए जो काम कराए गए, उनमें भारी लापरवाही और भ्रष्टाचार बरता गया. उनका कहना है कि अगर कटान रोधी बजट का पैसा ईमानदारी से खर्च हुआ होता, तो शायद आज गांव का यह हाल नहीं होता. ग्रामीणों के मुताबिक प्रशासन अभी भी कुंभकर्णीय नींद में सोया हुआ है और गांव से लगातार दिल दहला देने वाले वीडियो सामने आ रहे हैं, फिर भी कोई अधिकारी मौके पर पहुंचकर हाल जानने नहीं आया.

फोटो खिंचवाकर चले जाते हैं नेता, ग्रामीणों का गुस्सा

ग्रामीण पप्पू कुमार ने बताया कि यहां कटान लगातार और बहुत तेज रफ्तार से हो रहा है, लेकिन गांव वालों की पीड़ा सुनने वाला कोई नहीं है. उन्होंने बताया कि गोपाल नगर ताड़ी यादव बहुल गांव है और यहां के विधायक व सांसद दोनों समाजवादी पार्टी से ही हैं, फिर भी कोई मदद के लिए आगे नहीं आया. पप्पू कुमार के मुताबिक अगर विधायक कभी भूले भटके गांव आ भी जाएं, तो बस अच्छी सी फोटो खिंचवाकर लौट जाते हैं. उन्होंने दावा किया कि इस बार करीब 50 से ज्यादा घर घाघरा नदी में समा चुके हैं.

गांव पहुंचे अतुल चौबे ने कहा कि कम से कम जनप्रतिनिधियों को यहां आकर लोगों का दुख दर्द समझना चाहिए. उन्होंने बताया कि गांव के लोगों से बातचीत में यह साफ हुआ कि अब तक न तो यहां के विधायक आए हैं और न ही सांसद की कोई झलक दिखी है.

तहसील से मिला सिर्फ 10 दिन का भरोसा

ग्रामीण वकील कुमार यादव ने बताया कि यह पूरी तरह यादव बस्ती है, जहां से सपा विधायक जयप्रकाश अंचल आते हैं, लेकिन वह भी सिर्फ फोटो खिंचवाने ही आते हैं. वकील कुमार यादव के मुताबिक परेशान गांव वाले मदद मांगने तहसील तक भी गए थे, जहां से उन्हें सिर्फ यह भरोसा मिला कि 10 दिन में कोई कार्रवाई होगी.

चार साल से जारी है नदी का कहर, 400 से 500 घर पहले ही उजड़ चुके

ग्रामीण जितेंद्र कुमार यादव ने बताया कि कटान रुकने का नाम ही नहीं ले रहा और यह सिलसिला करीब 4 साल से लगातार चल रहा है. उनके मुताबिक इस साल अकेले करीब 50 से 60 घर घाघरा नदी अपने साथ बहा ले गई है, जबकि पिछले वर्षों में अब तक लगभग 400 से 500 घर नदी में विलीन हो चुके हैं. जितेंद्र कुमार यादव का कहना है कि इस रफ्तार से कटान जारी रहा, तो इस बार पूरे गांव का वजूद ही खत्म हो जाएगा.

तिरपाल के सहारे खुले आसमान के नीचे जिंदगी

जिन परिवारों के घर घाघरा नदी में बह चुके हैं, वे अब सड़क किनारे तिरपाल टांगकर रहने को मजबूर हैं. ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन की तरफ से अब तक उन्हें कोई ठोस मदद नहीं मिली है. गांव वाले प्रशासन से तुरंत राहत और स्थायी सुरक्षा उपायों की मांग कर रहे हैं, ताकि बचे हुए घरों और परिवारों को नदी के इस कहर से बचाया जा सके.

सवाल-जवाब

गोपाल नगर ताड़ी गांव किस जिले में है?
यह गांव उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के दियारा इलाके में स्थित है.
गांव में कटान की वजह से कितने घर नष्ट हो चुके हैं?
ग्रामीणों के मुताबिक इस साल करीब 50 से 60 घर घाघरा नदी में समा चुके हैं, जबकि पिछले सालों में लगभग 400 से 500 घर नदी में विलीन हो चुके हैं.
गांव में कटान कब से हो रहा है?
ग्रामीणों के अनुसार यहां लगभग 4 साल से लगातार कटान हो रहा है.
गांव के विधायक कौन हैं?
यहां के विधायक समाजवादी पार्टी के जयप्रकाश अंचल हैं, जिन पर ग्रामीणों ने सिर्फ फोटो खिंचवाने आने का आरोप लगाया है.
बेघर हुए परिवार अभी कहां रह रहे हैं?
जिनके घर नदी में बह गए हैं, वे सड़क किनारे तिरपाल टांगकर रह रहे हैं.
प्रशासन ने अब तक क्या मदद की है?
ग्रामीणों के मुताबिक प्रशासन की तरफ से अब तक कोई ठोस मदद नहीं मिली है, तहसील से सिर्फ 10 दिन में कार्रवाई का भरोसा दिया गया है.
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