बिहार के दरभंगा स्थित बाजार समिति चौक पर इस साल दुर्गा पूजा का आयोजन बेहद भव्य और अलौकिक होने जा रहा है। यहां आने वाले श्रद्धालुओं को दक्षिण भारत के प्रसिद्ध रामेश्वरम मंदिर की वास्तुकला और दिव्यता का अनुभव मिलेगा। इस बार पंडाल का बाहरी ढांचा हूबहू रामेश्वरम मंदिर जैसा दिखाई देगा, जबकि पंडाल के भीतर कदम रखते ही भक्तों को एक विशाल पर्वत के बीच से प्रकट होते भगवान शिव का अद्भुत स्वरूप आकर्षित करेगा। पहाड़ के मध्य से महादेव के दर्शन का यह दृश्य श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बनेगा।
तीन महीने से अधिक समय से चल रहा है निर्माण कार्य
इस विशाल आयोजन की तैयारियों को लेकर मेला प्रभारी सोनू कुमार ने जानकारी दी कि पंडाल का निर्माण कार्य पिछले साढ़े तीन महीने से निरंतर जारी है। इस कलाकृति को अंतिम रूप देने के लिए दरभंगा, मुजफ्फरपुर और पश्चिम बंगाल के कुशल कारीगर दिन-रात मेहनत कर रहे हैं। निर्माण कार्य में भव्यता और मजबूती का पूरा ख्याल रखा जा रहा है। अब तक इस पंडाल में 25 हजार से लेकर 30 हजार बांस का उपयोग हो चुका है, जबकि 3 से 4 ट्रक बीट सामग्री भी लग चुकी है। पंडाल की सजावट और आकृतियों को निखारने के लिए थर्माकोल तथा पीओपी का बारीक काम चल रहा है। इस पूरे पंडाल निर्माण पर लगभग 70 से 80 लाख रुपये से अधिक की लागत आने की उम्मीद है।
हाईवे पर होने से लाखों श्रद्धालुओं की उमड़ती है भीड़
यह भव्य पूजा स्थल राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित होने के कारण भौगोलिक दृष्टि से बेहद सुगम है, जिस वजह से हर वर्ष यहां लाखों की संख्या में भक्त दर्शन के लिए पहुंचते हैं। दरभंगा के अलावा आसपास के कई प्रमुख जिलों जैसे मुजफ्फरपुर, सीतामढ़ी, मधुबनी, समस्तीपुर और बेगूसराय से भी बड़ी तादाद में लोग मां दुर्गा और पंडाल की भव्यता देखने आते हैं। बेहतरीन प्रबंधन, सुरक्षा और सुंदरता के लिए जिला प्रशासन द्वारा इस पंडाल को कई बार सम्मानित और पुरस्कृत भी किया जा चुका है।
गंगा-जमुनी तहजीब और सामाजिक सौहार्द का अनोखा प्रतीक
इस आयोजन की सबसे बड़ी खासियत इसकी सामाजिक एकता और सौहार्द की भावना है। यह पूजा समिति गंगा-जमुनी तहजीब की जीती-जागती मिसाल पेश करती है। पूजा समिति के मुख्य सहयोगी के रूप में मोहम्मद परवेज सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं, जो हिंदू-मुस्लिम एकता की मिसाल बनकर इस धार्मिक अनुष्ठान को सफल बनाने में जुटे हैं। यहां धर्म और मजहब की सीमाओं से ऊपर उठकर आपसी भाईचारे और भक्ति की मिसाल पेश की जाती है, जो पूरे मिथिलांचल क्षेत्र में सौहार्द और एकजुटता का मजबूत संदेश दे रही है।






















