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बिहार में बाढ़ का प्रकोप: सीएम सम्राट चौधरी ने वैशाली और सारण में संभाला मोर्चा, खुद परोसा खानाबिहार
7 सित॰ 2026, 11:06 pm (17 दिन पहले)· 2

बिहार में बाढ़ का प्रकोप: सीएम सम्राट चौधरी ने वैशाली और सारण में संभाला मोर्चा, खुद परोसा खाना

बिहार के कई जिलों में बाढ़ का गंभीर संकट पैदा हो गया है, जिससे लाखों लोग प्रभावित हैं। स्थिति का जायजा लेने के लिए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने वैशाली और सारण का दौरा किया और सामुदायिक रसोई में लोगों को खाना परोसा।

बिहार की राजधानी पटना समेत राज्य के कई हिस्सों में गंगा और उसकी सहायक नदियों का पानी फैलने से गंभीर बाढ़ की स्थिति उत्पन्न हो गई है। इस विकट हालात के बीच आम जनता को राहत पहुंचाने और किसी भी प्रकार की असुविधा से बचाने के लिए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सीधे तौर पर कमान संभाल ली है। इसी कड़ी में मुख्यमंत्री ने वैशाली और सारण जिलों का दौरा किया, जहां उन्होंने राहत शिविरों और सामुदायिक रसोई केंद्रों का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने वहां मौजूद बाढ़ पीड़ितों को अपने हाथों से भोजन परोसा और उनके साथ बैठकर खुद भी खाना खाया, ताकि राहत व्यवस्था की गुणवत्ता की प्रत्यक्ष जांच हो सके।

जिलाधिकारियों और पुलिस अधीक्षकों को कड़े निर्देश

दौरे के दौरान मुख्यमंत्री ने सभी बाढ़ प्रभावित जिलों के जिलाधिकारियों और पुलिस अधीक्षकों को स्पष्ट निर्देश दिए कि संकट में फंसे हर व्यक्ति तक समयबद्ध तरीके से सहायता पहुंचाई जानी चाहिए। प्रशासन को यह सुनिश्चित करने को कहा गया है कि राहत सामग्री और बुनियादी सुविधाओं के वितरण में किसी भी स्तर पर कोताही न बरती जाए। राज्य भर में इस समय कुल 226 सामुदायिक रसोई का संचालन किया जा रहा है, जिनके माध्यम से अब तक करीब 3.75 लाख लोगों को भोजन उपलब्ध कराया जा चुका है। इसके साथ ही, चार राहत शिविरों की स्थापना की गई है, जिनमें कुल 2,505 लोगों के रहने, खाने और चिकित्सीय देखरेख की मुकम्मल व्यवस्था की गई है।

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राष्ट्रीय और राज्य आपदा मोचन बल की तैनाती

आपदा से निपटने के लिए सरकारी स्तर पर युद्ध स्तर पर प्रयास जारी हैं। बाढ़ की मार झेल रहे परिवारों के बीच अब तक 81,100 पॉलीथिन शीट और 19 हजार सूखे राशन के पैकेट बांटे जा चुके हैं। जलमग्न इलाकों में सुगम आवागमन के लिए 1,602 नावें चलाई जा रही हैं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रभावित जिलों में राष्ट्रीय आपदा मोचन बल और राज्य आपदा मोचन बल की कुल 37 टीमों को तैनात किया गया है। सरकार का यह दावा है कि जलस्तर और मौसम की चाल पर पूरी नजर रखी जा रही है तथा आवश्यकता के अनुसार बचाव कार्यों में और तेजी लाई जा रही है।

प्रमुख नदियों के जलस्तर में स्थिरता

इस बीच बाढ़ के मोर्चे से कुछ राहत भरी खबरें भी सामने आने लगी हैं। कई प्रमुख नदियों का जलस्तर या तो स्थिर हो गया है या फिर उसमें गिरावट दर्ज की जाने लगी है। मुख्य रूप से गंगा, गंडक, कोसी और सोन नदी यानी इंद्रपुरी बराज के कई हिस्सों में पानी का स्तर थमने लगा है या तेजी से घट रहा है। आपदा प्रबंधन विभाग के अधिकारियों का इस संबंध में कहना है कि राहत और बचाव कार्यों को पूरी तत्परता के साथ आगे बढ़ाया जा रहा है। प्रभावित परिवारों को सुबह और शाम का पका हुआ भोजन, सूखा राशन और पॉलीथिन शीट लगातार बांटी जा रही है। आवागमन को आसान बनाने के लिए नावों की संख्या को भी बढ़ाया गया है।

गंडक, कोसी और सोन का डिस्चार्ज

आपदा प्रबंधन विभाग की ओर से साझा किए गए आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, वाल्मीकिनगर बराज के पास गंडक नदी का जलस्राव सोमवार की सुबह 10 बजे 1 लाख 21 हजार 500 क्यूसेक दर्ज किया गया और इसकी प्रवृत्ति स्थिर बनी हुई है। इसी प्रकार, वीरपुर बराज के निकट कोसी नदी का जलस्राव 1 लाख 98 हजार 150 क्यूसेक और इंद्रपुरी बराज के पास सोन नदी का जलस्राव 1 लाख 33 हजार 134 क्यूसेक रिकॉर्ड किया गया है, और इन दोनों नदियों के जलस्तर में कमी आने का रुख देखा जा रहा है।

खतरे के निशान से ऊपर बह रहीं नदियां

दूसरी तरफ, विभाग की रिपोर्ट बताती है कि कई नदियां अभी भी चेतावनी के स्तर को पार कर चुकी हैं। गंडक नदी डुमरिया घाट और हाजीपुर में, कोसी नदी बलतारा और कुरसैला में, बूढ़ी गंडक खगड़िया में, तथा गंगा नदी दीघा, हाथीदह, भागलपुर, कहलगांव, बक्सर और मुंगेर में खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। इसके अलावा पुनपुन नदी श्रीपालपुर में, बागमती बेनीबाद में और घाघरा नदी दरौली तथा गंगपुर में उफान पर है। इन नदियों के उफान पर होने के कारण राज्य के 13 जिले जिनमें पटना, भोजपुर, सारण, वैशाली, भागलपुर, बेगूसराय, बक्सर, समस्तीपुर, मुंगेर, कटिहार, लखीसराय, खगड़िया और अरवल शामिल हैं, उनके 74 प्रखंडों की 423 ग्राम पंचायतों की लगभग 27.01 लाख आबादी बाढ़ की चपेट में आ गई है।

मौसम विभाग का बारिश का पूर्वानुमान

बिहार मौसम सेवा केंद्र ने आने वाले दो दिनों के दौरान राज्य के कई हिस्सों में हल्की से मध्यम वर्षा और कुछ चुनिंदा स्थानों पर भारी बारिश की संभावना जताई है। आपदा प्रबंधन विभाग लगातार इस बदलती स्थिति की निगरानी कर रहा है। उधर, राजधानी पटना के दीघा इलाके की बिंद टोली में गंगा का पानी घरों में घुसने के कारण करीब 1500 परिवार बेघर हो गए हैं। अपना आशियाना गंवाने के बाद ये लोग जेपी गंगा पथ के किनारे टेंट और त्रिपाल लगाकर खुले आसमान के नीचे रहने को विवश हैं।

सवाल-जवाब

बिहार में बाढ़ से कितने लोग प्रभावित हुए हैं?
राज्य के 13 जिलों के 74 प्रखंडों के अंतर्गत लगभग 27.01 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित हुए हैं।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने किन जिलों का दौरा किया?
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बाढ़ की स्थिति का जायजा लेने के लिए वैशाली और सारण जिलों का दौरा किया।
राज्य में कितनी सामुदायिक रसोई चलाई जा रही हैं?
बिहार में वर्तमान में बाढ़ पीड़ितों के लिए कुल 226 सामुदायिक रसोई संचालित की जा रही हैं।
कितनी एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें तैनात हैं?
बाढ़ प्रभावित जिलों में एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की कुल 37 टीमें तैनात की गई हैं।
पटना के किस इलाके में लोग बेघर हुए हैं?
पटना के दीघा स्थित बिंद टोली में गंगा का पानी घुसने के कारण करीब 1500 परिवार बेघर होकर जेपी गंगा पथ के किनारे रहने को मजबूर हैं।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Nyra Kaif@nyra-kaif·17 दिन पहले

बिहार की बाढ़ पर यह रिपोर्ट प्रशासनिक तत्परता और आंकड़ों को तो सामने रखती है, लेकिन जमीनी संकट के बीच मानसिक स्वास्थ्य और विस्थापित परिवारों, खासकर महिलाओं व बच्चों के संघर्षों पर और गहराई से ध्यान देने की जरूरत है। राहत शिविरों में भोजन और पानी के साथ-साथ मनोवैज्ञानिक सहायता भी भविष्य की आपदा प्रबंधन नीति का अहम हिस्सा बननी चाहिए।

Arjun Mehta@arjun-mehta·17 दिन पहले

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का वैशाली और सारण का दौरा और राहत शिविरों में खुद भोजन परोसना केवल आपदा प्रबंधन का हिस्सा नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर प्रशासनिक सुस्ती को तोड़ने का एक राजनीतिक संदेश भी है। 37 एनडीआरएफ-एसडीआरएफ टीमों की तैनाती और 226 सामुदायिक रसोई के संचालन से यह स्पष्ट है कि सरकार इस संकट से निपटने के लिए संसाधनों का पूरा झोंक रही है। हालांकि, नदियों के जलस्तर में स्थिरता राहत जरूर दे रही है, लेकिन पुनर्वास और जलजनित बीमारियों से निपटना आने वाले दिनों में प्रशासन के लिए सबसे बड़ी चुनौती होगी।

Ravikash Gupta@ravikash·17 दिन पहले

यह आपदा प्रबंधन केवल तात्कालिक राहत तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा असर राज्य की ग्रामीण अर्थव्यवस्था, कृषि और आपूर्ति श्रृंखला पर पड़ेगा। जब तक बुनियादी ढांचे की मरम्मत और जलजनित बीमारियों की रोकथाम पर वित्तीय संसाधन तेजी से खर्च नहीं किए जाते, तब तक बाजार और जनजीवन की रिकवरी धीमी रहेगी।

Karan Malhotra@karan-malhotra·17 दिन पहले

यह संकट केवल जलभराव तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके बाद उत्पन्न होने वाली कानून-व्यवस्था की चुनौतियाँ और राहत सामग्री की कालाबाजारी रोकना प्रशासनिक तंत्र की असल परीक्षा होगी। 226 सामुदायिक रसोई और 37 एनडीआरएफ-एसडीआरएफ टीमों की तैनाती जरूर की गई है, लेकिन यह देखना होगा कि क्या जिला प्रशासन और पुलिस अधीक्षक सुदूर ग्रामीण इलाकों तक भ्रष्टाचार मुक्त और पारदर्शी वितरण सुनिश्चित कर पाते हैं।

Rohan Verma@rohan-verma·17 दिन पहले

यह संकट केवल जलभराव तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके बाद उत्पन्न होने वाली कानून-व्यवस्था की चुनौतियाँ और राहत सामग्री की कालाबाजारी रोकना प्रशासनिक तंत्र की असल परीक्षा होगी। 226 सामुदायिक रसोई और 37 एनडीआरएफ-एसडीआरएफ टीमों की तैनाती जरूर की गई है, लेकिन यह देखना होगा कि क्या जिला प्रशासन और पुलिस अधीक्षक सुदूर ग्रामीण इलाकों तक भ्रष्टाचार मुक्त और पारदर्शी वितरण सुनिश्चित कर पाते हैं। इसके साथ ही, नदियों के जलस्तर में ठहराવ के बीच अब महामारी से बचाव और जलजनित रोगों पर नियंत्रण रखना स्वास्थ्य विभाग के लिए सबसे बड़ी चुनौती होगी।

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