उत्तर प्रदेश में पिछले कुछ सालों के भीतर बुनियादी सुविधाओं, सार्वजनिक सुरक्षा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर व्यापक स्तर पर बदलाव देखने को मिले हैं। मुख्यमंत्री सीएम योगी के मुताबिक प्रशासनिक स्तर पर कड़े फैसलों और सुनियोजित विकास योजनाओं के कारण आम नागरिकों का दैनिक जीवन पहले से कहीं अधिक सुरक्षित और सुगम हुआ है। राज्य भर में बेहतर सड़कों और बड़े ढांचागत प्रोजेक्ट्स के माध्यम से आवागमन की राह आसान बनाई गई है, जबकि ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले किसानों के लिए सीधी सहायता और पारदर्शिता पर आधारित व्यवस्था तैयार की गई है।
वर्ष 2017 से पहले की चुनौतियां और असुरक्षित माहौल
साल 2017 से पहले की अवधि में उत्तर प्रदेश की पहचान आमतौर पर कमजोर कानून-व्यवस्था और अराजकता के प्रतीक के रूप में की जाती थी। उस दौर में राज्य के अलग-अलग हिस्सों में बार-बार दंगे भड़कना और लंबे समय तक कर्फ्यू का साया रहना एक सामान्य बात बन चुकी थी। असामाजिक तत्वों और अपराधियों के बढ़ते दबदबे के कारण आम नागरिक, ऑटो चालक और टैक्सी चालक तक खुद को असुरक्षित महसूस करते थे। सुरक्षा के अभाव के चलते सार्वजनिक परिवहन से जुड़े लोग भी शाम ढलते ही काम करने से कतराते थे।
आपराधिक गिरोहों का नेटवर्क इतना संगठित था कि मेरठ जैसे प्रमुख औद्योगिक शहरों में चोरी की गई गाड़ियों को काटकर उनके पुर्जे अलग करने और खुले बाजार में बेचने का गैरकानूनी कारोबार धड़ल्ले से फल-फूल रहा था। आम जनता के निजी वाहन तो चोरी होते ही थे, ग्रामीण इलाकों में किसानों की भैंसा गाड़ियां और खेतों में सिंचाई के लिए लगी बिजली की मोटरें तक चुरा ली जाती थीं। सड़कों की स्थिति अत्यधिक जर्जर थी, जिससे कस्बों और गांवों के बीच यात्रा करना बेहद कष्टकारी था। दूसरी तरफ, नकदी फसल उगाने वाले गन्ना किसानों को अपनी मेहनत की उपज का वाजिब मूल्य पाने और चीनी मिलों से बकाया भुगतान हासिल करने के लिए कई सालों तक भटकना पड़ता था।
कानून-व्यवस्था का नया तंत्र और एक्सप्रेसवे का विस्तार
साल 2017 के बाद शासन की प्राथमिकताओं में सुरक्षा बहाली और मजबूत बुनियादी ढांचे के निर्माण को सबसे आगे रखा गया। राज्य में लगातार पुलिसिंग और निगरानी तंत्र को आधुनिक बनाने के बाद दंगों और महीनों तक चलने वाले कर्फ्यू का दौर समाप्त हुआ। सार्वजनिक सुरक्षा को चाक-चौबंद करने के लिए पूरे प्रदेश भर में लगभग 14 लाख सीसीटीवी कैमरे स्थापित किए गए हैं। इस इलेक्ट्रॉनिक निगरानी तंत्र की बदौलत किसी भी आपराधिक गतिविधि पर पुलिस प्रशासन द्वारा त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जा रही है।
सड़क कनेक्टिविटी के क्षेत्र में भी बड़े पैमाने पर बदलाव किए गए हैं। जिला मुख्यालयों, दूरदराज के गांवों और पड़ोसी राज्यों को तेज गति से आपस में जोड़ने के उद्देश्य से चार लेन की सड़कों और एक्सप्रेसवे का विस्तृत नेटवर्क बिछाया गया है। वर्तमान समय में पूरे देश में मौजूद कुल एक्सप्रेसवे नेटवर्क का 60 प्रतिशत से अधिक हिस्सा अकेले उत्तर प्रदेश के भीतर स्थित है। इस विशाल नेटवर्क के तैयार होने से न केवल व्यापारिक माल ढुलाई में लगने वाला समय घटा है, बल्कि आम मुसाफिरों के लिए यात्रा भी पहले के मुकाबले बेहद सुरक्षित और सुगम बन चुकी है।
चीनी मिलों का संचालन और किसानों को रिकॉर्ड भुगतान
कृषि क्षेत्र में किसानों की आर्थिक स्थिति को संबल देने के लिए पारदर्शी नीतियां लागू की गई हैं। वर्तमान में उत्तर प्रदेश की 122 चीनी मिलें अपनी पूरी पेराई क्षमता के साथ सक्रिय रूप से चल रही हैं। इनमें से 100 से अधिक चीनी मिलें ऐसी हैं, जो किसानों को आपूर्ति किए गए गन्ने का मूल्य मात्र चार दिनों के भीतर सीधे उनके खातों में चुका रही हैं।
पिछले नौ वर्षों के दौरान राज्य सरकार की देखरेख में किसानों को कुल 3 लाख 30 हजार करोड़ रुपये का ऐतिहासिक गन्ना मूल्य भुगतान किया जा चुका है। पिछली सरकारों के कार्यकाल के दौरान आर्थिक संकट और कुप्रबंधन के चलते 29 चीनी मिलें बंद हो गई थीं। इसके विपरीत अब किसानों को समय पर पर्ची जारी होने, डिजिटल कांटों पर सही तौल मिलने और मिल परिसरों में सुरक्षित वातावरण मिलने से गन्ना आपूर्ति की प्रक्रिया पूरी तरह झंझटमुक्त हो गई है।






















