देश के कई हिस्सों से दक्षिण-पश्चिम मानसून की वापसी की प्रक्रिया चल रही है, लेकिन वायुमंडलीय हलचलों की वजह से बादलों का बरसना थमा नहीं है. बंगाल की खाड़ी के समुद्री क्षेत्र में एक नई मौसमी प्रणाली के सक्रिय होने से मैदानी और तटीय इलाकों का मौसम अचानक करवट ले रहा है. भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के ताज़ा आकलन के अनुसार, इस नए मौसमी तंत्र का गहरा असर पूर्वी और दक्षिणी प्रायद्वीपीय राज्यों के साथ-साथ उत्तर भारत के विस्तृत मैदानी भागों में साफ तौर पर देखा जाएगा. वातावरण में बढ़ते दबाव और आद्रता के कारण हवाओं के झोंके कुछ विशिष्ट स्थानों पर 60 से 65 किलोमीटर प्रति घंटे की गति पकड़ सकते हैं. पर्वतीय ऊंचाइयों से लेकर गंगा के मैदानी भूभाग तक बादलों की गरज और वज्रपात की आशंका जताई गई है, जिससे 2 अक्टूबर को जनजीवन प्रभावित रह सकता है.
पहाड़ी इलाकों में भी बिगड़ेगा मौसम का रुख
पहाड़ों पर पश्चिमी हलचलों और बंगाल की खाड़ी से आ रही नम हवाओं के संगम के चलते मौसम का मिजाज प्रतिकूल बना हुआ है. उत्तराखंड के कई हिस्सों में तेज आंधी के साथ भारी वर्षा का संकट खड़ा हो सकता है, जिससे पहाड़ी ढलानों पर सतर्कता बरतने की जरूरत है. हिमाचल प्रदेश के अधिकांश घाटियों और जम्मू-कश्मीर के पर्वतीय इलाकों में भी गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ने की पूरी संभावना है. ऊंचाई वाले क्षेत्रों में अचानक तापमान गिरने और तेज हवाओं के थपेड़ों से स्थानीय लोगों तथा सैलानियों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं. मौसम में आ रहे इस बदलाव को देखते हुए संबंधित राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरणों को भी एहतियाती प्रबंध सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं.
पूर्वोत्तर और दक्षिण भारत में चक्रवाती परिसंचरण का जाल
मौसम वैज्ञानिकों ने क्षोभमंडल के निचले स्तर पर कई प्रणालियों की मौजूदगी दर्ज की है. पूर्वोत्तर असम और उससे सटे भूभाग पर एक चक्रवाती परिसंचरण सक्रिय है, जिसके कारण पूर्वोत्तर के राज्यों में व्यापक वर्षा के आसार हैं. विशेष रूप से अरुणाचल प्रदेश के कई जनपदों में मूसलाधार बारिश का अनुमान है, जबकि असम, मेघालय और त्रिपुरा में गरज के साथ आकाशीय बिजली गिरने का जोखिम बना हुआ है. दूसरी ओर, दक्षिण भारत में उत्तरी तटीय तमिलनाडु और उसके आस-पास के समुद्री क्षेत्र में एक दूसरा साइक्लोनिक सर्कुलेशन मौजूद है. इस तंत्र के असर से तमिलनाडु, केरल, माहे और लक्षद्वीप के समुद्री तटों पर तेज हवाएं चलने का अलर्ट है. इन दोनों प्रणालियों की वजह से 2 अक्टूबर को कई राज्यों में वायुमंडलीय अस्थिरता चरम पर रहेगी.
दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र का ताजा मिजाज
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और आसपास के एनसीआर क्षेत्र में 2 अक्टूबर को मौसमी परिदृश्य में तेजी से बदलाव आएगा. आसमान में बादलों की आवाजाही के बीच धूल भरी आंधी और वर्षा का दौर देखने को मिल सकता है. इस अवधि में हवा की चाल 15 से 20 किलोमीटर प्रति घंटे के बीच रहने का आकलन है. तापमान के मोर्चे पर, दिल्ली में दिन का अधिकतम पारा 34 डिग्री सेल्सियस के आसपास दर्ज होने की संभावना है, जबकि रात का न्यूनतम तापमान लुढ़ककर 22 डिग्री सेल्सियस तक आ सकता है. मानसून की विदाई की प्रक्रिया के बीच हो रही यह बूंदाबांदी और बादलों की छाया लोगों को उमस भरी गर्मी से थोड़ी राहत प्रदान करेगी, हालांकि अचानक आंधी से यातायात में बाधाएं आ सकती हैं.
उत्तर प्रदेश के कई जिलों में भारी बौछारें और आंधी
उत्तर प्रदेश के पश्चिमी छोर से लेकर पूर्वांचल तक बादलों का पहरा रहेगा. मौसम वैज्ञानिकों ने राज्य के करीब दो दर्जन जनपदों में मध्यम से लेकर मूसलाधार बारिश का पूर्वानुमान व्यक्त किया है. प्रमुख रूप से आगरा, मेरठ, मथुरा, गाजियाबाद, कानपुर, उन्नाव, कन्नौज, फर्रुखाबाद, बरेली, एटा, कासगंज, फिरोजाबाद, मैनपुरी, रामपुर, बहराइच, गोंडा, श्रावस्ती, हरदोई, लखीमपुर खीरी, सीतापुर, प्रयागराज, गोरखपुर और देवरिया में मौसम का कड़ा रुख देखने को मिलेगा. इन इलाकों में 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से तूफानी हवाएं चलने की चेतावनी दी गई है. राजधानी लखनऊ में दिन का पारा 33 डिग्री सेल्सियस और रात का पारा 24 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है. तेज गर्जना और बिजली कड़कने के कारण खेतों में काम करने वाले किसानों को सुरक्षित स्थानों पर रहने की सलाह दी गई है.
बिहार में आंधी-तूफान के साथ आकाशीय बिजली का खतरा
बिहार के मैदानी और तराई क्षेत्रों में दोहरा मौसमी संकट पैदा हो गया है. राज्य के कई जिलों में गरज के साथ झमाझम बारिश और 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की आशंका है. प्रभावित होने वाले मुख्य जिलों में पटना, गया, जहानाबाद, मुजफ्फरपुर, वैशाली, दरभंगा, समस्तीपुर, मधुबनी, पश्चिमी चंपारण और पूर्वी चंपारण शामिल हैं. सीमांचल के भूभाग जैसे पूर्णिया, किशनगंज, कटिहार, भागलपुर और मुंगेर में बादलों की तेज गर्जना के साथ वज्रपात की गंभीर आशंका जताई गई है. पटना शहर का अधिकतम तापमान 33 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 24 डिग्री सेल्सियस रहने की संभावना है. अचानक आने वाले आंधी के झोंकों से पेड़ों और कमजोर संरचनाओं को नुकसान पहुंच सकता है.
झारखंड और पश्चिम बंगाल में मौसमी दबाव का असर
झारखंड राज्य में 2 और 3 अक्टूबर को मौसमी गतिविधियां काफी तीव्र रहने वाली हैं. राज्य के रांची, जमशेदपुर, धनबाद, बोकारो, गिरिडीह, हजारीबाग, पलामू, गढ़वा, गुमला और सिमडेगा जैसे जिलों में तेज वर्षा और झंझावात का अलर्ट लागू किया गया है. इस दौरान सतह पर हवा की गति लगभग 50 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है. राजधानी रांची में पारा अधिकतम 29 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम 20 डिग्री सेल्सियस के स्तर पर रहने का अनुमान है, जिससे ठंडक का अहसास बढ़ेगा. उधर पश्चिम बंगाल और संपूर्ण पूर्वी भारत में बंगाल की खाड़ी के विक्षोभ का असर अगले 12 घंटों तक काफी गहरा रहेगा, जहां कई स्थानों पर बादलों की गड़गड़ाहट और बिजली गिरने के साथ मध्यम से भारी बारिश दर्ज की जा सकती है.
राजस्थान के जिलों में तेज धूल भरी हवाएं और बौछारें
पश्चिम भारत के रेगिस्तानी राज्य राजस्थान में भी इस मौसमी बदलाव का व्यापक असर नजर आएगा. राज्य के जयपुर, अजमेर, उदयपुर, भीलवाड़ा, टोंक, सवाई माधोपुर, कोटा, बारां, बूंदी, भरतपुर और बीकानेर जिलों में अंधड़ के साथ बारिश की चेतावनी जारी की गई है. इन क्षेत्रों में हवा की गति अचानक बढ़कर 50 से 55 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंचने की संभावना व्यक्त की गई है. मौसम विभाग ने बताया है कि अगले 48 घंटों में पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश के शेष हिस्सों, गुजरात, मध्य प्रदेश, पूरे जम्मू-कश्मीर, हिमाचल, उत्तराखंड तथा बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र के कुछ भागों से दक्षिण-पश्चिम मानसून की वापसी के लिए परिस्थितियां पूरी तरह अनुकूल बन रही हैं.

















