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बस्तर के सागर कश्यप ने मुर्गी पालन से की बंपर कमाई, जानिए कैसे शुरू किया यह देसी बिजनेसछत्तीसगढ़
16 सित॰ 2026, 9:06 pm (10 दिन पहले)· 0

बस्तर के सागर कश्यप ने मुर्गी पालन से की बंपर कमाई, जानिए कैसे शुरू किया यह देसी बिजनेस

छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले के युवा सागर कश्यप खेती के साथ पार्ट टाइम देसी मुर्गी पालन कर रहे हैं। उन्होंने कुछ ही समय में अपनी इस छोटी सी शुरुआत को मुनाफे का सौदा बना लिया है।

छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र के एक युवा सागर कश्यप ने खेती के साथ-साथ पार्ट टाइम के रूप में देसी मुर्गी पालन अपनाकर बेहतरीन कमाई का जरिया तैयार किया है। उन्होंने इस काम की शुरुआत मात्र तीन मुर्गियों के साथ की थी और आज उनके पास करीब 200 मुर्गे मौजूद हैं। इस व्यवसाय की सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसमें लगातार निगरानी की आवश्यकता नहीं पड़ती है, बल्कि दिन में केवल दो बार सुबह और शाम को दाना-पानी देने से ही काम चल जाता है।

कम लागत और अधिक मुनाफा

सागर कश्यप के अनुभव के मुताबिक, देसी नस्ल की मुर्गियों में बीमारियों का खतरा काफी कम होता है और इनका स्वाद भी बेहतर माना जाता है, जिसके कारण बाजार में इनकी भारी मांग बनी रहती है। खासकर लड़ाई वाले मुर्गों की बस्तर के स्थानीय बाजारों में भारी डिमांड है, जिससे उन्हें बहुत अच्छा मुनाफा मिल जाता है। इन विशेष मुर्गों की कीमत बाजार में 1500 से 2000 रुपये तक मिल जाती है।

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व्यवसाय का विस्तार और उत्पादन प्रक्रिया

वे वर्तमान समय में 200 मुर्गों का सफलतापूर्वक पालन-पोषण कर रहे हैं और अब तक लगभग 100 मुर्गे बेच भी चुके हैं। इसके अलावा, कुछ मुर्गों को खासतौर पर लड़ाई के लिए तैयार किया जा रहा है। उनके फार्म पर ही ब्रूडिंग यूनिट की भी व्यवस्था की गई है, जहां अंडे देने वाली मुर्गियों के लिए आरामदायक घोंसले और सही तापमान का पूरा ध्यान रखा जाता है।

लागत और कुल कमाई का गणित

एक चूजे से लेकर बिक्री के लिए तैयार होने तक मुर्गी को पांच से छह महीने का समय लगता है। एक मुर्गी को पालने और उसे खिलाने में कुल मिलाकर लगभग 150 रुपये की लागत आती है, जिसे बाद में बाजार में 500 से 600 रुपये तक के मुनाफे के साथ बेच दिया जाता है। मुर्गियों की सेहत को दुरुस्त रखने के लिए उन्हें हर प्रकार का पौष्टिक चारा दिया जाता है। सागर कश्यप अब तक 50,000 से 60,000 रुपये तक के मुर्गों की बिक्री कर चुके हैं और राहत की बात यह है कि उनके फार्म के मुर्गों में अभी तक किसी भी गंभीर बीमारी का संक्रमण देखने को नहीं मिला है। यह उनके लिए एक अतिरिक्त कमाई का साधन बन चुका है जो खेती के साथ आसानी से चल रहा है।

सवाल-जवाब

सागर कश्यप ने मुर्गी पालन की शुरुआत कितने पक्षियों से की थी?
उन्होंने डेढ़ साल पहले केवल तीन मुर्गियों के साथ इस काम की शुरुआत की थी।
वर्तमान में उनके पास कितने मुर्गे हैं?
फिलहाल उनके पास लगभग 200 मुर्गे मौजूद हैं।
एक मुर्गी को तैयार होने में कितना समय लगता है?
एक चूजे को बिक्री योग्य बनने में पांच से छह महीने का समय लगता है।
एक मुर्गी को पालने में कितना खर्च आता है और वह कितने में बिकती है?
एक मुर्गी को पालने में करीब 150 रुपये का खर्च आता है और वह 500 से 600 रुपये में बिकती है।
वे अब तक कुल कितने रुपये के मुर्गे बेच चुके हैं?
वे अब तक 50,000 से 60,000 रुपये तक के मुर्गे बेच चुके हैं।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Rohan Verma@rohan-verma·9 दिन पहले

बस्तर के युवा सागर कश्यप की यह ग्राउंड रिपोर्ट ग्रामीण आर्थिकी और कृषि-विविधीकरण का एक ठोस उदाहरण पेश करती है। मात्र तीन मुर्गियों से शुरू कर 200 तक पहुँचना और न्यूनतम देखरेख में लागत से तीन गुना तक मुनाफा कमाना यह साबित करता है कि ग्रामीण क्षेत्रों में साइड बिजनेस के रूप में पशुपालन युवाओं के लिए रोजगार का मजबूत विकल्प बन सकता है। स्थानीय बाजारों में विशेष नस्लों की उच्च माँग इस मॉडल की व्यावसायिक स्थिरता को और बढ़ाती है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·9 दिन पहले

यह रिपोर्ट ग्रामीण क्षेत्रों में उभरते आर्थिक अवसरों और आत्मनिर्भरता की एक मजबूत तस्वीर पेश करती है। हालांकि, कृषि और पशुपालन से जुड़े ऐसे छोटे व्यवसायों के सामने अक्सर संगठित बाजार तक सीधी पहुंच न होने और स्थानीय स्तर पर पशु चिकित्सा सुविधाओं के अभाव जैसी बड़ी चुनौतियाँ खड़ी हो जाती हैं। यदि ऐसे ग्रामीण उद्यमियों को समय पर प्रशिक्षित किया जाए और कानूनी रूप से सुदृढ़ सहकारिता या बाजार सहायता मिले, तो यह मॉडल न केवल स्थानीय आजीविका को स्थायी बना सकता है, बल्कि संगठित अपराध या अवैध गतिविधियों की तरफ युवाओं के झुकाव को रोकने में भी एक प्रभावी सामाजिक सुरक्षा कवच साबित हो सकता है।

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