दिल्ली में विरोध प्रदर्शनों के बीच नितिन नवीन का विपक्ष पर बड़ा हमला, विदेशी ताकतों के इशारे पर अशांति फैलाने का लगाया आरोपबस्तर के जगदलपुर में कांतारा फिल्म की तर्ज पर सजा अनोखा दुर्गा पंडाल, बांस की कारीगरी बनी मुख्य आकर्षणअहमदाबाद में नवरात्र उत्सव पर सख्त पहरा, 14,000 जवान और आधुनिक निगरानी तकनीक तैनातउपवास के दिनों में कमजोरी दूर भगाएंगे मेवों से बने चूरमा लड्डू, जानिए आसान विधि और फायदेबीकानेर की पुगल रोड पर सजीं मां दुर्गा की मनमोहक मूर्तियां, बालोतरा के कारीगरों को मिल रहे अच्छे दामपुलिस हिरासत में बंद सीजेपी संस्थापक अभिजीत दीपके की दादी का पैतृक गांव में देहांतदीदारगंज में युवक की गोली मारकर हत्या के बाद भड़का गुस्सा, शव रखकर राष्ट्रीय राजमार्ग किया जामवैश्विक बाजार में छा रहा मिथिला मखाना, पांच वर्षों में 30 हजार मीट्रिक टन विदेशी बिक्री की तैयारीमहिला बिग बैश लीग की तैयारी में जुटीं अनाया बांगर, योगराज सिंह से ट्रेनिंग और सरफराज खान पर रखी दो टूक बातकांग्रेस के वरिष्ठ नेता दीपक बाबरिया का शनिवार को निधन, कई राज्यों में संभाली थी संगठन की कमान
उत्तराखंड की पारंपरिक कला को स्वरोजगार बनाकर पहचान बना रहीं बागेश्वर की रिचा जोशीउत्तराखंड
10 अक्तू॰ 2026, 2:49 pm (1 घंटे पहले)· 0

उत्तराखंड की पारंपरिक कला को स्वरोजगार बनाकर पहचान बना रहीं बागेश्वर की रिचा जोशी

प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के साथ लोककला ऐपण और मधुबनी पेंटिंग के सजावटी उत्पाद ऑनलाइन बेचकर आत्मनिर्भर बन रही हैं बागेश्वर की रिचा जोशी।

उत्तराखंड के पहाड़ी अंचल बागेश्वर में रहने वाली रिचा जोशी ने लोक संस्कृति और आधुनिक बाजार के बीच एक मजबूत सेतु तैयार किया है। ठाकुरद्वारा वार्ड की रहने वाली रिचा उच्च शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं की व्यस्त दिनचर्या के बीच अपनी पारंपरिक लोक चित्रकला ऐपण और मधुबनी कलाकृतियों को सहेजते हुए उन्हें आय का जरिया बना रही हैं।

प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के साथ संवारा बचपन का शौक

हल्द्वानी से स्नातक की डिग्री हासिल करने के बाद रिचा ने उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय से अपनी स्नातकोत्तर की पढ़ाई पूरी की। फिलहाल उनका मुख्य लक्ष्य प्रतियोगी परीक्षाओं को पास करना है, लेकिन किताबों के भारी दबाव के बीच भी उन्होंने अपनी कलात्मक रुचि को पीछे नहीं छूटने दिया। उनका मानना है कि पढ़ाई के साथ अपने व्यक्तिगत हुनर को निखारना हर युवा के लिए बेहद जरूरी है। बचपन से लोक कलाओं के प्रति गहरा लगाव रखने वाली रिचा ने अभ्यास के जरिए ऐपण के बारीक आकारों पर अपनी पकड़ मजबूत की और फिर धीरे-धीरे इसमें नए प्रयोग जोड़ने लगीं।

ये भी पढ़ें

पारंपरिक अनुष्ठानों से लेकर मॉडर्न होम डेकोर तक के उत्पाद

रिचा अपने काम में कुमाऊं की सदियों पुरानी ऐपण शैली के साथ-साथ बिहार की प्रसिद्ध मधुबनी कला का भी सुंदर संगम प्रस्तुत करती हैं। उनके उत्पादों की श्रृंखला में केवल पारंपरिक पूजा सामग्री ही नहीं, बल्कि आधुनिक घरों की सजावट के सामान भी शामिल हैं। वे आकर्षक ऐपण फ्रेम, स्वास्तिक चिन्ह, कस्टमाइज्ड नेम प्लेट और की-रिंग तैयार करती हैं। इसके अतिरिक्त धार्मिक अनुष्ठानों और संस्कारों के लिए लक्ष्मी, सरस्वती, नवदुर्गा, चामुंडा, आचार्य, धूलि, नामकरण, स्नान, आसन और गणेश चौकी जैसे शास्त्रीय डिजाइनों का निर्माण भी करती हैं। इन कलाकृतियों को गृह सज्जा, मांगलिक आयोजनों और उपहार देने के लिए खूब पसंद किया जा रहा है।

इंटरनेट और सोशल मीडिया से मिला देश भर में बाजार

बागेश्वर जैसे सुदूर पर्वतीय शहर में रहने के बावजूद रिचा के उत्पादों की पहुंच केवल स्थानीय बाजार तक सीमित नहीं रही। डिजिटल तकनीक और सोशल मीडिया मंचों की सहायता से वे अपने हस्तशिल्प को दूर-दराज के ग्राहकों तक पहुंचा रही हैं। ऑनलाइन ऑर्डर मिलने से उन्हें पहाड़ी क्षेत्र में बैठकर ही पूरे देश से खरीदार मिल रहे हैं। रिचा का स्पष्ट मानना है कि अगर किसी के पास रचनात्मक कौशल है, तो उसे सिर्फ शौक मानकर घर की चारदीवारी तक सीमित नहीं रखना चाहिए, बल्कि उसे स्वरोजगार में बदलकर आर्थिक स्वावलंबन हासिल करना चाहिए।

परिवार का अटूट संबल और समाज के लिए प्रेरणा

रिचा के इस सफर में उनके परिवार का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है। उनके पिता मोहन चंद्र जोशी सरस्वती मंदिर गरुड़ विद्यालय में कार्यरत हैं, जबकि मां निर्मला जोशी गृहिणी हैं। उनके भाई शुभम जोशी भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट के पद पर देश सेवा कर रहे हैं। पूरे परिवार के प्रोत्साहन ने रिचा को निरंतर आगे बढ़ने की हिम्मत दी है। उनकी यह उपलब्धि साबित करती है कि पहाड़ की बेटियां अपनी जड़ों और संस्कृति से जुड़े रहकर भी आधुनिक व्यापार के जरिए स्वावलंबन की नई मिसाल कायम कर सकती हैं।

सवाल-जवाब

रिचा जोशी कौन हैं और वे कहां की निवासी हैं?
रिचा जोशी उत्तराखंड के बागेश्वर जिले में ठाकुरद्वारा वार्ड की निवासी हैं, जो प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के साथ ऐपण और मधुबनी कला से जुड़े उत्पाद तैयार करती हैं।
रिचा ने अपनी उच्च शिक्षा कहां से पूरी की है?
उन्होंने अपनी स्नातक की पढ़ाई हल्द्वानी से और स्नातकोत्तर की उपाधि उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय से हासिल की है।
वे किस तरह की कलाकृतियां और उत्पाद तैयार करती हैं?
वे ऐपण और मधुबनी शैलियों में फ्रेम, नेम प्लेट, की-रिंग, स्वास्तिक चिन्ह के साथ लक्ष्मी, सरस्वती, नवदुर्गा, गणेश चौकी और संस्कारों से जुड़े पारंपरिक पूजा उत्पाद बनाती हैं।
बागेश्वर में रहकर वे अपने उत्पादों की बिक्री कैसे करती हैं?
वे सोशल मीडिया और ऑनलाइन माध्यमों का उपयोग कर अपने हस्तशिल्प का प्रदर्शन करती हैं और दूर-दराज के ग्राहकों से ऑर्डर प्राप्त करती हैं।
रिचा के परिवार में कौन-कौन हैं और वे क्या करते हैं?
उनके पिता मोहन चंद्र जोशी सरस्वती मंदिर गरुड़ विद्यालय में कार्यरत हैं, मां निर्मला जोशी गृहिणी हैं और उनके भाई शुभम जोशी सेना में लेफ्टिनेंट हैं।
युवाओं और महिलाओं के हुनर को लेकर रिचा का क्या विचार है?
उनका मानना है कि हुनर को सिर्फ शौक तक सीमित न रखकर उसे व्यवसाय का रूप देना चाहिए ताकि आत्मनिर्भर बना जा सके।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 4

Arjun Mehta@arjun-mehta·12 मिनट पहले

पहाड़ के युवाओं के लिए पढ़ाई के साथ स्वरोजगार का ऐसा मॉडल देखना वाकई शानदार है।

Ravikash Gupta@ravikash·12 मिनट पहले

अ अर्जुन जी, बिल्कुल सही कहा आपने। पिछली बार जब मैं बागेश्वर गया था, वहाँ के युवाओं को ऐसे ही छोटे स्टार्टअप शुरू करते देख बड़ा सुकून मिला था।

Rohan Verma@rohan-verma·37 मिनट पहले

प्रतियोगियों के बीच ऐसे हुनरमंद लोग सच में कमाल करते हैं।

Karan Malhotra@karan-malhotra·36 मिनट पहले

रोहन भाई, सही कहा आपने। मैं पिछले साल जब बागेश्वर गया था, तो वहाँ ऐसी ही एक लड़की को हाथ से ऐपण बनाते देखा था, गजब की मेहनत होती है उसमें।

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp