प्रशासनिक सेवाओं की व्यस्त दिनचर्या, निरंतर चलने वाली बैठकों और नीतिगत निर्णयों की भागदौड़ के बीच कई बार ऐसे व्यक्तिगत और आत्मीय पल सामने आते हैं जो जनमानस का ध्यान अपनी ओर खींच लेते हैं। उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले के जिलाधिकारी और उनके प्रशासनिक परिवार से जुड़ा एक ऐसा ही सुखद वाकया इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है। जिले के युवा आईएएस अधिकारी चर्चित गौड़ की जीवनसंगिनी और भारतीय वन सेवा की अधिकारी आरुषि मिश्रा ने अपनी छोटी बेटी का एक बेहद स्नेहिल पल कैमरे में कैद कर लोगों के सामने रखा है, जो सीधे तौर पर परिवार और काम के सामंजस्य को दर्शाता है।
पिता की कर्मस्थली देखने की बाल जिद और मां का खूबसूरत जवाब
सोनभद्र के कलेक्ट्रेट परिसर में उस वक्त एक रोचक स्थिति बनी जब इस प्रशासनिक दंपती की नन्ही बेटी अपने पिता की कार्यस्थली देखने की जिद पर अड़ गई। परिजनों द्वारा काफी समझाने के बावजूद जब बच्ची अपनी बात से पीछे नहीं हटी, तो आखिरकार मां को उसकी मासूम मांग के आगे झुकना पड़ा। आईएफएस अधिकारी आरुषि मिश्रा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर एक तस्वीर साझा की, जिसमें वह अपनी बेटी को बाहों में थामे हुए कलेक्ट्रेट के आधिकारिक नेमप्लेट बोर्ड के समक्ष खड़ी दिखाई दे रही हैं। इस बोर्ड पर वर्ष 2015 से लेकर वर्ष 2026 तक सोनभद्र में पदस्थ रहे जिला कलेक्टरों के नाम क्रमानुसार दर्ज हैं।
इस आधिकारिक सूची के अंतिम छोर पर चर्चित गौड़ का नाम अंकित है, जो 25 अप्रैल 2026 से सोनभद्र के जिला कलेक्टर के तौर पर जिले की बागडोर संभाल रहे हैं। इस तस्वीर के साथ आरुषि ने यह उल्लेख किया कि तमाम जतन करने के बाद भी जब किसी नन्हे बच्चे पर सिर्फ पिता के दफ्तर जाने का जुनून सवार हो जाए, तो अभिभावकों को अंततः उसकी खुशी के आगे समर्पण करना ही पड़ता है। प्रशासनिक जिम्मेदारियों के शीर्ष पर बैठे दंपती की यह सहज मानवीय अभिव्यक्ति आम नागरिकों को भी खूब पसंद आ रही है।
कोटा के कोचिंग क्लास से शुरू हुआ था दोनों का सफर
इस प्रशासनिक दंपती की यात्रा किसी फिल्मी पटकथा की भांति बेहद प्रेरणादायक और रोचक है। मूल रूप से राजस्थान के प्रसिद्ध शैक्षणिक केंद्र कोटा से ताल्लुक रखने वाले चर्चित गौड़ और उत्तर प्रदेश के प्रयागराज की निवासी आरुषि मिश्रा की पहली मुलाकात उसी दौर में हुई थी जब दोनों अपने करियर की बुनियाद रख रहे थे। कोटा में जब आरुषि जेईई मेन की तैयारी में पसीना बहा रही थीं, उसी समय चर्चित भी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए अध्ययनरत थे। यह प्रारंभिक परिचय समय के साथ एक मजबूत सहचर्य में बदल गया।
इंजीनियरिंग के उच्च अध्ययन के लिए दोनों ने देश के शीर्ष संस्थानों का रुख किया। चर्चित ने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान दिल्ली में दाखिला लिया, जबकि आरुषि ने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान रुड़की से अपना बीटेक पूरा किया। अध्ययन के इन व्यस्त वर्षों के दौरान दोनों का संपर्क और आपसी विश्वास निरंतर प्रगाढ़ होता चला गया। वर्षों की इस अटूट समझ और स्नेह ने अंततः एक नए रिश्ते का रूप लिया और वर्ष 2021 में दोनों ने औपचारिक रूप से दांपत्य सूत्र में बंधने का फैसला किया।
सिविल सेवा में शीर्ष मुकाम और प्रशासनिक जिम्मेदारियों का निर्वहन
इंजीनियरिंग के प्रतिष्ठित संस्थानों से उपाधि हासिल करने के बाद दोनों मेधावी युवाओं ने देश की सबसे कठिन मानी जाने वाली प्रशासनिक सेवा को अपना लक्ष्य बनाया। वर्ष 2015 में आईआईटी से स्नातक होने के बाद चर्चित गौड़ ने अपने पहले ही प्रयास में सिविल सेवा परीक्षा उत्तीर्ण की और देश भर में 96वीं रैंक हासिल करके उत्तर प्रदेश कैडर के आईएएस अधिकारी बन गए। कम उम्र में बड़े नीतिगत फैसलों और कुशल प्रशासनिक कार्यशैली के लिए चर्चित को विशेष तौर पर पहचाना गया, जिसके चलते उन्हें उत्तर प्रदेश के सबसे कम उम्र के जिला कलेक्टर के रूप में भी खासी ख्याति मिली।
दूसरी ओर, आरुषि मिश्रा ने भी अपनी अद्वितीय प्रतिभा का परिचय देते हुए वर्ष 2019 की भारतीय वन सेवा परीक्षा में पूरे देश में दूसरा स्थान हासिल किया। प्रशासनिक करियर के दौरान आरुषि आगरा में नेशनल चंबल सेंचुरी की डायरेक्टर और डीएफओ की महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुकी हैं। वहीं उनके पति चर्चित गौड़ आगरा विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष पद पर अपनी सेवाएं दे चुके हैं। कड़े परिश्रम, उच्च शिक्षा और शीर्ष प्रशासनिक पदों तक पहुंचे इस दंपती की यह पारिवारिक झलक अब प्रशासनिक महकमे में एक सकारात्मक मिसाल के रूप में देखी जा रही है।



















