ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर के मंचेश्वर थाना क्षेत्र में चौबीस घंटे के भीतर हत्या की दूसरी दहला देने वाली घटना सामने आने से पूरे इलाके में सनसनी फैल गई है। इससे ठीक पहले मंचेश्वर के चकेइसियानी इलाके में एक पति ने अपनी पत्नी की जान ले ली थी। इस ताजा घटना में मंगलवार को उसी थाना क्षेत्र के अंतर्गत एक पच्चीस वर्षीय युवक ने अपने पचास वर्षीय पिता को मौत के घाट उतार दिया। बेटे पर यह खौफनाक आरोप है कि उसने अपने पिता की बेरहमी से पिटाई की, जिसके चलते उनकी मौके पर ही मौत हो गई। इस जघन्य हत्याकांड के बाद से स्थानीय लोग स्तब्ध हैं और पुलिस मामले की गहराई से छानबीन कर रही है।
पिता ने सुधारे थे रास्ते, लेकिन बेटा हो गया बागी
मृतक की पहचान पचास वर्षीय एस. दुर्योधन के रूप में हुई है, जो अपने भरण-पोषण के लिए लेबर कॉन्ट्रैक्टर के रूप में काम करते थे। वहीं, इस पूरी वारदात को अंजाम देने वाला आरोपी उनका इकलौता बेटा एस. देबराज है, जिसकी उम्र पच्चीस साल है। जैसे ही इस घटना की सूचना स्थानीय पुलिस को मिली, महकमे में हड़कंप मच गया। आनन-फानन में पुलिस बल के साथ साइंटिफिक विशेषज्ञों की टीम भी घटनास्थल पर पहुंची और साक्ष्य जुटाए। पुलिस ने शव को अपने कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी है।
नशा छुड़ाने की तरकीब बनी जानलेवा
असिस्टेंट कमिश्नर ऑफ पुलिस (जोन 5) विश्वरंजन सेनापति ने इस सनसनीखेज मामले की पूरी जानकारी साझा करते हुए बताया कि शुरुआती जांच में यह बात सामने आई है कि देबराज ब्राउन शुगर के नशे की बुरी लत का शिकार था। उसकी इस लत से परेशान होकर पिता ने उसे पहले एक नशा मुक्ति केंद्र में भी भर्ती कराया था ताकि वह सामान्य जीवन लौट सके। इसके अलावा, डॉक्टर की सलाह पर दुर्योधन अपने बेटे को ड्रग्स की लत से बाहर निकालने के लिए नशा छुड़ाने वाली दवा को बीड़ी में मिलाकर देने का प्रयास करते थे। बेटा जब भी सामान्य बीड़ी की मांग करता, तो पिता चुपके से उसे वही दवा वाली बीड़ी थमा देते थे। देबराज को पिता का यह तरीका बिल्कुल पसंद नहीं था और इसी बात को लेकर घर में आए दिन कलह और विवाद होता रहता था।
सोमवार की रात से सुलग रही थी रंजिश की आग
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, सोमवार की रात भी इसी बीड़ी वाले मुद्दे को लेकर पिता और बेटे के बीच तीखी नोकझोंक और बहस हुई थी। बात इतनी ज्यादा बढ़ गई थी कि घर का माहौल बेहद तनावपूर्ण हो गया था। डर के मारे आरोपी की मां और परिवार के अन्य सदस्य उसी रात घर छोड़कर सुरक्षित स्थान पर चले गए थे। मंगलवार की सुबह जब घर का सन्नाटा टूटा, तो वहां केवल दुर्योधन और देबराज ही मौजूद थे। सुबह के वक्त जब पिता ने एक बार फिर बेटे को वही दवा मिली बीड़ी थमाई, तो देबराज ने सामान्य बीड़ी की जिद पकड़ ली। दुर्योधन अपनी बात पर अड़े रहे और बेटे को न छोड़ने की जिद पर कायम रहे, जिससे आरोपी गुस्से से आगबबुला हो गया।
क्रूरता की हदें पार करते हुए किया हमला
गुस्से में बेकाबू होकर देबराज ने आव देखा न ताव, घर में रखे लोहे के पाइप से अपने ही पिता पर ताबड़तोड़ हमले करने शुरू कर दिए। इतने से भी जब उसका गुस्सा शांत नहीं हुआ, तो उसने भारी पत्थर से कुचलकर उनकी निर्मम हत्या कर दी। इस पूरे घटनाक्रम के सामने आने के बाद पुलिस ने परिजनों से पूछताछ की, जिसमें एक और अहम जानकारी हाथ लगी है। परिजनों ने पुलिस को बताया कि आरोपी देबराज ब्रेन ट्यूमर जैसी गंभीर बीमारी से भी पीड़ित है, जिसके कारण उसे अचानक तेज और अनियंत्रित गुस्सा आ जाता था। फिलहाल, पुलिस ने आरोपी देबराज को अपनी हिरासत में ले लिया है और उसे अदालत में पेश करने की कानूनी तैयारियां की जा रही हैं।



















