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बस्तर की रेखा साहू ने जैविक खेती और मुर्गी पालन से बदली किस्मत, हर हफ्ते हो रही धांसू कमाईछत्तीसगढ़
10 सित॰ 2026, 2:41 pm (15 दिन पहले)· 2

बस्तर की रेखा साहू ने जैविक खेती और मुर्गी पालन से बदली किस्मत, हर हफ्ते हो रही धांसू कमाई

बस्तर की रहने वाली रेखा साहू ने रासायनिक उर्वरकों के दौर में जैविक खेती और मुर्गी पालन अपनाकर आत्मनिर्भरता की अनूठी मिसाल कायम की है। वह इस देसी और आधुनिक तकनीक के मेल से हर महीने हजारों रुपये की कमाई कर रही हैं।

बस्तर की रहने वाली रेखा साहू आज के समय में उन तमाम लोगों के लिए एक बड़ी मिसाल बन चुकी हैं जो पारंपरिक खेती से हटकर कुछ नया करना चाहते हैं। रासायनिक खेती के इस दौर में उन्होंने जैविक खेती का रास्ता चुना और अपनी मेहनत के दम पर आत्मनिर्भरता हासिल की। उनके इस साहसिक कदम ने न केवल उनके परिवार की आर्थिक स्थिति को सुधारा है बल्कि क्षेत्र के दूसरे किसानों को भी एक नया रास्ता दिखाया है। वह खेती के साथ-साथ पशुपालन से जुड़े अन्य व्यवसायों को भी बखूबी संभाल रही हैं।

जैविक सब्जियों और फसलों की पैदावार

रेखा साहू अपने खेत के दस डिसमिल हिस्से में पूरी तरह से जैविक तरीके से सब्जियां उगा रही हैं। उनके खेतों में तोरई, बरबटी और करेला जैसी पौष्टिक और हरी सब्जियां लहलहा रही हैं। इन सब्जियों की बदौलत उन्हें बाजार में अच्छी मांग मिल रही है और वह हर हफ्ते 3,000 से 4,000 रुपये तक की शुद्ध कमाई कर रही हैं। सब्जियों के अलावा उन्होंने अपने खेतों में धान और मक्का जैसी मुख्य फसलें भी उगाई हैं, जिससे उनकी आय के स्रोत और अधिक मजबूत हो गए हैं।

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हाईटेक मल्चिंग विधि का कमाल

बेहतर पैदावार हासिल करने के लिए रेखा साहू ने आधुनिक तकनीकों का सहारा लिया है। वह खेतों में हाईटेक मल्चिंग विधि का उपयोग करती हैं जिससे पानी की बचत होती है और खरपतवार भी नियंत्रित रहते हैं। इस पूरी प्रक्रिया को शुरू करने से पहले वह खेत की दो बार अच्छी तरह जुताई करती हैं और फिर क्यारियां या बेड तैयार करती हैं। इसके बाद मल्चिंग शीट बिछाकर उसमें उचित दूरी पर गड्ढे खोदे जाते हैं और नर्सरी में तैयार किए गए स्वस्थ पौधों की रोपाई की जाती है। इस खेती में किसी भी तरह के हानिकारक केमिकल का इस्तेमाल नहीं किया जाता बल्कि पूरी तरह से जैविक खाद और गोबर की खाद का ही प्रयोग होता है। खास बात यह है कि ये फसलें रोपाई के लगभग ढाई महीने बाद ही पैदावार देना शुरू कर देती हैं।

मुर्गी ब्रूडिंग से अतिरिक्त आमदनी

केवल खेती तक ही सीमित न रहते हुए रेखा साहू ने आय बढ़ाने के लिए मुर्गी ब्रूडिंग का काम भी शुरू किया है। इस कारोबार को आगे बढ़ाने के लिए उन्होंने स्वयं सहायता समूह से 25,000 रुपये का ऋण लिया था। मुर्गी पालन और ब्रूडिंग के इस काम से उन्हें हर महीने 10,000 रुपये की अतिरिक्त आमदनी हो जाती है। अब तक वह मुर्गी ब्रूडिंग और जैविक सब्जियों की बिक्री से कुल मिलाकर 30,000 रुपये तक की कमाई कर चुकी हैं, जिससे उनके घर की आर्थिक स्थिति काफी मजबूत हुई है।

लोन और प्रशिक्षण की मदद

इस पूरे सफर की शुरुआत करने के लिए रेखा साहू ने एक स्वयं सहायता समूह से 30,000 रुपये का कर्ज लिया था, जिसकी मदद से उन्होंने अपने कृषि व्यवसाय की नींव रखी। इसके अलावा उन्हें कृषि विभाग या संबंधित समूहों की तरफ से विशेष प्रशिक्षण भी दिया गया था, जिससे उन्हें आधुनिक और वैज्ञानिक तरीकों को समझने में आसानी हुई। आज उनका यह प्रयास रासायनिक उर्वरकों के अंधाधुंध इस्तेमाल के बीच टिकाऊ कृषि का एक बेहतरीन मॉडल पेश करता है।

सवाल-जवाब

रेखा साहू किस क्षेत्र की रहने वाली हैं?
रेखा साहू छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र की रहने वाली हैं।
वह जैविक खेती में कौन-कौन सी सब्जियां उगा रही हैं?
वह अपने खेत के दस डिसमिल हिस्से में तोरई, बरबटी और करेला जैसी जैविक सब्जियां उगा रही हैं।
सब्जी की खेती से उन्हें हर हफ्ते कितनी कमाई होती है?
वह जैविक सब्जियों की बिक्री से हर हफ्ते 3,000 से 4,000 रुपये तक की कमाई करती हैं।
व्यवसाय शुरू करने के लिए उन्होंने कितना लोन लिया था?
उन्होंने खेती शुरू करने के लिए 30,000 रुपये और मुर्गी पालन के लिए 25,000 रुपये का लोन स्वयं सहायता समूह से लिया था।
मुर्गी ब्रूडिंग के काम से उन्हें हर महीने कितना फायदा होता है?
मुर्गी ब्रूडिंग के काम से उन्हें हर महीने 10,000 रुपये की अतिरिक्त आय होती है।
फसल तैयार होने में कितना समय लगता है?
रोपाई के बाद फसल लगभग ढाई महीने में उपज देना शुरू कर देती है।
खेती में कौन सी आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है?
वह खेतों में हाईटेक मल्चिंग विधि का उपयोग करती हैं।
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