राजस्थान के धौलपुर जिले के बाड़ी कस्बे में महात्मा गांधी के जीवन और आदर्शों को जीवंत बनाए रखने की एक अद्भुत मिसाल सामने आई है। स्थानीय निवासी अजय गर्ग ने बापू की स्मृतियों और उनसे जुड़े दुर्लभ ऐतिहासिक साक्ष्यों को सहेजने में अपनी जिंदगी के कई साल समर्पित कर दिए हैं। उनके निजी प्रयास से तैयार इस अनोखे संग्रहालय में दुनिया भर के करीब 170 मुल्कों द्वारा महात्मा गांधी के सम्मान में जारी किए गए डाक टिकटों का नायाब खजाना मौजूद है। यह संग्रह सिर्फ डाक टिकटों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें गांधी जी के जीवन, स्वतंत्रता संग्राम के पड़ावों, ऐतिहासिक दस्तावेजों और दुर्लभ सिक्कों की पूरी श्रृंखला संजोकर रखी गई है।
170 देशों के डाक टिकट और ऐतिहासिक नमक टैक्स रसीद
अजय गर्ग का कहना है कि महात्मा गांधी विश्व इतिहास के उन गिने-चुने महापुरुषों में शामिल हैं, जिनकी वैश्विक स्वीकार्यता इतनी व्यापक रही है कि भारत के अलावा दुनिया के लगभग 170 देशों ने उन पर डाक टिकट जारी किए। उनके इस संग्रहालय में मॉरीटानिया, मिस्र, सोमालिया, सीरिया, माली, ईरान, मालदीव, कोमोरोस, तुर्कमेनिस्तान और मोरक्को जैसे मुल्कों के आधिकारिक डाक टिकट सहेज कर रखे गए हैं। इस संग्रह की सबसे अनमोल धरोहरों में ऐतिहासिक दांडी यात्रा के समय की मूल नमक टैक्स रसीद शामिल है। इसके साथ ही, दांडी मार्च के दौरान बापू जिन-जिन पड़ावों पर ठहरे थे, वहां के स्थानीय डाकघरों की मुहर लगे मूल पोस्टकार्ड भी इस संग्रह का हिस्सा हैं। भारत सरकार ने वर्ष 2005 में जब दांडी यात्रा के 75 वर्ष पूरे होने का उत्सव मनाया था, तब जारी किया गया 100 रुपये का विशेष स्मारक सिक्का भी यहां सुरक्षित रखा हुआ है।
चार साल की मेहनत से तैयार हुआ 12 पीढ़ियों का वंशवृक्ष
महात्मा गांधी की 150वीं जयंती के ऐतिहासिक अवसर पर अजय गर्ग ने एक अत्यंत दुर्लभ परियोजना को पूरा किया। उन्होंने गहन शोध और चित्रकारी के माध्यम से गांधी जी की 12 पीढ़ियों का विस्तृत वंशवृक्ष तैयार किया। इस पूरे वंशावली चार्ट को क्रमबद्ध रूप देने में उन्हें लगभग 3 से 4 साल का लंबा समय लगा। इस कलात्मक वंशावली में गांधी जी के परदादा के परदादा की पीढ़ी से शुरुआत करते हुए महात्मा गांधी तक के पूरे परिवार के इतिहास को रेखांकित किया गया है। इस असाधारण ऐतिहासिक कार्य के लिए उनका नाम इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड में दर्ज किया गया। इसके बाद वर्ष 2019 में भारत सरकार ने इस वंशावली चार्ट का सत्यापन करते हुए अजय गर्ग को इसका आधिकारिक कॉपीराइट भी प्रदान किया।
200 से अधिक दुर्लभ पुस्तकें, खादी स्टांप और ‘हरिजन’ की मूल प्रतियां
अजय गर्ग के इस संग्रहालय में राष्ट्रपिता पर लिखी गई 200 से अधिक प्रामाणिक और दुर्लभ पुस्तकें पाठकों और शोधकर्ताओं के आकर्षण का केंद्र हैं। इसके अलावा वर्ष 1948 में आजादी के ठीक बाद गांधी जी पर जारी हुआ पहला आधिकारिक डाक टिकट सेट भी यहां मूल स्वरूप में उपलब्ध है। बापू की 150वीं जयंती के उपलक्ष्य में केंद्र सरकार द्वारा जारी किया गया 150 रुपये का स्मारक सिक्का और भारतीय डाक विभाग द्वारा खादी के कपड़े पर छापा गया विशेष डाक टिकट भी यहां संजोया गया है। स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान जन-जागरण का मुख्य माध्यम रहे और गांधी जी द्वारा हिंदी, अंग्रेजी व गुजराती भाषाओं में प्रकाशित किए जाने वाले ऐतिहासिक समाचार पत्र ‘हरिजन’ की मूल प्रतियां भी इस संग्रहालय की गरिमा बढ़ा रही हैं।
प्रदर्शनी के जरिए नई पीढ़ी तक विचार पहुंचाने का अभियान
अजय गर्ग का मानना है कि बापू केवल एक नाम नहीं हैं, बल्कि वे भारत और दुनिया के एक स्वर्णिम इतिहास का प्रतीक हैं। उनका प्राथमिक उद्देश्य देश और दुनिया के कोने-कोने से ऐसी दुर्लभ सामग्री जुटाकर आज के युवाओं तक गांधी जी के सत्य और अहिंसा के विचारों को पहुंचाना है। वे विभिन्न शिक्षण संस्थानों और सार्वजनिक स्थलों पर नियमित रूप से प्रदर्शनियां आयोजित करते हैं, ताकि छात्र और युवा पीढ़ी बापू के जीवन संघर्ष और उनके नैतिक मूल्यों को प्रत्यक्ष समझ सकें। संरक्षण के इस अनूठे कार्य के लिए उन्हें हाल ही में राजस्थान गौरव अवार्ड से नवाजा गया है। इसके पूर्व वे लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड और इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड में भी अपनी उपलब्धियों को दर्ज करा चुके हैं। उनका यह व्यक्तिगत प्रयास अब धौलपुर की सांस्कृतिक पहचान बन चुका है।



















