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बिहार की झुलसाती गर्मी में ट्रांसफार्मर बने नई चुनौती, बिजली विभाग ने पानी का छिड़काव कर शुरू की दिन-रात की निगरानीबिहार
16 जून 2026, 12:38 pm (88 दिन पहले)· 2

बिहार की झुलसाती गर्मी में ट्रांसफार्मर बने नई चुनौती, बिजली विभाग ने पानी का छिड़काव कर शुरू की दिन-रात की निगरानी

भोजपुर समेत पूरे बिहार में पारा 42 से 45 डिग्री सेल्सियस के बीच बने रहने से बिजली की खपत रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है, जिससे ट्रांसफार्मरों पर भारी दबाव है। विभाग अब इन्हें ओवरहीटिंग से बचाने के लिए पानी का छिड़काव और लगातार जांच का विशेष अभियान चला रहा है।

इस बार की गर्मी भोजपुर समेत पूरे बिहार के लोगों के साथ-साथ राज्य की बिजली व्यवस्था की भी परीक्षा ले रही है। पारा लगातार 42 से 45 डिग्री सेल्सियस के बीच टिका हुआ है और इस तपिश से राहत पाने के लिए घर-घर में एसी, कूलर, फ्रिज और पंखे पहले से कहीं ज्यादा चल रहे हैं। नतीजा यह है कि बिजली की मांग रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गई है और इस बढ़े हुए लोड की सबसे बड़ी मार ट्रांसफार्मरों पर पड़ रही है।

कई इलाकों में ट्रांसफार्मरों का तापमान सामान्य दिनों के मुकाबले काफी ऊंचा दर्ज किया जा रहा है। ऐसे में अगर समय रहते इन पर नजर न रखी जाए तो ओवरहीटिंग की वजह से तकनीकी गड़बड़ी या ट्रांसफार्मर के जल जाने जैसी घटनाएं हो सकती हैं। इसी आशंका को देखते हुए बिजली विभाग ने इन्हें सुरक्षित रखने के लिए एक विशेष अभियान छेड़ दिया है।

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आदमी को लू, मशीन को 'हीट स्ट्रोक'

जैसे तेज गर्मी में इंसान को लू लगने का खतरा रहता है, ठीक वैसे ही अत्यधिक तापमान और बढ़े हुए लोड के बीच ट्रांसफार्मर भी गर्मी की चपेट में आ जाते हैं। इसी को ध्यान में रखकर विभाग के कर्मचारी ट्रांसफार्मरों की नियमित जांच में जुटे हैं। कई जगहों पर इनके बाहरी हिस्से पर पानी का छिड़काव किया जा रहा है ताकि तापमान काबू में रहे। साथ ही ट्रांसफार्मर में तेल का स्तर, वायरिंग और बिजली लोड भी लगातार जांचा जा रहा है।

तपती दोपहरी में पोल पर चढ़ते कर्मचारी

बिजली विभाग के मुताबिक उसके कर्मचारी सड़कों, गलियों और गांवों में लगे ट्रांसफार्मरों की निगरानी में लगे हुए हैं। कई बार उन्हें 44 से 45 डिग्री तापमान में भी पोल पर चढ़कर या ट्रांसफार्मर के पास खड़े होकर तकनीकी जांच करनी पड़ती है। विभाग का कहना है कि किसी भी संभावित खराबी की सूचना मिलते ही टीम फौरन मौके पर पहुंच जाती है, ताकि बिजली आपूर्ति बाधित न हो।

गांवों तक पहुंची एसी-कूलर की मांग

विशेषज्ञों का मानना है कि पिछले कुछ वर्षों में बिजली खपत का स्वरूप तेजी से बदला है। पहले एसी और कूलर का इस्तेमाल ज्यादातर शहरों तक सीमित था, लेकिन अब ग्रामीण इलाकों में भी बिजली की मांग लगातार बढ़ रही है। भोजपुर जिले में इस बार गर्मी के साथ बिजली खपत में भी उल्लेखनीय इजाफा दर्ज किया गया है, और यही वजह है कि ट्रांसफार्मरों और फीडरों पर अतिरिक्त दबाव साफ दिख रहा है।

उपभोक्ताओं से सहयोग की अपील

विभाग ने लोगों से इस संकट में हाथ बंटाने की अपील की है। अधिकारियों का कहना है कि जरूरत न होने पर बिजली उपकरण बंद रखें, खराब या पुरानी वायरिंग वाले उपकरण इस्तेमाल न करें और एक साथ ज्यादा बिजली खींचने वाले उपकरण चलाने से बचें। इससे एक ओर बिजली बिल कम होगा तो दूसरी ओर पूरी व्यवस्था पर पड़ने वाला बोझ भी हल्का होगा।

विभाग का दावा है कि इस झुलसाती गर्मी में जो लोग निर्बाध बिजली का सुख भोग रहे हैं, उसके पीछे बिजली कर्मियों की अनवरत मेहनत छिपी है। तपती सड़कों, गर्म हवाओं और ऊंचे पारे के बीच ये कर्मचारी ट्रांसफार्मरों की चौकसी कर रहे हैं। कहा जा सकता है कि इस बार गर्मी से लड़ाई सिर्फ आम लोगों की नहीं, बल्कि ट्रांसफार्मरों और उन्हें सलामत रखने में जुटे बिजली कर्मियों की भी है।

सवाल-जवाब

बिहार में इस समय तापमान कितना है और इसका बिजली पर क्या असर है?
तापमान लगातार 42 से 45 डिग्री सेल्सियस के बीच बना हुआ है, जिससे एसी, कूलर और पंखों की खपत बढ़कर रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गई है और ट्रांसफार्मरों पर भारी दबाव पड़ रहा है।
बिजली विभाग ट्रांसफार्मरों को गर्मी से बचाने के लिए क्या कर रहा है?
विभाग के कर्मचारी ट्रांसफार्मरों की नियमित जांच कर रहे हैं, कई जगहों पर उनके बाहरी हिस्से पर पानी का छिड़काव किया जा रहा है और तेल के स्तर, वायरिंग व बिजली लोड की लगातार निगरानी हो रही है।
क्या ओवरहीटिंग से ट्रांसफार्मर को नुकसान हो सकता है?
हां, अगर समय रहते निगरानी न हो तो अधिक तापमान और बढ़े लोड के कारण तकनीकी खराबी या ट्रांसफार्मर के जलने जैसी घटनाएं हो सकती हैं।
विभाग ने उपभोक्ताओं से क्या अपील की है?
अधिकारियों ने कहा है कि जरूरत न होने पर बिजली उपकरण बंद रखें, खराब या पुरानी वायरिंग वाले उपकरण इस्तेमाल न करें और एक साथ ज्यादा खपत वाले उपकरण चलाने से बचें।
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