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बिहार के दरभंगा में सजेगा रामेश्वरम मंदिर की तर्ज पर दुर्गा पूजा पंडाल, पहाड़ से प्रकट होंगे शिवभारत
10 अक्तू॰ 2026, 1:44 pm (2 घंटे पहले)· 0

बिहार के दरभंगा में सजेगा रामेश्वरम मंदिर की तर्ज पर दुर्गा पूजा पंडाल, पहाड़ से प्रकट होंगे शिव

दरभंगा के बाजार समिति चौक पर 70 से 80 लाख रुपये के बजट से भव्य दुर्गा पूजा पंडाल तैयार किया जा रहा है, जिसमें रामेश्वरम मंदिर और पहाड़ से प्रकट होते महादेव का दिव्य रूप दिखेगा।

बिहार के दरभंगा स्थित बाजार समिति चौक पर इस साल दुर्गा पूजा का आयोजन बेहद भव्य और अलौकिक होने जा रहा है। यहां आने वाले श्रद्धालुओं को दक्षिण भारत के प्रसिद्ध रामेश्वरम मंदिर की वास्तुकला और दिव्यता का अनुभव मिलेगा। इस बार पंडाल का बाहरी ढांचा हूबहू रामेश्वरम मंदिर जैसा दिखाई देगा, जबकि पंडाल के भीतर कदम रखते ही भक्तों को एक विशाल पर्वत के बीच से प्रकट होते भगवान शिव का अद्भुत स्वरूप आकर्षित करेगा। पहाड़ के मध्य से महादेव के दर्शन का यह दृश्य श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बनेगा।

तीन महीने से अधिक समय से चल रहा है निर्माण कार्य

इस विशाल आयोजन की तैयारियों को लेकर मेला प्रभारी सोनू कुमार ने जानकारी दी कि पंडाल का निर्माण कार्य पिछले साढ़े तीन महीने से निरंतर जारी है। इस कलाकृति को अंतिम रूप देने के लिए दरभंगा, मुजफ्फरपुर और पश्चिम बंगाल के कुशल कारीगर दिन-रात मेहनत कर रहे हैं। निर्माण कार्य में भव्यता और मजबूती का पूरा ख्याल रखा जा रहा है। अब तक इस पंडाल में 25 हजार से लेकर 30 हजार बांस का उपयोग हो चुका है, जबकि 3 से 4 ट्रक बीट सामग्री भी लग चुकी है। पंडाल की सजावट और आकृतियों को निखारने के लिए थर्माकोल तथा पीओपी का बारीक काम चल रहा है। इस पूरे पंडाल निर्माण पर लगभग 70 से 80 लाख रुपये से अधिक की लागत आने की उम्मीद है।

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हाईवे पर होने से लाखों श्रद्धालुओं की उमड़ती है भीड़

यह भव्य पूजा स्थल राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित होने के कारण भौगोलिक दृष्टि से बेहद सुगम है, जिस वजह से हर वर्ष यहां लाखों की संख्या में भक्त दर्शन के लिए पहुंचते हैं। दरभंगा के अलावा आसपास के कई प्रमुख जिलों जैसे मुजफ्फरपुर, सीतामढ़ी, मधुबनी, समस्तीपुर और बेगूसराय से भी बड़ी तादाद में लोग मां दुर्गा और पंडाल की भव्यता देखने आते हैं। बेहतरीन प्रबंधन, सुरक्षा और सुंदरता के लिए जिला प्रशासन द्वारा इस पंडाल को कई बार सम्मानित और पुरस्कृत भी किया जा चुका है।

गंगा-जमुनी तहजीब और सामाजिक सौहार्द का अनोखा प्रतीक

इस आयोजन की सबसे बड़ी खासियत इसकी सामाजिक एकता और सौहार्द की भावना है। यह पूजा समिति गंगा-जमुनी तहजीब की जीती-जागती मिसाल पेश करती है। पूजा समिति के मुख्य सहयोगी के रूप में मोहम्मद परवेज सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं, जो हिंदू-मुस्लिम एकता की मिसाल बनकर इस धार्मिक अनुष्ठान को सफल बनाने में जुटे हैं। यहां धर्म और मजहब की सीमाओं से ऊपर उठकर आपसी भाईचारे और भक्ति की मिसाल पेश की जाती है, जो पूरे मिथिलांचल क्षेत्र में सौहार्द और एकजुटता का मजबूत संदेश दे रही है।

सवाल-जवाब

दरभंगा में यह भव्य दुर्गा पूजा पंडाल किस स्थान पर बनाया जा रहा है?
यह पंडाल दरभंगा के बाजार समिति चौक पर राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे बनाया जा रहा है।
इस वर्ष के पूजा पंडाल की मुख्य थीम क्या है?
इस वर्ष पंडाल का बाहरी स्वरूप दक्षिण भारत के रामेश्वरम मंदिर जैसा होगा और अंदर पहाड़ से निकलते भगवान शिव का स्वरूप दिखेगा।
पंडाल निर्माण में कितना समय और कितनी सामग्री लगी है?
निर्माण कार्य साढ़े तीन महीने से चल रहा है, जिसमें 25,000 से 30,000 बांस और 3 से 4 ट्रक बीट के साथ पीओपी और थर्माकोल का उपयोग हुआ है।
इस विशाल पंडाल को तैयार करने में कितना अनुमानित खर्च आ रहा है?
मेला प्रभारी के अनुसार इस पूरे पंडाल के निर्माण में लगभग 70 से 80 लाख रुपये से अधिक खर्च होने की उम्मीद है।
पंडाल के निर्माण कार्य में कहां-कहां के कारीगर शामिल हैं?
पंडाल को अंतिम रूप देने में दरभंगा, मुजफ्फरपुर और पश्चिम बंगाल के कुशल कारीगर जुटे हुए हैं।
इस पूजा आयोजन को सामाजिक सौहार्द की मिसाल क्यों माना जा रहा है?
पूजा समिति के मुख्य सहयोगी मोहम्मद परवेज हैं, जो हिंदू-मुस्लिम एकता की मिसाल बनकर इस आयोजन को सफल बनाने में जुटे हैं।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Dr. Aditya Sharma@aditya-sharma·33 मिनट पहले

रामेश्वरम मंदिर और पहाड़ से निकलते शिव की परिकल्पना बहुत ही भव्य है। दरभंगा का यह पंडाल इस बार सच में अद्भुत दिखने वाला है। पर मेरा एक सवाल है कि इस विशाल और भारी-भरकम ढांचे के लिए वास्तु और मौसम के लिहाज से क्या कोई विशेष सुरक्षा उपाय किए गए हैं?

Arjun Mehta@arjun-mehta·49 मिनट पहले

मोहम्मद परवेज जिस तरह से इस पूरे आयोजन से जुड़े हैं और हिंदू-मुस्लिम एकता की बात सामने आ रही है, वह सचमुच दिल को छू लेने वाली है। त्योहारों का असली मज़ा ऐसे ही आपसी भाईचारे से आता है।

Ravikash Gupta@ravikash·49 मिनट पहले

अर्जुन, भाईचारा अच्छी बात है पर 80 लाख का बजट सुनकर थोड़ा शक होता है। सच में इतने खर्च की ज़रूरत थी?

Karan Malhotra@karan-malhotra·1 घंटे पहले

अस्सी लाख का बजट और इतने बांस-थर्माकोल, बात कुछ हजम नहीं हुई। पंडाल पर इतना खर्च थोड़ा ज़्यादा ही लग रहा है।

Rohan Verma@rohan-verma·1 घंटे पहले

करण भाई, कारीगरों की इतनी लंबी मेहनत और हाईवे की लोकेशन देखकर खर्च सही ही लग रहा है।

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