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करौली में की-बोर्ड के जादूगर बने 72 वर्षीय देवी सिंह चाहर, 35 साल से युवाओं को दिला रहे सरकारी नौकरीराजस्थान
20 सित॰ 2026, 11:19 am (43 मिनट पहले)· 0

करौली में की-बोर्ड के जादूगर बने 72 वर्षीय देवी सिंह चाहर, 35 साल से युवाओं को दिला रहे सरकारी नौकरी

करौली के आगरा टाइपिंग सेंटर में 72 साल के देवी सिंह चाहर बीते 35 वर्षों से युवाओं को की-बोर्ड पर रफ्तार पकड़ने का गुर सिखा रहे हैं, जहां से निकले छात्र दिल्ली के गृह मंत्रालय से लेकर बेंगलुरु तक सेवाएं दे रहे हैं।

आधुनिक दौर में कम्प्यूटर और डिजिटल उपकरणों ने कामकाज के तरीकों को पूरी तरह रूपांतरित कर दिया है। सरकारी सेवाओं की भर्ती परीक्षाएं हों या फिर कॉरपोरेट जगत में रोजगार के अवसर, कम्प्यूटर ज्ञान के साथ-साथ की-बोर्ड पर तेज और सटीक टाइपिंग स्पीड की मांग लगातार बनी रहती है। राजस्थान के करौली जिले में एक ऐसा पारंपरिक संस्थान मौजूद है, जो बीते करीब साढ़े तीन दशक से स्थानीय और बाहरी युवाओं को की-बोर्ड पर उंगलियां साधने का सलीका सिखा रहा है।

वर्ष 1989 से संचालित हो रहा शहर का पुराना आगरा टाइपिंग सेंटर

यह संस्थान किसी आधुनिक कॉर्पोरेट लैब या चकाचौंध वाले बड़े संस्थान की शक्ल में नहीं है, बल्कि करौली शहर का बेहद पुराना आगरा टाइपिंग सेंटर है। इस केंद्र की स्थापना वर्ष 1989 में हुई थी। पिछले 35 वर्षों से अनवरत चल रहे इस केंद्र की मुख्य ताकत आधुनिक उपकरण या तकनीक नहीं, बल्कि 72 साल की उम्र में भी पूरी सक्रियता से युवाओं को प्रशिक्षित करने वाले देवी सिंह चाहर हैं। अपने इसी अनूठे समर्पण और पारखी मार्गदर्शन के चलते वे स्थानीय लोगों के बीच टाइपिंग के जादूगर के तौर पर लोकप्रिय हो चुके हैं।

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करौली से लेकर दिल्ली के गृह मंत्रालय और बेंगलुरु तक पहुंचे प्रशिक्षित युवा

दशकों से युवाओं का करियर संवार रहे देवी सिंह चाहर का कहना है कि उनके मार्गदर्शन में अब तक हजारों छात्र-छात्राएं टाइपिंग की बारीकियां सीख चुके हैं। इनमें से बहुत से अभ्यर्थियों ने सरकारी भर्ती प्रक्रियाओं में सफलता अर्जित की और अपने करियर को मुकाम दिया। उनका कहना है कि करौली शहर का शायद ही ऐसा कोई सरकारी दफ्तर बचा हो, जहां उनका कोई पूर्व विद्यार्थी कार्यरत न हो। इतना ही नहीं, यहां से दक्षता हासिल करने वाले युवा दिल्ली स्थित केंद्रीय गृह मंत्रालय के कार्यालयों से लेकर बेंगलुरु के तकनीकी और प्रशासनिक प्रतिष्ठानों तक में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।

बुनियादी तकनीक और उंगलियों के सही मूवमेंट पर विशेष जोर

आगरा टाइपिंग सेंटर में सीखने आने वाले अभ्यर्थियों के अनुसार, इस संस्थान की विशिष्ट पहचान यहां सिखाने की शैली है। देवी सिंह चाहर प्रशिक्षण के प्रारंभिक चरण से ही छात्रों की उंगलियों को की-बोर्ड की सटीक कीज पर रखने और संतुलित तरीके से चलाने की आदत विकसित करते हैं। चाहर बताते हैं कि उनकी पूरी पद्धति उंगलियों के सही मूवमेंट और बुनियादी अभ्यास पर टिकी है। उनका मानना है कि यदि कोई विद्यार्थी इस बुनियादी तकनीक को समझ ले, तो गति और सटीकता हासिल करना बिल्कुल भी कठिन नहीं रहता।

भर्ती परीक्षाओं के टाइपिंग टेस्ट के लिए दूर-दराज से आते हैं अभ्यर्थी

इस संस्थान में प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले छात्र बताते हैं कि करौली के स्थानीय युवाओं के अलावा बाहर के जिलों से भी बड़ी संख्या में अभ्यर्थी यहां पहुंचते हैं। विशेष रूप से ऐसे प्रतियोगी छात्र, जो सरकारी भर्ती परीक्षाओं के लिखित चरण उत्तीर्ण करने के बाद आगामी टाइपिंग टेस्ट की तैयारी में जुटते हैं, वे यहां मार्गदर्शन लेने आते हैं। देवी सिंह चाहर अपने विद्यार्थियों को केवल स्वचालित सॉफ्टवेयर के भरोसे छोड़ने के बजाय खुद की देखरेख में उंगलियों के सटीक ठहराव, लय और बुनियादी नियमों के निरंतर अभ्यास पर ध्यान केंद्रित कराते हैं।

सवाल-जवाब

करौली में टाइपिंग का जादूगर किसे कहा जाता है?
करौली में 72 वर्षीय देवी सिंह चाहर को टाइपिंग का जादूगर कहा जाता है, जो पिछले 35 वर्षों से युवाओं को टाइपिंग सिखा रहे हैं।
आगरा टाइपिंग सेंटर की शुरुआत किस वर्ष हुई थी?
आगरा टाइपिंग सेंटर की शुरुआत वर्ष 1989 में करौली में हुई थी।
देवी सिंह चाहर से सीखे हुए युवा किन प्रमुख विभागों में सेवाएं दे रहे हैं?
उनके छात्र करौली के स्थानीय सरकारी दफ्तरों के अलावा दिल्ली के गृह मंत्रालय और बेंगलुरु तक में सरकारी सेवाएं दे रहे हैं।
देवी सिंह चाहर की टाइपिंग सिखाने की तकनीक में क्या खास है?
वे विद्यार्थियों को केवल सॉफ्टवेयर के भरोसे नहीं छोड़ते, बल्कि शुरुआत से ही उंगलियों की सही स्थिति और मूवमेंट पर विशेष ध्यान देते हैं।
आगरा टाइपिंग सेंटर में किस तरह के छात्र ज्यादा आते हैं?
यहां स्थानीय छात्रों के अलावा सरकारी भर्ती परीक्षाओं के अन्य चरण पास करने के बाद टाइपिंग टेस्ट की तैयारी करने वाले अभ्यर्थी बड़ी संख्या में आते हैं।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Karan Malhotra@karan-malhotra·17 मिनट पहले

सरकारी दफ्तरों, अदालतों और प्रशासनिक विभागों में दस्तावेजों के सही निस्तारण से लेकर एफआईआर दर्ज करने तक सटीक टाइपिंग का महत्वपूर्ण योगदान रहता है। करौली का यह संस्थान युवाओं को केवल रोजगार नहीं दे रहा, बल्कि बुनियादी स्तर पर कुशल मानव संसाधन तैयार कर सरकारी तंत्र को अधिक सुगम बना रहा है। इस तरह के जमीनी प्रयास नागरिक सेवाओं और दफ्तरी कामकाज की गति व पारदर्शिता सुधारने में दूरगामी भूमिका निभाते हैं।

Rohan Verma@rohan-verma·16 मिनट पहले

करण की बात से आगे बढ़ते हुए देखें तो छोटे शहरों और ग्रामीण अंचलों में औपचारिक कौशल विकास योजनाओं की पहुंच अक्सर सीमित रह जाती है। ऐसे में देवी सिंह चाहर जैसे जमीनी मेंटर्स डिजिटल साक्षरता और रोजगार के बीच की खाई को भरने में निर्णायक भूमिका निभाते हैं। जब सरकारी भर्तियों में लिखित परीक्षा के बाद प्रायोगिक टाइपिंग और गति परीक्षण अनिवार्य घटक बन चुके हैं, तब इस तरह के पारंपरिक प्रशिक्षण केंद्र दूर-दराज के अभ्यर्थियों को प्रशासनिक सेवा की मुख्यधारा से जोड़ने वाले मजबूत पुल साबित होते हैं।

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