बारिश के दिनों में मवेशियों की सेहत को लेकर पशुपालकों की चिंता बढ़ जाती है, खासकर तब जब गाय के मुंह से अचानक झाग निकलने लगे। कृषि विज्ञान केंद्र से जुड़े पशु चिकित्सा वैज्ञानिकों के मुताबिक यह लक्षण मामूली अपच से लेकर गंभीर बीमारी तक, किसी भी वजह से हो सकता है, इसलिए इसे हल्के में लेने की भूल नहीं करनी चाहिए।
झाग की वजह कई हो सकती है
ज्यादातर मामलों में गाय के मुंह से झाग निकलने की वजह अधिक हरा चारा खाना, अपच या पेट में गैस बनना होती है। कई बार गाय किसी जहरीले पौधे को चर लेती है, जिससे भी यह दिक्कत सामने आती है। इसके अलावा मुंह में घाव, दांतों की तकलीफ या किसी गंभीर संक्रामक बीमारी की वजह से भी यह लक्षण दिख सकता है। इसलिए झाग देखते ही घबराने के बजाय गाय की पूरी स्थिति को समझना जरूरी है।
सबसे पहले ये सावधानी बरतें
अगर गाय के मुंह से झाग निकल रहा हो तो सबसे पहले उसे शांत और साफ-सुथरी जगह पर बांधना चाहिए। गलती से भी उसके मुंह में जबरदस्ती कोई दवा या पानी न डालें, क्योंकि इससे तरल पदार्थ सांस की नली में चले जाने का खतरा रहता है, जो जानलेवा साबित हो सकता है। कुछ समय के लिए हरा चारा बंद कर दें और केवल साफ पानी ही पिलाएं। साथ ही गाय के व्यवहार, उसकी सांस लेने की रफ्तार और पेट की हालत पर लगातार नजर बनाए रखनी चाहिए।
पेट फूला दिखे तो देर न करें
अगर गाय का पेट फूला हुआ नजर आए तो समझ लें कि पेट में अपच के साथ गैस बन गई है। ऐसी हालत में गाय बार-बार उठने और बैठने की कोशिश करती रहेगी, क्योंकि उसे तकलीफ महसूस होती है। इस स्थिति में देर किए बिना पशु चिकित्सक को बुलाना चाहिए, क्योंकि पेट में ज्यादा गैस बनना गाय की जान के लिए खतरा बन सकता है। इस दौरान एक साथ बहुत ज्यादा हरा चारा और भीगा हुआ चारा खिलाने से बचना चाहिए, क्योंकि यह गैस की समस्या को और बढ़ा सकता है।
बरसात में जहरीले पौधों से रहें सावधान
मानसून के मौसम में खेतों और चरागाहों में कई तरह के जहरीले पौधे अपने आप उग आते हैं। अगर गाय अनजाने में इन्हें खा लेती है तो मुंह से झाग निकलने के साथ-साथ कमजोरी, कांपना और बेचैनी जैसे लक्षण भी दिखाई दे सकते हैं। इसीलिए गाय को हमेशा साफ और ताजा चारा ही खिलाना चाहिए। फफूंदी लगा, सड़ा हुआ या बदबूदार चारा भूलकर भी न दें, क्योंकि यह पेट खराब करने के साथ जहरीले असर का कारण भी बन सकता है।
ये लक्षण दिखें तो समझें आपातकाल है
अगर गाय लगातार झाग छोड़ रही है, उसे सांस लेने में तकलीफ हो रही है, शरीर कांप रहा है, पेट बहुत ज्यादा फूल गया है, तेज बुखार है और गाय उठ भी नहीं पा रही है तो यह स्थिति आपातकाल मानी जाती है। ऐसे में एक पल की भी देरी किए बिना तुरंत नजदीकी पशु चिकित्सक को बुलाना चाहिए, क्योंकि इस हालत में समय पर इलाज न मिलने पर गाय की जान को खतरा हो सकता है।
नियमित देखभाल से टल सकती है दिक्कत
पशु चिकित्सा वैज्ञानिकों की सलाह है कि गाय को हमेशा संतुलित आहार, स्वच्छ पानी और साफ-सुथरा वातावरण मिलना चाहिए। जानवर के आहार में अचानक बदलाव करने से बचें, हरा और सूखा चारा हमेशा संतुलित मात्रा में ही खिलाएं। समय-समय पर कृमिनाशक दवा और जरूरी टीकाकरण भी कराते रहना चाहिए। चारे को हमेशा सूखी जगह पर रखें ताकि उसमें फफूंदी न लगे। पशु चिकित्सा वैज्ञानिकों के मुताबिक गाय के मुंह से झाग आना एक ऐसा संकेत है, जिसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। यह मामूली अपच से लेकर किसी गंभीर बीमारी तक का लक्षण हो सकता है। इसलिए बिना कारण जाने घर पर ही इलाज करने के बजाय पहले गाय की स्थिति को ठीक से समझें और जरूरत पड़ने पर तुरंत पशु चिकित्सक की मदद लें। सही समय पर इलाज, संतुलित आहार, साफ पानी और नियमित देखभाल से ही पशु स्वस्थ रह पाएगा।




















