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भीलवाड़ा के मालासेरी डूंगरी में सजता है दरबार, भगवान देवनारायण के साथ नीले घोड़े की होती है विशेष पूजाराजस्थान
15 सित॰ 2026, 7:00 pm (10 दिन पहले)· 1

भीलवाड़ा के मालासेरी डूंगरी में सजता है दरबार, भगवान देवनारायण के साथ नीले घोड़े की होती है विशेष पूजा

राजस्थान के भीलवाड़ा जिले के आसींद स्थित मालासेरी डूंगरी में भगवान देवनारायण और उनके वाहन नीले घोड़े का अवतरण दिवस धूमधाम से मनाया जाता है। इस पावन स्थल पर देश भर से लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं।

राजस्थान के भीलवाड़ा जिले के आसींद में स्थित मालासेरी डूंगरी को भगवान देवनारायण की पावन जन्मस्थली के रूप में जाना जाता है। इस स्थान पर हर साल भादवी छठ के पावन अवसर पर भगवान देवनारायण के वाहन नीलाघर यानी नीले घोड़े का अवतरण दिवस अत्यंत धूमधाम के साथ मनाया जाता है। इस विशेष आयोजन में भाग लेने के लिए न केवल राजस्थान से, बल्कि देश के विभिन्न कोनों से भारी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं और अपनी गहरी आस्था प्रकट करते हैं।

विशेष पूजा और भक्तों की अटूट आस्था

मालासेरी डूंगरी के इस मंदिर में भगवान देवनारायण के साथ-साथ उनके वाहन नीले घोड़े की भी विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। ऐसी गहरी मान्यता है कि इस पवित्र स्थल पर आने वाले भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और उनके जीवन के सारे दुख-दर्द दूर हो जाते हैं। यही कारण है कि हर साल पर्व के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु कठिन पैदल यात्रा करके मंदिर तक पहुंचते हैं। यात्रा के पूरे मार्ग में डीजे, पारंपरिक ढोल और नगाड़ों की गूंज के साथ भक्त भगवान देवनारायण के जयकारे लगाते हुए मंदिर परिसर में प्रवेश करते हैं।

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भजन संध्या और भव्य मेले का आयोजन

इस पावन अवसर पर मंदिर परिसर में एक विशाल भजन संध्या और भव्य मेले का आयोजन किया जाता है। इस मेले में देश के कोने-कोने से लाखों श्रद्धालुओं के जुटने की उम्मीद रहती है। मालासेरी डूंगरी की प्राचीन धार्मिक और ऐतिहासिक मान्यताओं के कारण यह स्थल देश भर के आस्थावानों के लिए एक प्रमुख केंद्र बना हुआ है। यहां की प्राकृतिक बनावट और भौगोलिक संरचना आज भी प्राचीन काल की यादों को ताजा कर देती है, जिसे देखने दूर-दूर से लोग आते हैं।

पौराणिक मान्यता और नीलाघर घोड़े का इतिहास

मालासेरी मंदिर के मुख्य पुजारी हेमराज पोसवाल ने इस स्थान के इतिहास के बारे में विस्तार से बताया है। उनके अनुसार, माता साडू की परीक्षा लेने के लिए स्वयं भगवान विष्णु उनके पास आए थे। उन्होंने माता को आशीर्वाद देते हुए यह वचन दिया था कि बगड़ावतों का युद्ध समाप्त होने के पश्चात वह मालासेरी डूंगरी जाकर तपस्या करें। तपस्या पूर्ण होने के बाद भगवान विष्णु उनके पुत्र के रूप में इस धरती पर अवतार लेंगे। जब माता साडू ने इस बात का अकाट्य प्रमाण मांगा, तो भगवान विष्णु ने उन्हें निर्देश दिया कि भादवी छठ के दिन मालासेरी डूंगरी पर जाकर पत्थर को चीरकर देखना, जहां उनका वाहन नीले घोड़े के रूप में प्रकट हो जाएगा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी कर चुके हैं दर्शन

भगवान देवनारायण की इस पावन जन्मस्थली मालासेरी डूंगरी की प्रसिद्धि केवल राजस्थान तक सीमित नहीं है, बल्कि इसकी ख्याति पूरे देश में फैली हुई है। वर्ष 2023 में देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी एक साधारण भक्त के रूप में भगवान देवनारायण के दर्शन करने के लिए इसी स्थान पर पहुंचे थे। हर साल आयोजित होने वाले इस धार्मिक पर्व को लेकर श्रद्धालुओं में गजब का उत्साह देखने को मिलता है और दूर-दराज के क्षेत्रों से लोग गहरी आस्था के साथ यहां पहुंचकर भगवान देवनारायण और उनके वाहन नीले घोड़े की पूजा-अर्चना करते हैं।

सवाल-जवाब

मालासेरी डूंगरी कहां स्थित है?
मालासेरी डूंगरी राजस्थान के भीलवाड़ा जिले के आसींद में स्थित है।
मालासेरी डूंगरी क्यों प्रसिद्ध है?
यह स्थान भगवान देवनारायण की जन्मस्थली के रूप में प्रसिद्ध है।
नीलाघर घोड़े का अवतरण दिवस कब मनाया जाता है?
यह उत्सव हर साल भादवी छठ के अवसर पर मनाया जाता है।
मालासेरी मंदिर के मुख्य पुजारी कौन हैं?
हेमराज पोसवाल मालासेरी मंदिर के मुख्य पुजारी हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस मंदिर के दर्शन कब किए थे?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2023 में इस मंदिर के दर्शन किए थे।
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टिप्पणियाँ 5

Yuki Tanaka@yuki-tanaka·9 दिन पहले

मालासेरी डूंगरी का यह आयोजन केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देश के सांस्कृतिक पर्यटन और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को भी एक बड़ा बढ़ावा देता है। जब देश के शीर्ष नेतृत्व जैसे प्रधानमंत्री स्तर के लोग ऐसे पावन स्थलों पर आते हैं, तो यह क्षेत्र राष्ट्रीय मानचित्र पर उभरता है और स्थानीय स्तर पर रोजगार एवं बुनियादी ढांचे के विकास की संभावनाओं को तीव्र गति मिलती है।

Ravikash Gupta@ravikash·9 दिन पहले

भीलवाड़ा के मालासेरी डूंगरी का यह आयोजन केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि यह राजस्थान के सांस्कृतिक पर्यटन और स्थानीय आर्थिकी को गति देने का एक बड़ा जरिया भी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 2023 के दौरे के बाद से इस क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बढ़ी है, जिससे आने वाले समय में यहाँ धार्मिक पर्यटन के बुनियादी ढांचे और आतिथ्य सत्कार उद्योग में बड़े निवेश की संभावनाएं बन रही हैं, जो स्थानीय रोजगार सृजन में भी मददगार साबित होंगी।

Arjun Mehta@arjun-mehta·9 दिन पहले

मालासेरी डूंगरी का यह वार्षिकोत्सव राजस्थान के सामाजिक और राजनीतिक समीकरणों को भी गहराई से प्रभावित करता है। गुर्जर समुदाय की इस क्षेत्र में मजबूत जनसांख्यिकी उपस्थिति है, और भगवान देवनारायण से जुड़ी यह आस्था राजनीतिक दलों के लिए भी विशेष महत्व रखती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 2023 की यात्रा इसी भू-राजनीतिक और सामाजिक महत्व को दर्शाती है, जहाँ सांस्कृतिक धरोहर के जरिए बड़े जनसमूह को साधने की रणनीति साफ दिखाई देती है।

Rohan Verma@rohan-verma·9 दिन पहले

मालासेरी डूंगरी जैसे धार्मिक स्थल केवल आस्था के केंद्र नहीं हैं, बल्कि यह सांस्कृतिक पर्यटन और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को भी बड़ा बढ़ावा देते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 2023 के दौरे के बाद से इस क्षेत्र में बुनियादी ढांचे के विकास और श्रद्धालुओं की आवाजाही में जो तेजी आई है, वह ग्रामीण पर्यटन और लोक संस्कृति के संरक्षण का एक बेहतरीन उदाहरण है। भविष्य में इस तरह के आयोजनों के प्रबंधन में स्थानीय प्रशासन और परिवहन व्यवस्था की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·9 दिन पहले

एक क्राइम संवाददाता के रूप में मेरा मानना है कि मालासेरी डूंगरी जैसे अत्यधिक भीड़भाड़ वाले धार्मिक आयोजनों में कानून-व्यवस्था, यातायात प्रबंधन और भारी जनसमूह की सुरक्षा प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती होती है। प्रधानमंत्री के दौरे और लाखों श्रद्धालुओं के आगमन को देखते हुए यह आवश्यक है कि भविष्य के मेलों में पुलिस बल की तैनाती, सीसीटीवी निगरानी और आपदा प्रबंधन को और अधिक सुदृढ़ किया जाए ताकि किसी भी आपात स्थिति से निपटा जा सके।

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