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बालोद के इस ढाबे में सिर्फ 20 रुपये में मिलता है नाश्ता, रोज बिकती हैं 1000 प्लेटछत्तीसगढ़
7 सित॰ 2026, 7:07 am (18 दिन पहले)· 2

बालोद के इस ढाबे में सिर्फ 20 रुपये में मिलता है नाश्ता, रोज बिकती हैं 1000 प्लेट

बालोद जिले के लाटाबोड़ गांव में चेमन चंद्रवंशी के होटल का गरमागरम नाश्ता अब पूरे इलाके में मशहूर है, यहां रोज 1000 से ज्यादा प्लेट बिकती हैं और फुल प्लेट की कीमत महज 20 रुपये है, इस कारोबार की नींव 15 साल पहले उनके पिता ने सिर्फ 5000 रुपये से रखी थी।

छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में लाटाबोड़ गांव का एक छोटा सा नाश्ता सेंटर आज इलाके की सबसे व्यस्त दुकानों में गिना जाने लगा है, जहां हर दिन 1000 से ज्यादा प्लेट गरमागरम नाश्ता ग्राहकों तक पहुंचता है। यह पहचान चेमन चंद्रवंशी और उनके परिवार की मेहनत की बदौलत बनी है, जो बस स्टैंड के पास अपना यह होटल चलाते हैं और आज पूरे जिले में अपने स्वाद के लिए जाने जाते हैं।

बस स्टैंड के पास मिलता है गरमागरम नाश्ता

यह होटल लाटाबोड़ बस स्टैंड से सटा हुआ है और यहां सुबह 8 बजे से लेकर रात 8 बजे तक लगातार नाश्ता परोसा जाता है, यानी ग्राहकों के पास पूरे बारह घंटे का मौका रहता है। यहां नाश्ते में वड़ा परोसा जाता है, साथ ही मिर्चा भजिया और आलू भजिया भी बनाए जाते हैं, इसके अलावा छोटा भजिया भी ग्राहकों को खूब पसंद आता है। इसके साथ टमाटर-मिर्ची की चटनी, धनिया की चटनी और कड़ी वाली खट्टी चटनी भी दी जाती है, जिससे स्वाद का यह मेल ग्राहकों को बार-बार यहां खींच लाता है, चाहे वे दिन के किसी भी समय पहुंचें।

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फुल प्लेट के बस 20 रुपये

इस दुकान की सबसे बड़ी खासियत इसकी कीमत है। यहां फुल प्लेट नाश्ते के लिए ग्राहकों को केवल 20 रुपये चुकाने होते हैं, जबकि हाफ प्लेट सिर्फ 10 रुपये में मिल जाती है। इतनी कम कीमत के बावजूद नाश्ता हमेशा ताजा और गरमागरम रहता है, यही वजह है कि आसपास के इलाके से लोग रोजाना काम पर जाते, स्कूल जाते या बाजार जाते वक्त यहां रुकना नहीं भूलते।

हर दिन बिक जाती हैं हजार से ज्यादा प्लेटें

औसतन इस दुकान से रोजाना 1000 से ज्यादा प्लेट नाश्ता बिक जाता है, और सोमवार को यह संख्या और बढ़ जाती है क्योंकि उस दिन लाटाबोड़ में साप्ताहिक बाजार लगता है। रविवार को साप्ताहिक अवकाश होने से भी ग्राहकों की भीड़ सामान्य से ज्यादा हो जाती है। चेमन ने दसवीं कक्षा तक पढ़ाई की थी, इसके बाद उन्होंने स्कूल छोड़कर परिवार के इस कारोबार की पूरी जिम्मेदारी अपने कंधों पर ले ली। अब परिवार का हर सदस्य सुबह से लेकर रात तक इस काम में हाथ बंटाता है, यह दुकान किसी एक व्यक्ति का नहीं बल्कि पूरे परिवार का साझा उद्यम बन चुकी है।

सिर्फ 5000 रुपये से शुरू हुआ था यह कारोबार

इस दुकान की नींव करीब 15 साल पहले चेमन के पिता सोहनलाल चंद्रवंशी ने रखी थी, तब उन्होंने महज 5000 रुपये लगाकर यह काम शुरू किया था। शुरुआत बेहद छोटी थी, लेकिन लगातार मेहनत और ग्राहकों के भरोसे की बदौलत यह कारोबार साल दर साल आगे बढ़ता चला गया, बिना किसी बड़े बाहरी निवेश के। जो दुकान कभी एक मामूली नाश्ता काउंटर के तौर पर शुरू हुई थी, वह आज पूरे परिवार की कमाई का भरोसेमंद जरिया बन चुकी है, और रोजाना बिकने वाली हजार से ज्यादा प्लेटें यह साबित करती हैं कि सही कीमत, ताजा स्वाद और स्थानीय पसंद आज भी एक छोटे शहर में भारी भीड़ खींच सकते हैं।

सवाल-जवाब

यह दुकान कहां स्थित है?
यह छत्तीसगढ़ के बालोद जिले के लाटाबोड़ गांव में बस स्टैंड के पास स्थित है।
यहां नाश्ते में क्या-क्या मिलता है?
यहां वड़ा, मिर्चा भजिया, आलू भजिया और छोटा भजिया के साथ टमाटर-मिर्ची, धनिया और कड़ी की खट्टी चटनी परोसी जाती है।
फुल प्लेट और हाफ प्लेट नाश्ते की कीमत क्या है?
फुल प्लेट नाश्ता 20 रुपये में और हाफ प्लेट 10 रुपये में मिलता है।
यह दुकान रोजाना कितनी देर खुली रहती है?
यह होटल सुबह 8 बजे से रात 8 बजे तक खुला रहता है।
रोजाना कितनी प्लेट नाश्ता बिकता है?
यहां रोजाना 1000 से ज्यादा प्लेट नाश्ता बिक जाता है।
यह कारोबार किसने और कब शुरू किया था?
इसे करीब 15 साल पहले चेमन चंद्रवंशी के पिता सोहनलाल चंद्रवंशी ने महज 5000 रुपये की लागत से शुरू किया था।
किन दिनों में सबसे ज्यादा भीड़ रहती है?
सोमवार को साप्ताहिक बाजार और रविवार को छुट्टी होने की वजह से इन दो दिनों में ग्राहकों की संख्या और बढ़ जाती है।
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टिप्पणियाँ 2

Rohan Verma@rohan-verma·17 दिन पहले

यह सफलता दर्शाती है कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था और स्थानीय बाजारों में कम लागत के साथ गुणवत्ता और निरंतरता बनाए रखने पर बड़ा उद्यम खड़ा किया जा सकता है। भविष्य में इस तरह के सामुदायिक उद्यमों को औपचारिक ऋण और खाद्य सुरक्षा मानकों का लाभ देकर इनके विस्तार की दिशा में नीतिगत कदम उठाए जाने चाहिए।

Karan Malhotra@karan-malhotra·17 दिन पहले

यह सफलता दर्शाती है कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था और स्थानीय बाजारों में कम लागत के साथ गुणवत्ता और निरंतरता बनाए रखने पर बड़ा उद्यम खड़ा किया जा सकता है। भविष्य में इस तरह के सामुदायिक उद्यमों को औपचारिक ऋण और खाद्य सुरक्षा मानकों का लाभ देकर इनके विस्तार की दिशा में नीतिगत कदम उठाए जाने चाहिए। साथ ही, सार्वजनिक स्थलों पर ऐसे जन-केंद्रित व्यवसायों के सुचारू संचालन से स्थानीय स्तर पर छोटे रोजगार के नए अवसर भी सृजित होते हैं, जो अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाते हैं।

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