पहाड़ी राज्य हिमाचल प्रदेश में कुदरत का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है। मौसम विज्ञान केंद्र ने प्रदेश के कई हिस्सों में 28 जुलाई से लेकर 31 जुलाई तक भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी देते हुए ऑरेंज अलर्ट घोषित किया है। लगातार हो रही मूसलाधार बारिश, अचानक आई बाढ़ और भूस्खलन के चलते राज्य की जीवन रेखा कही जाने वाली 135 सड़कें पूरी तरह बंद हो चुकी हैं। मानसून के आगमन यानी 30 जून से लेकर अब तक राज्य में भूस्खलन और बाढ़ जनित हादसों में 15 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। मौसम विभाग का अनुमान है कि पूरे राज्य में 1 अगस्त तक बारिश का दौर लगातार जारी रहेगा, जिससे आने वाले दिनों में चुनौतियां और बढ़ सकती हैं।
चंबा में नदी में गिरे बाइक सवार, एक की तलाश जारी
बारिश के कारण नदियां और नाले रौद्र रूप धारण कर चुके हैं। चंबा जिले में देर रात लगभग 11 बजे एक दर्दनाक हादसा सामने आया, जहां सारू गांव के रहने वाले दो युवक मोटरसाइकिल सहित साल नदी के तेज बहाव में गिर गए। घटना की जानकारी मिलते ही एनडीआरएफ, चंबा पुलिस, दमकल विभाग और हिमाचल होमगार्ड की टीमों ने संयुक्त रूप से राहत और बचाव अभियान शुरू किया। कड़ी मशक्कत के बाद 17 वर्षीय शुभम को गंभीर हालत में नदी के किनारे से सुरक्षित निकालकर इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाया गया। वहीं, उनके साथ मौजूद 19 वर्षीय सक्षम का अभी तक कोई सुराग नहीं मिल पाया है और तलाश के लिए सर्च ऑपरेशन लगातार चलाया जा रहा है।
लाहौल की मयाड़ घाटी में बादल फटा, जोबरंग पुल जलमग्न
लाहौल-स्पीति जिले की मयाड़ घाटी स्थित धोन्धल नाले में शनिवार रात एक बार फिर बादल फटने की घटना हुई। इस प्राकृतिक आपदा की वजह से नाले पर बना अस्थाई पुल पानी के तेज बहाव में दोबारा बह गया। इस क्षेत्र से स्थानीय विधायक अनुराधा राणा ने स्थिति की जानकारी देते हुए बताया कि लोक निर्माण विभाग की टीमों ने तत्परता दिखाते हुए मार्ग को आवाजाही के लिए बहाल कर दिया है और आपात स्थिति से निपटने के लिए मौके पर भारी मशीनरी तैनात रखी गई है। आवाजाही सुचारू रखने के लिए एक अस्थायी झूला भी स्थापित किया गया है।
विधायक अनुराधा राणा ने यह भी स्पष्ट किया कि धोन्धल नाले में बीते वर्षों के दौरान 8 से 10 छोटे-बड़े पुल बाढ़ की भेंट चढ़ चुके हैं। उन्होंने कहा कि विभाग लगातार काम कर रहा है, लेकिन बार-बार बादल फटने से बनी संरचनाएं बह जाती हैं। इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए सरकार से एक बड़ा फ्लाईओवर नुमा पुल स्वीकृत करवा लिया गया है। इसकी कागजी प्रक्रिया अंतिम चरण में है और इसी साल निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा। इसके अलावा, लाहौल के जोबरंग में बना पुल भी चंद्रभागा नदी के बढ़ते जलस्तर के कारण शाम के समय पानी में डूब गया। मौसम साफ होते ही पहाड़ों पर बर्फ पिघलने और ऊपरी इलाकों में बारिश से नदी का जलस्तर बढ़ जाता है, जिससे पानी पुल के ऊपर से बहने लगता है।
विभिन्न जिलों में बारिश के आंकड़े और बुनियादी सेवाओं पर असर
राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र के आंकड़ों के अनुसार, पिछले 24 घंटों में प्रदेश के अधिकांश इलाकों में मध्यम से भारी बारिश दर्ज की गई है। सोलन जिले के कंडाघाट में सबसे अधिक 106.4 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। इसके अलावा सुंदरनगर में 65.2 मिलीमीटर, बिलासपुर के काहू में 40.2 मिलीमीटर, कुल्लू के कोठी में 39.2 मिलीमीटर, रामपुर के सराहन में 34.5 मिलीमीटर, जोगिंद्रनगर में 31.0 मिलीमीटर, जैतो बैराज में 24.4 मिलीमीटर, शिमला में 16.8 मिलीमीटर और कुफरी में 15.0 मिलीमीटर वर्षा दर्ज हुई है।
आपदा के कारण बुनियादी ढांचा भी बुरी तरह प्रभावित हुआ है। राज्य भर में 38 पेयजल आपूर्ति योजनाएं ठप हो गई हैं, जिससे लोगों को पीने के पानी के संकट का सामना करना पड़ रहा है। इसके साथ ही 44 बिजली ट्रांसफार्मर खराब होने से कई गांव अंधेरे में डूब गए हैं। मंडी जिले के धर्मपुर क्षेत्र में पारच्छु पुल के पास सड़क पर भारी कीचड़ जमा हो गया है, जिससे गाड़ियों के पहिये फिसल रहे हैं और चढ़ाई पर वाहन चालकों को बेहद परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
जिलों में सड़कों की स्थिति और मौसम विभाग की चेतावनी
भूस्खलन के कारण राज्य की कुल 135 सड़कें यातायात के लिए बंद हैं। सबसे ज्यादा प्रभाव कुल्लू जिले में पड़ा है, जहां 54 सड़कें ठप हैं। इसके बाद मंडी जिले में 43, शिमला में 15, चंबा में 8, कांगड़ा में 5, लाहौल-स्पीति में 5, सिरमौर में 4 और ऊना जिले में 1 सड़क बंद पड़ी है। सड़कों को खोलने के लिए बुलडोजर और जेसीबी मशीनें तैनात की गई हैं।
मौसम केंद्र शिमला ने 28 से 31 जुलाई तक विभिन्न जिलों में चरणबद्ध तरीके से ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। 28 जुलाई को शिमला, सोलन, सिरमौर और मंडी जिलों में भारी बारिश की आशंका जताई गई है। 29 जुलाई को ऊना, कांगड़ा और सिरमौर जिलों में मूसलाधार बारिश का अलर्ट है। वहीं 30 जुलाई को ऊना, बिलासपुर, हमीरपुर, चंबा और कांगड़ा जिलों में भारी से अत्यधिक भारी बारिश होने की संभावना व्यक्त की गई है। प्रशासन ने लोगों और पर्यटकों को नदी-नालों से दूर रहने और भूस्खलन संभावित क्षेत्रों की यात्रा न करने की सलाह दी है।



















