त्रिपुरा से लोकसभा सांसद बिप्लब कुमार देव ने हाल ही में संपन्न हुए संसदीय सत्र के दौरान राज्य की विकास संबंधी प्राथमिकताओं और बुनियादी ढांचे की चुनौतियों को प्रमुखता से उठाया है। संसद में उन्होंने राज्य से जुड़े विभिन्न विषयों पर कुल 57 प्रश्न पूछे, जिनमें से 15 प्रश्नों को चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। रविवार को पत्रकारों से बातचीत करते हुए सांसद ने संसद में की गई अपनी पहलों की जानकारी दी और त्रिपुरा में टिकाऊ सड़कों के निर्माण, पर्यटन के विस्तार तथा जनकल्याणकारी योजनाओं को गति देने पर जोर दिया।
राष्ट्रीय राजमार्गों की बदहाली और कंक्रीट सड़कों का प्रस्ताव
सांसद बिप्लब कुमार देव ने बताया कि राज्य में राष्ट्रीय राजमार्गों की स्थिति उनकी मुख्य चिंताओं में शामिल रही है। विशेष रूप से साल 2024 में आई भीषण बाढ़ के बाद कई प्रमुख सड़क मार्ग बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सड़कों की बदहाली के लिए घटिया रखरखाव और ठेकेदारों की लापरवाही काफी हद तक जिम्मेदार है। बुनियादी ढांचे को लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए उन्होंने पारंपरिक बिटुमेन की सड़कों के बजाय कंक्रीट की सड़कें बनाने का सुझाव दिया। प्रयोग के तौर पर उन्होंने उदयपुर से अमरपुर मार्ग पर पायलट प्रोजेक्ट शुरू करने का प्रस्ताव रखा। उनका तर्क था कि हालांकि कंक्रीट की सड़कें शुरू में अधिक खर्चीली होती हैं, लेकिन वे बाढ़ और बारिश के बावजूद वर्षों तक मजबूत बनी रहती हैं।
संसदीय निधि का आवंटन और जन कल्याणकारी राहत
अपने संसदीय कार्यकाल के दौरान स्वीकृत विकास कार्यों का ब्योरा देते हुए सांसद ने कहा कि राज्यसभा और लोकसभा में अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने MPLADS निधि से 15.76 करोड़ रुपये का उपयोग राज्य के विकास कार्यों में किया है। इसके अलावा, सामाजिक और स्वास्थ्य संबंधी आपात स्थितियों में नागरिकों की सहायता के लिए उन्होंने प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष (PMNRF) से वित्तीय मदद की सिफारिश की थी। उनकी इन सिफारिशों के आधार पर त्रिपुरा के 24 लाभार्थियों को कुल 56.90 लाख रुपये की सहायता राशि प्रदान की गई है।
पर्यटन का कायाकल्प और उनाकोटी का मास्टर प्लान
राज्य के आर्थिक विकास और रोजगार सृजन में पर्यटन की भूमिका को अहम बताते हुए बिप्लब कुमार देव ने कई बड़ी परियोजनाओं के प्रस्ताव रखे हैं। उन्होंने दैत्येश्वरी कालीबाड़ी, बेलोनिया और जोलाइबाड़ी के विकास के लिए 30 करोड़ रुपये की परियोजनाओं का खाका तैयार किया है। इसके साथ ही जिरानिया के मजलिशपुर क्षेत्र के लिए 140 करोड़ रुपये का एक वृहद पर्यटन प्रस्ताव केंद्र सरकार को सौंपा गया है। प्रसिद्ध ऐतिहासिक स्थल उनाकोटी के संदर्भ में उन्होंने कहा कि केवल चट्टानों पर उकेरी गई मूर्तियों की सफाई और संरक्षण तक सीमित रहने के बजाय एक व्यापक मास्टर प्लान लागू किया जाना चाहिए। इसमें पर्यटकों की सुविधा के लिए चारदीवारी निर्माण, कैफे, शौचालय, बेहतर कनेक्टिविटी और आधुनिक संरक्षण तकनीकों की व्यवस्था शामिल होनी चाहिए।
अन्य प्रमुख क्षेत्र और केंद्र के साथ निरंतर समन्वय
संसद में अपनी पहलों का उल्लेख करते हुए सांसद ने बताया कि उन्होंने रेल संपर्क, शिक्षा, उर्वरक आपूर्ति, प्राकृतिक गैस, खनिज संसाधनों और मत्स्य पालन जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर भी केंद्र का ध्यान आकर्षित किया है। इसके अलावा सत्र के दौरान पारित विधेयकों, जैसे कि फॉरेन कंट्रीब्यूशन रेगुलेशन एक्ट (FCRA) में किए गए संशोधनों पर भी चर्चा हुई। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे त्रिपुरा में लंबित राजमार्गों, पर्यटन स्थलों और अन्य बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को तेजी से पूरा कराने के लिए केंद्र सरकार और त्रिपुरा सरकार के साथ लगातार समन्वय बनाए रखेंगे।















