राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में जंतर-मंतर पर आयोजित विरोध प्रदर्शन को लेकर सुरक्षा व्यवस्था अभूतपूर्व स्तर पर बढ़ा दी गई है। कानून-व्यवस्था बनाए रखने और अनहोनी की आशंकाओं को टालने के लिए पुलिस प्रशासन ने राजधानी और आसपास के इलाकों में बड़े पैमाने पर एहतियाती कदम उठाए हैं। प्रदर्शन में शामिल होने पहुंचे कई राजनीतिक दलों के नेताओं, नागरिक समाज के प्रतिनिधियों और कार्यकर्ताओं को अलग-अलग इलाकों से हिरासत में ले लिया गया। सुरक्षा बलों की इस मुस्तैदी के बीच नई दिल्ली के संवेदनशील इलाकों में कड़ी निगरानी रखी जा रही है, जबकि सीमावर्ती इलाकों में सघन चेकिंग अभियान जारी है।
विपक्षी नेताओं और कार्यकर्ताओं की धरपकड़
प्रदर्शन के आह्वान के बीच विभिन्न राजनीतिक संगठनों और विपक्षी दलों के नेताओं के खिलाफ व्यापक कार्रवाई की गई। साउथ एवेन्यू से तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी, डेरेक ओ’ब्रायन, डोला सेन और पार्टी के कई अन्य प्रमुख नेताओं को पुलिस ने अपनी हिरासत में ले लिया। इसके साथ ही दिल्ली सरकार के मंत्री और AAP नेता गोपाल राय को भी हिरासत में लेकर पुलिस पूर्वी दिल्ली की ओर रवाना हो गई। उनके साथ विधायक वीर सिंह धींगान तथा अन्य कार्यकर्ता भी मौजूद थे। हिरासत में लिए जाने के दौरान गोपाल राय ने कड़ा रुख अपनाते हुए ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की और कहा कि प्रशासन चाहे जितनी भी पाबंदियां लगा ले, जनता अपने अधिकारों के लिए एकजुट हो रही है।
इसके अलावा पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के आवास के बाहर एकत्रित हुए कार्यकर्ताओं को भी पुलिस ने हिरासत में ले लिया। विरोध प्रदर्शन के समर्थन में वकीलों का एक समूह भी सड़कों पर उतरा, जिन्होंने ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। पुलिस ने कई वकीलों को भी हिरासत में लेकर पूर्वी दिल्ली के डिटेंशन सेंटरों में भेजा।
हवाई अड्डे और आवासों से सीजेपी नेतृत्व की हिरासत
कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के शीर्ष नेताओं के खिलाफ भी पुलिस ने सख्त रुख अपनाया। मुंबई से दिल्ली पहुंचे पार्टी नेता अभिजीत दिपके, सौरव दास और आशुतोष रांका को विमान के आईजीआई एयरपोर्ट पर उतरते ही हिरासत में ले लिया गया। पुलिस टीम सीधे विमान के अंदर पहुंची और तीनों नेताओं को अपने साथ ले गई। हिरासत के दौरान अभिजीत दिपके ने पुलिसकर्मियों से अपना सामान लेने का अनुरोध किया। इससे पूर्व मुंबई से प्रस्थान करते समय अभिजीत दिपके ने बयान दिया था कि वे स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव तथा लोकतंत्र की रक्षा के संघर्ष से पीछे नहीं हटेंगे, भले ही प्रशासन उन पर यूएपीए या एनएसए जैसी धाराएं लगा दे।
सीजेपी ने हवाई अड्डे पर की गई इस कार्रवाई को पूर्व-नियोजित और तानाशाही कदम बताते हुए इसकी कड़ी निंदा की। पार्टी ने इसे नागरिकों की आवाजाही की स्वतंत्रता का उल्लंघन करार दिया और तीनों नेताओं की तत्काल तथा बिना शर्त रिहाई की मांग की। शीर्ष नेताओं की हिरासत के बाद जंतर-मंतर पर मोर्चे की कमान पार्टी के संगठन प्रभारी अजिंक्या शिंदे को सौंपी गई। उधर गुरुग्राम के सेक्टर-56 स्थित केंद्रीय विहार से यूट्यूबर ध्रुव राठी को उनके आवास से सुबह करीब 7 बजकर 48 मिनट पर हिरासत में लिया गया। इस कार्रवाई में लगभग 50 पुलिसकर्मी शामिल रहे। इसके साथ ही सीजेपी की लीगल हेड रतना सिंह को भी उनके आवास से पुलिस ने डिटेन किया।
नागरिक समाज का मार्च और कनॉट प्लेस में झड़प
जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन के समर्थन में नागरिक समाज के कई प्रमुख चेहरों ने दिल्ली हाट से जंतर-मंतर की दिशा में एक एकजुटता मार्च निकाला। इस पैदल मार्च में नेहा बोरा, दीपांकर भट्टाचार्य और प्रशांत भूषण सहित बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। इस दौरान प्रतिभागियों ने लोकतांत्रिक अधिकारों के समर्थन में अपनी आवाज बुलंद की। हालांकि बाद में नेहा बोरा समेत कई अन्य आंदोलनकारियों को भी पुलिस द्वारा हिरासत में ले लिया गया।
कनॉट प्लेस इलाके में न्यूज एजेंसी पीटीआई की इमारत के समीप प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाबलों के बीच तनाव बढ़ गया, जहां पथराव की घटना सामने आई। इस झड़प में पुलिस का एक जवान घायल हो गया। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए आसपास के क्षेत्रों में अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किया गया।
राजधानी में सुरक्षा चक्र और 20 डिटेंशन जोन
दिल्ली पुलिस ने पूरी नई दिल्ली को 20 अलग-अलग जोन में विभाजित कर व्यापक सुरक्षा खाका तैयार किया है। संभावित अव्यवस्था से निपटने के लिए राजधानी के सभी स्टेडियमों को अस्थायी डिटेंशन सेंटरों में तब्दील कर दिया गया है, जहां प्रत्येक जोन के लिए एक समर्पित केंद्र बनाया गया है। पुलिस द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार विभिन्न स्थानों से लगभग 500 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया है, जबकि कानून-व्यवस्था में व्यवधान की आशंका के चलते आपराधिक पृष्ठभूमि वाले करीब 50 संदिग्ध व्यक्तियों को भी पकड़ा गया है।
संवेदनशील गोलचक्करों और प्रमुख स्थलों, विशेष रूप से ले मेरिडियन होटल के आसपास दिल्ली पुलिस, रैपिड एक्शन फोर्स (आरएएफ), केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) और पिंक फोर्स की संयुक्त टुकड़ियां तैनात की गई हैं। भीड़ की आवाजाही पर नजर रखने के लिए आसमान से ड्रोन कैमरों के जरिए निगरानी की जा रही है। स्पेशल सेल के डीसीपी नर्रा चैतन्य ने बताया कि इंडिया गेट और आसपास के क्षेत्रों में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 163 लागू कर दी गई है और वहां स्थिति शांतिपूर्ण एवं नियंत्रण में है। उन्होंने जनता से प्रतिबंधित क्षेत्रों में एकत्र न होने का अनुरोध किया।
सीमाओं पर कड़ी निगरानी और जनजीवन की स्थिति
दिल्ली और उत्तर प्रदेश की सीमाओं पर वाहनों की सघन तलाशी ली जा रही है। संदिग्ध व्यक्तियों से पूछताछ के बाद ही उन्हें राजधानी में प्रवेश की अनुमति मिल रही है। सुरक्षा इंतजामों की समीक्षा करने के लिए स्पेशल सीपी कानून एवं व्यवस्था (जोन-1) देवेश चंद्र श्रीवास्तव स्वयं बॉर्डर पर पहुंचे। उनके साथ संयुक्त पुलिस आयुक्त मिलिंद महादेव डुंबरे और पूर्वी जिले के पुलिस उपायुक्त राजीव कुमार सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
दूसरी ओर, सुबह के तनाव के बाद व्यापारिक क्षेत्रों में धीरे-धीरे सामान्य स्थिति लौटती दिखी। कश्मीरी गेट और खारी बावली जैसे प्रमुख थोक बाजारों में दुकानें खुल गईं और व्यापारिक गतिविधियां शुरू हो गईं।
रेलवे सेवाएं प्रभावित, 75 ट्रेनें निरस्त
सुरक्षा स्थिति और रैक की अनुपलब्धता के कारण रेल यातायात पर गंभीर असर पड़ा। उत्तर रेलवे के अनुसार कुल 75 मेल और एक्सप्रेस ट्रेनें रद्द की गईं। इनमें लगभग 40 ट्रेनें वे थीं जिन्हें अपने गंतव्य से वापस लौटना था, जबकि 35 ट्रेनें इसलिए रद्द करनी पड़ीं क्योंकि दिल्ली पहुंचने वाली गाड़ियों के रुक जाने से उनके डिब्बे समय पर उपलब्ध नहीं हो सके। लखनऊ से दिल्ली जाने वाली तेजस एक्सप्रेस सहित दोपहर 2:00 बजे तक की सभी ट्रेनें निरस्त कर दी गईं, जिससे लखनऊ के चारबाग रेलवे स्टेशन पर सन्नाटा छा गया। हालांकि बाद में रेलवे प्रशासन ने बिहार, पश्चिम बंगाल और अन्य राज्यों के लिए परिचालन को पुनः सुचारु करने की कवायद शुरू की।
राजनीतिक बयानबाजी और प्रतिक्रिया
इस पूरे घटनाक्रम पर भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता और सांसद संबित पात्रा ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि जंतर-मंतर पर कुछ तत्वों द्वारा अशांति फैलाने की कोशिश की गई, लेकिन देश सुशासन के मार्ग पर आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय राजधानी को बंधक बनाने और हिंसा भड़काने का प्रयास विफल रहा और लोकतंत्र ने भीड़तंत्र पर विजय प्राप्त की है।























