पीतल नगरी में खास मसालों और मक्खन के साथ परोसी जाती है मुरादाबादी मूंग दालतुला राशिफल 25 सितंबर 2026: राहु और मंगल के प्रभाव से करियर में आएगी गति, वित्तीय संतुलन और रिश्तों पर दें ध्यानगोवा वोटर लिस्ट विवाद पर चुनाव आयोग का रुख साफ, मतदाता सूची संशोधन पर विपक्ष ने उठाए सवालनागोया में भारत के पास आज कई मेडल पक्के करने का मौका, निशानेबाजी और कबड्डी पर टिकी निगाहेंशी जिनपिंग के स्वागत में व्हाइट हाउस का शाही मेन्यू, फ्रेंच स्वाद के साथ परोसे गए खास व्यंजनराजस्थान के तीन बड़े शहरों में महापौर चुनने की जंग, जयपुर में भाजपा और कांग्रेस आमने-सामनेकश्मीरी गेट के पास ई-रिक्शा रोककर लूटपाट, चाकू के वार से युवक की जान गई और दो जख्मीछत और बालकनी पर सब्जियां उगाते समय न करें केमिकल का छिड़काव, पूसा विशेषज्ञ ने सुझाए जैविक खाद के आसान उपायवृश्चिक राशिफल 25 सितंबर 2026: 12वें भाव में शुक्र जगाएगा सुख-सुविधाओं की चाहत, बजट और सेहत का रखें ध्यानबिटगेट पर बड़ा साइबर हमला, हॉट वॉलेट से उड़ाए गए 351 मिलियन डॉलर
भीलवाड़ा के किसानों ने बदली खेती की तस्वीर, फूलों के उत्पादन से बढ़ रही है तगड़ी कमाईराजस्थान
4 सित॰ 2026, 10:20 pm (20 दिन पहले)· 3

भीलवाड़ा के किसानों ने बदली खेती की तस्वीर, फूलों के उत्पादन से बढ़ रही है तगड़ी कमाई

भीलवाड़ा में किसान पारंपरिक फसलों के साथ गुलाब, गेंदा और गुलदावरी की खेती कर अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत कर रहे हैं। राज्य सरकार राष्ट्रीय बागवानी मिशन के तहत इस पर 50 प्रतिशत तक का अनुदान दे रही है।

भीलवाड़ा जिले के अन्नदाता अब केवल पुरानी और पारंपरिक फसलों पर निर्भर रहने के बजाय फूलों की खेती की तरफ तेजी से रुख कर रहे हैं। इस बदलाव से उनकी आमदनी में उल्लेखनीय इजाफा हो रहा है और खेती अब घाटे का सौदा नहीं बल्कि फायदे का बिजनेस बनती जा रही है। जिले में गुलाब, गेंदा और गुलदावरी जैसे फूलों का दायरा लगातार फैल रहा है, जिससे खेती का यह आधुनिक तरीका स्थानीय किसानों के लिए वरदान साबित हो रहा है।

बाजार में फूलों की मांग पूरे साल बनी रहती है, खासकर जब शादियों का सीजन आता है, बड़े धार्मिक अनुष्ठान होते हैं या कोई राजनीतिक जलसा आयोजित किया जाता है। ऐसे अवसरों पर फूलों के दाम आसमान छूते हैं, जिसका सीधा फायदा भीलवाड़ा के मेहनतकश किसानों को मिलता है और वे अतिरिक्त कमाई कर लेते हैं। कृषि विशेषज्ञों के मुताबिक, फूलों का यह व्यवसाय कम समय में बेहतर रिटर्न देने की क्षमता रखता है।

ये भी पढ़ें

राष्ट्रीय बागवानी मिशन से मिल रही बड़ी आर्थिक मदद

इस आधुनिक खेती को बढ़ावा देने के लिए राजस्थान सरकार किसानों को भरपूर सहयोग प्रदान कर रही है। राष्ट्रीय बागवानी मिशन योजना के अंतर्गत किसानों को फूलों की खेती करने पर इकाई लागत का पूरा 50 प्रतिशत अनुदान दिया जा रहा है। अगर प्रति हेक्टेयर या निर्धारित मानक के अनुसार 20 हजार रुपये की इकाई लागत आती है, तो सरकार की तरफ से सीधे 10 हजार रुपये तक की सहायता राशि किसानों के खातों में पहुंचाई जाती है।

भीलवाड़ा कृषि विभाग के उद्यान विभाग के निदेशक डॉ. शंकर सिंह राठौड़ ने बातचीत में इस बात की पुष्टि की है कि यह जिला अब फूलों के बड़े हब के रूप में अपनी खास पहचान दर्ज करा रहा है। उन्होंने बताया कि किस तरह किसान पारंपरिक तौर-तरीकों को छोड़कर व्यावसायिक कृषि की ओर कदम बढ़ा रहे हैं, जो उन्हें साल के बारहों महीने आर्थिक सुरक्षा देता है।

व्यावसायिक खेती और मुनाफे का नया गणित

फूलों की खेती को विशुद्ध रूप से व्यावसायिक खेती माना जाता है, जिसमें पारंपरिक अनाजों या अन्य फसलों की तुलना में कई गुना अधिक मुनाफा कमाने का मौका होता है। फसल तैयार होने के बाद जैसे ही माल बाजार में पहुंचता है, मांग के मुताबिक तुरंत अच्छे दाम मिल जाते हैं, जिससे किसानों के पास नकदी का प्रवाह भी तेजी से होता है।

सरकार की तरफ से मिलने वाली सब्सिडी और बाजार में सालभर रहने वाली भारी मांग के कारण भीलवाड़ा के किसानों का हौसला काफी ऊंचा है। आने वाले दिनों में जिले के और अधिक किसानों के इस मुनाफे वाली खेती से जुड़ने की उम्मीद जताई जा रही है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को और अधिक मजबूती मिलेगी।

सवाल-जवाब

भीलवाड़ा के किसान किन प्रमुख फूलों की खेती कर रहे हैं?
भीलवाड़ा के किसान मुख्य रूप से गुलाब, गेंदा और गुलदावरी के फूलों की खेती कर रहे हैं।
फूलों की खेती पर सरकार कितना अनुदान दे रही है?
राजस्थान सरकार राष्ट्रीय बागवानी मिशन योजना के तहत फूलों की खेती पर इकाई लागत का 50 प्रतिशत अनुदान दे रही है।
20 हजार रुपये की इकाई लागत पर कितना अनुदान मिलता है?
20 हजार रुपये की इकाई लागत पर किसानों को 10 हजार रुपये तक का अनुदान दिया जाता है।
भीलवाड़ा में उद्यान विभाग के निदेशक कौन हैं?
डॉ. शंकर सिंह राठौड़ भीलवाड़ा कृषि विभाग के उद्यान विभाग के निदेशक हैं।
किसानों को फूलों की खेती से अतिरिक्त मुनाफा कब होता है?
शादी समारोह, धार्मिक आयोजनों और राजनीतिक कार्यक्रमों के दौरान मांग बढ़ने पर किसानों को अतिरिक्त मुनाफा मिलता है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Nyra Kaif@nyra-kaif·20 दिन पहले

भीलवाड़ा के किसानों का फूलों की खेती की ओर रुख करना ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा बदलाव है। राष्ट्रीय बागवानी मिशन की 50 प्रतिशत सब्सिडी और सालभर बनी रहने वाली बाजार की मांग ने इसे केवल पारंपरिक खेती का विकल्प नहीं, बल्कि एक आकर्षक व्यावसायिक मॉडल बना दिया है। अगर इसी तरह सरकारी सहायता और आधुनिक तौर-तरीके मिलते रहे, तो आने वाले समय में यह क्षेत्र कृषि पर्यटन और वेलनेस आधारित लाइफस्टाइल ब्रांड्स के लिए भी कच्चे माल का बड़ा हब बन सकता है।

Arjun Mehta@arjun-mehta·20 दिन पहले

राष्ट्रीय बागवानी मिशन की 50 प्रतिशत अनुदान योजना और शादी, त्योहार व राजनीतिक जलसों जैसी मांग के चक्र का यह गठजोड़ भीलवाड़ा में ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का बेहतरीन मॉडल है। यह बदलाव पारंपरिक खेती से हटकर व्यावसायिक कृषि की ओर बढ़ने का वह ठोस उदाहरण है जो किसानों को सालभर वित्तीय सुरक्षा देता है।

Ravikash Gupta@ravikash·20 दिन पहले

राष्ट्रीय बागवानी मिशन की पचास प्रतिशत सब्सिडी और बारहमासी मांग का यह समीकरण भीलवाड़ा के किसानों को पारंपरिक चक्रव्यूह से निकालकर सीधे लिक्विडिटी आधारित व्यावसायिक अर्थतंत्र से जोड़ता है। इस तरह के कृषि विविधीकरण से ग्रामीण अंचल में पूंजी का प्रवाह तेज होता है, जिससे खेती मात्र जीवन निर्वाह का जरिया न रहकर उच्च रिटर्न देने वाला सस्टेनेबल बिजनेस मॉडल बन जाती है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·20 दिन पहले

भीलवाड़ा में फूलों की खेती और राष्ट्रीय बागवानी मिशन के तहत 50 प्रतिशत अनुदान का यह मॉडल ग्रामीण आर्थिकी को मजबूत कर रहा है। हालांकि, जब व्यावसायिक खेती और सरकारी अनुदान का दायरा बढ़ता है, तो वित्तीय अनियमितताओं और फर्जी दावों की आशंका भी पैदा होती है। ऐसे में यह सुनिश्चित करना जरूरी होगा कि भ्रष्टाचार मुक्त और पारदर्शी व्यवस्था के तहत ही सब्सिडी सीधे पात्र किसानों तक पहुचे, ताकि कृषि अपराधों या धोखाधड़ी की गुंजाइश न बचे।

Rohan Verma@rohan-verma·20 दिन पहले

राष्ट्रीय बागवानी मिशन के तहत मिलने वाले 50 प्रतिशत अनुदान और बाजार में फूलों की सालभर रहने वाली मांग से भीलवाड़ा के किसानों की आमदनी में सुधार हुआ है। उद्यान विभाग के अनुसार इस व्यावसायिक कृषि से जिला नए हब के रूप में उभर रहा है। अब चुनौती यह है कि इस मॉडल को अन्य जिलों में कैसे विस्तारित किया जाए ताकि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को व्यापक स्तर पर गति मिल सके।

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp