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भरतपुर के रमासपुर गांव में 55 लोगों का परिवार एक थाली में खाता है, पांच भाइयों की दुल्हनें निकलीं आपस में सगी बहनेंराजस्थान
6 सित॰ 2026, 10:56 am (19 दिन पहले)· 2

भरतपुर के रमासपुर गांव में 55 लोगों का परिवार एक थाली में खाता है, पांच भाइयों की दुल्हनें निकलीं आपस में सगी बहनें

भरतपुर जिले के रमासपुर गांव में मुरारी चौधरी के परिवार के करीब 55 सदस्य आज भी एक साथ रहते हैं, यहां पांच सगे भाइयों का विवाह करौली की पांच सगी बहनों से हुआ है।

राजस्थान के भरतपुर जिले में हलैना क्षेत्र के रमासपुर गांव में रहने वाला मुरारी चौधरी का परिवार इन दिनों अपनी अनोखी जीवनशैली के चलते चर्चा में है। बदलते दौर में जहां जमीन, पैसे और घर के छोटे-छोटे मसलों पर रिश्तेदार अलग हो जाते हैं, वहीं इस परिवार के करीब 55 सदस्य आज भी एक ही मकान में मिल-जुलकर रहते हैं और अपनी एकजुटता को बनाए रखे हुए हैं।

करौली की पांच सगी बहनें बनीं रमासपुर की पांच बहुएं

इस परिवार की सबसे अनोखी बात इसकी रिश्तेदारी है। मुरारी चौधरी के पांच सगे भाइयों की दुल्हनें करौली जिले के एक ही मायके से आईं, ये पांचों आपस में सगी बहनें हैं। इस तरह एक ही घर की पांचों बेटियां रमासपुर के इसी परिवार में बहू बनकर पहुंचीं। अब ये पांचों देवरानी-जेठानी के रिश्ते में हैं और परिवार के हर सुख और मुश्किल घड़ी में एक-दूसरे का साथ निभाती हैं। पीढ़ी दर पीढ़ी परिवार का आकार बढ़ता गया, लेकिन भाइयों में संपत्ति या घर के बंटवारे को लेकर कभी खींचतान नहीं हुई।

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एक ही चूल्हे पर बनता है सबका खाना

परिवार के मुरारी चौधरी बताते हैं कि उनके माता-पिता के घर पांच बेटों के अलावा एक बेटी ने भी जन्म लिया। समय बीतने के साथ परिवार का कुनबा फैलता गया, इसके बावजूद घर में अलग-अलग रसोई बनाने की नौबत कभी नहीं आई। आज भी पूरे परिवार के लिए खाना एक ही चूल्हे पर बनता है और सभी सदस्य एक साथ बैठकर भोजन करते हैं। घर से जुड़ा कोई भी छोटा-बड़ा फैसला अकेले नहीं लिया जाता, बल्कि परिवार के सभी लोग आपस में बातचीत करके ही कोई रास्ता निकालते हैं।

खेती से लेकर पढ़ाई तक, हर काम बंटा हुआ

इतने बड़े परिवार को सुचारू रूप से चलाने के पीछे एक सोची-समझी व्यवस्था काम करती है। घर के सदस्यों ने अपने बीच अलग-अलग काम बांट रखे हैं, कोई खेती-बाड़ी देखता है तो कोई पशुओं की देखभाल संभालता है। इसी तरह कोई बच्चों की पढ़ाई-लिखाई पर नजर रखता है तो कोई घर के आर्थिक हिसाब-किताब में हाथ बंटाता है। इस बंटवारे की वजह से किसी एक सदस्य पर पूरे घर का बोझ नहीं आता और हर किसी की भूमिका स्पष्ट रहती है।

सरपंच होकर भी सामान्य है व्यवहार

परिवार में एक खास पहचान सबसे बड़े भाई की पत्नी की भी है, वे गोविंदपुरा ग्राम पंचायत में सरपंच पद पर हैं। बावजूद इसके, घर के भीतर वे बाकी सदस्यों जैसा ही सामान्य और सहज रवैया रखती हैं। परिवार के सदस्यों का कहना है कि घर का आकार बड़ा होने से रिश्ते जटिल नहीं बनते, दूरी तो तभी बढ़ती है जब सोचने का दायरा छोटा हो जाए।

भरोसे और सम्मान की बुनियाद पर टिका कुनबा

पारस्परिक सम्मान, आपसी सहयोग और गहरे भरोसे के बूते रमासपुर का यह परिवार दशकों से एक साथ जुड़ा हुआ है। मामूली बातों पर रिश्ते तोड़ देने वाले लोगों के लिए यह परिवार सीख की तरह है। 55 लोगों का एक छत के नीचे मिल-जुलकर रहना यह भी बताता है कि परिवार की असली ताकत जमीन-जायदाद में नहीं, बल्कि आपसी प्रेम, समझदारी और एक-दूसरे के साथ खड़े रहने के जज्बे में छिपी होती है।

सवाल-जवाब

यह परिवार कहां रहता है?
राजस्थान के भरतपुर जिले के हलैना क्षेत्र स्थित रमासपुर गांव में।
परिवार में कुल कितने सदस्य हैं?
करीब 55 सदस्य एक ही घर में साथ रहते हैं।
पांच भाइयों की पत्नियां आपस में क्या रिश्ता रखती हैं?
वे करौली जिले के एक ही घर की पांच सगी बहनें हैं।
परिवार में खाना कैसे बनता है?
पूरे परिवार के लिए खाना एक ही चूल्हे पर बनता है, अलग-अलग रसोई में नहीं।
परिवार के फैसले कैसे लिए जाते हैं?
घरेलू फैसले सभी सदस्यों की आपसी सहमति से लिए जाते हैं।
परिवार में जिम्मेदारियां कैसे बंटी हैं?
कोई खेती संभालता है, कोई पशुपालन, कोई बच्चों की पढ़ाई पर ध्यान देता है और कोई आर्थिक प्रबंधन देखता है।
सबसे बड़े भाई की पत्नी क्या करती हैं?
वे ग्राम पंचायत गोविंदपुरा की सरपंच हैं।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Karan Malhotra@karan-malhotra·18 दिन पहले

अपराध और कानूनी मामलों की रिपोर्टिंग के दौरान अक्सर ऐसे पारिवारिक विवाद सामने आते हैं जो संपत्ति के बंटवारे या छोटी-सी रंजिश में खून के रिश्ते तक मिटा देते हैं। इसके विपरीत, भरतपुर का यह मामला सामाजिक ताने-बाने और सामूहिक जीवन का एक दुर्लभ उदाहरण प्रस्तुत करता है, जहां 55 सदस्यों का एक साथ रहना यह साबित करता है कि मजबूत आंतरिक व्यवस्था और श्रम का सही विभाजन कानूनी उलझनों और पारिवारिक मुकदमों को रोकने में कितने प्रभावी साबित हो सकते हैं।

Rohan Verma@rohan-verma·18 दिन पहले

अपराध और शासन बीट पर काम करते हुए हमने अदालतों में परिवार के बीच जमीन और संपत्ति के विवादों के अनगिनत मामले देखे हैं जो अक्सर समाज में बढ़ती अविश्वास की भावना को दर्शाते हैं। इसके विपरीत, रमासपुर का यह उदाहरण दर्शाता है कि यदि ग्रामीण क्षेत्रों में आपसी सहयोग, श्रम का स्पष्ट विभाजन और सामुदायिक जीवन की पुरानी परंपराओं को सहेज कर रखा जाए, तो न केवल सिविल और आपराधिक मुकदमों के बोझ को कम किया जा सकता है, बल्कि स्थानीय स्तर पर सामाजिक सौहार्द का एक मजबूत और अनुकरणीय मॉडल भी स्थापित होता है जो आने वाली पीढ़ियों के लिए स्थिरता का आधार बनता है।

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