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उत्तराखंड के किलबरी में 60 लाख लीटर क्षमता वाला नयना देवी जलकुंड बना नया पर्यटन केंद्रउत्तराखंड
29 अग॰ 2026, 7:51 am (1 घंटे पहले)· 2

उत्तराखंड के किलबरी में 60 लाख लीटर क्षमता वाला नयना देवी जलकुंड बना नया पर्यटन केंद्र

नैनीताल से लगभग 15 किलोमीटर दूर किलबरी में वन विभाग द्वारा निर्मित नयना देवी जलकुंड पर्यटकों और प्रकृति प्रेमियों के लिए आकर्षण का केंद्र बन रहा है। 60 लाख लीटर जल क्षमता वाला यह कुंड जल संरक्षण के साथ-साथ वन्यजीवों की प्यास बुझाने और इको-टूरिज्म को बढ़ावा देने में मदद कर रहा है।

उत्तराखंड के सुप्रसिद्ध पर्वतीय स्थल नैनीताल के समीप स्थित किलबरी वन क्षेत्र में निर्मित नयना देवी जलकुंड इन दिनों पर्यटकों और प्रकृति प्रेमियों के ध्यान का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। वैसे तो विश्वभर से आने वाले सैलानी नैनीताल की प्रसिद्ध नैनी झील की सुंदरता निहारने पहुँचते हैं, परंतु शहर के कोलाहल से दूर जंगलों के मध्य बसा यह नया प्राकृतिक जलाशय लोगों को सुकून भरे पल बिताने का अनोखा अवसर प्रदान कर रहा है। उत्तराखंड वन विभाग द्वारा तैयार किया गया यह जलकुंड न केवल जल संरक्षण की दिशा में एक बड़ा कदम है, बल्कि इस पूरे क्षेत्र में इको-टूरिज्म की असीम संभावनाओं के नए द्वार भी खोल रहा है।

जल संरक्षण के उद्देश्य से बना विशाल जलाशय

नयना देवी जलकुंड का निर्माण प्राकृतिक संसाधनों को सहेजने और पहाड़ी क्षेत्र में जल की उपलब्धता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से किया गया है। वन विभाग द्वारा तैयार किए गए इस कृत्रिम जलाशय के तकनीकी मापदंड और आकार बेहद प्रभावकारी हैं। आंकड़ों के अनुसार, इस जलकुंड की कुल लंबाई लगभग 150 मीटर है, जबकि इसकी चौड़ाई करीब 20 मीटर रखी गई है। इसके साथ ही इसकी गहराई लगभग 1.5 मीटर बनाई गई है। इस विशाल संरचना की कुल जल भंडारण क्षमता लगभग 60 लाख लीटर आंकी गई है। बारिश के पानी को सहेजने और वर्षा जल संचयन को बढ़ावा देने में यह जलकुंड अत्यंत कारगर साबित हो रहा है।

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वन्यजीवों के लिए संजीवनी और प्राकृतिक संतुलन

घने जंगलों के बीच बने इस जलकुंड का लाभ केवल इंसानों और पर्यटकों तक ही सीमित नहीं है। यह पहल स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र और वन्यजीव संरक्षण के दृष्टिकोण से भी मील का पत्थर मानी जा रही है। घने वनों में एक बड़ा प्राकृतिक जल स्रोत उपलब्ध होने के कारण जंगली जानवरों को पीने के पानी की तलाश में लंबी दूरी तय नहीं करनी पड़ेगी। भीषण गर्मी या शुष्क मौसम के दौरान जब प्राकृतिक धारे सूख जाते हैं, तब यह 60 लाख लीटर क्षमता वाला जलाशय जंगली पशु-पक्षियों के लिए पानी की निरंतर उपलब्धता सुनिश्चित करेगा। इससे वन्यजीवों का मानव बस्तियों की ओर पलायन रुकेगा और मानव-वन्यजीव संघर्ष में भी कमी आएगी।

पर्यटकों के लिए खास आकर्षण: इको पार्क और बर्ड वाचिंग

किलबरी क्षेत्र पहले से ही अपनी समृद्ध वनस्पति और पक्षियों की विविध प्रजातियों के लिए पक्षी प्रेमियों के बीच प्रसिद्ध रहा है। नयना देवी जलकुंड के निर्माण के पश्चात यहाँ का प्राकृतिक वातावरण पक्षी दर्शन के लिए और भी अनुकूल हो गया है। शांत परिवेश, ऊँचे वृक्ष और स्वच्छ जल स्त्रोत विभिन्न प्रजातियों के पक्षियों को आकर्षित करते हैं। इसके अतिरिक्त, वन विभाग ने जलकुंड के समीप ही एक सुव्यवस्थित इको पार्क भी विकसित किया है। इस इको पार्क का मुख्य ध्येय पर्यटकों को प्राकृतिक वातावरण के बीच प्रकृति को करीब से महसूस करने का मौका देना है। यहाँ पहुँचकर सैलानी शहरी आपाधापी से दूर प्रकृति की गोद में शांति और ताजगी का अनुभव कर सकते हैं।

मानसून का मनोरम दृश्य और फोटोग्राफी

वर्षारितु और मानसून के मौसम में नयना देवी जलकुंड का सौंदर्य अपने चरम पर होता है। बारिश की बूंदों के बाद जब आसपास की ऊँची पहाड़ियों पर धुंध और बादलों की चादर लिपट जाती है, तो यहाँ का दृश्य किसी स्वप्निल लोक जैसा प्रतीत होता है। पानी से भरा हुआ जलाशय, चारों ओर फैली गहरी हरियाली और बादलों से ढकी पर्वत शृंखलाएँ कैमरे में कैद करने योग्य अद्भुत नजारे पेश करती हैं। जो लोग नेचर फोटोग्राफी, लैंडस्केप शूटिंग या सोशल मीडिया के लिए तस्वीरें खींचने के शौकीन हैं, उनके लिए यह स्थान एक परफेक्ट डेस्टिनेशन बन चुका है।

नैनीताल से दूरी और पहुँचने का मार्ग

नयना देवी जलकुंड नैनीताल के मुख्य शहर से लगभग 15 किलोमीटर की दूरी पर किलबरी इलाके में स्थित है। यहाँ तक पहुँचने के लिए पर्यटकों को बारा पत्थर-विनायक मोटर मार्ग से होकर किलबरी-पंगोट मार्ग की ओर बढ़ना होता है। घने बांज और देवदार के जंगलों के बीच से होकर गुजरती घुमावदार पहाड़ी सड़कें इस सफर को अत्यंत रोमांचक और आनंददायक बनाती हैं। वाहन से सफर करते हुए प्राकृतिक सुंदरता को निहारते हुए आसानी से यहाँ पहुँचा जा सकता है।

सवाल-जवाब

नयना देवी जलकुंड नैनीताल से कितनी दूरी पर स्थित है?
यह जलकुंड नैनीताल मुख्य शहर से लगभग 15 किलोमीटर दूर किलबरी क्षेत्र में स्थित है।
नयना देवी जलकुंड की जल भंडारण क्षमता कितनी है?
वन विभाग द्वारा बनाए गए इस जलकुंड की जल क्षमता लगभग 60 लाख लीटर है।
इस जलकुंड के भौतिक आयाम (आकार) क्या हैं?
इसकी लंबाई लगभग 150 मीटर, चौड़ाई करीब 20 मीटर और गहराई लगभग 1.5 मीटर है।
नयना देवी जलकुंड तक पहुँचने का मार्ग कौन सा है?
यह किलबरी-पंगोट मार्ग पर बारा पत्थर-विनायक मोटर मार्ग से किलबरी की ओर जाने वाले रास्ते पर स्थित है।
पर्यटकों के लिए इस स्थान की मुख्य विशेषता क्या है?
यह स्थान घने जंगलों, हरियाली, इको पार्क, पक्षी दर्शन (बर्ड वाचिंग) और मानसून में फोटोग्राफी के लिए बेहद प्रसिद्ध हो रहा है।
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टिप्पणियाँ 2

Karan Malhotra@karan-malhotra·27 मिनट पहले

एक क्राइम संवाददाता के रूप में मेरा मानना है कि किलबरी वन क्षेत्र में नयना देवी जलकुंड का निर्माण केवल इको-टूरिज्म और जल संरक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा सकारात्मक प्रभाव कानून-व्यवस्था पर भी पड़ेगा। जंगलों के भीतर पानी की उपलब्धता सुनिश्चित होने से जंगली जानवरों का मानव बस्तियों की ओर पलायन रुकेगा, जिससे ग्रामीण इलाकों में मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं और उससे जुड़े तनावपूर्ण कानूनी मामलों में उल्लेखनीय कमी आएगी। वन विभाग की यह पहल पर्यावरणीय संतुलन के साथ सार्वजनिक सुरक्षा के लिहाज से भी एक दूरदर्शी कदम है।

Rohan Verma@rohan-verma·26 मिनट पहले

एक वरिष्ठ संवाददाता के नाते मेरा विश्लेषण है कि किलबरी के इस जलकुंड का प्रभाव केवल पर्यटन या वन्यजीव संरक्षण तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह क्षेत्रीय प्रशासनिक व्यवस्था और आपदा प्रबंधन के लिए भी एक बड़ा संबल है। गर्मियों के दिनों में जब जंगलों में प्राकृतिक जल स्रोतों के सूखने से पानी की तलाश में वन्यजीवों की आवाजाही बढ़ती थी, तब वन विभाग और स्थानीय प्रशासन दोनों के लिए सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखना एक चुनौती बन जाता था। इस छह मिलियन लीटर क्षमता वाले कृत्रिम जलाशय से उन स्थितियों पर प्रभावी लगाम लगेगी।

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