पीतल नगरी में खास मसालों और मक्खन के साथ परोसी जाती है मुरादाबादी मूंग दालतुला राशिफल 25 सितंबर 2026: राहु और मंगल के प्रभाव से करियर में आएगी गति, वित्तीय संतुलन और रिश्तों पर दें ध्यानशी जिनपिंग के स्वागत में व्हाइट हाउस का शाही मेन्यू, फ्रेंच स्वाद के साथ परोसे गए खास व्यंजनराजस्थान के तीन बड़े शहरों में महापौर चुनने की जंग, जयपुर में भाजपा और कांग्रेस आमने-सामनेकश्मीरी गेट के पास ई-रिक्शा रोककर लूटपाट, चाकू के वार से युवक की जान गई और दो जख्मीछत और बालकनी पर सब्जियां उगाते समय न करें केमिकल का छिड़काव, पूसा विशेषज्ञ ने सुझाए जैविक खाद के आसान उपायवृश्चिक राशिफल 25 सितंबर 2026: 12वें भाव में शुक्र जगाएगा सुख-सुविधाओं की चाहत, बजट और सेहत का रखें ध्यानपंडित दीनदयाल उपाध्याय की जयंती पर योगी आदित्यनाथ ने दी श्रद्धांजलि, अंत्योदय और एकात्म मानववाद के विचार को किया यादजीनियस एक्ट के तहत स्टेबलकॉइन के सख्त नियमों पर फेडरल रिजर्व ने मांगी जनता से रायदैनिक राशिफल 25 सितंबर 2026: कुंभ में चंद्रमा और राहु की युति से ग्रहण योग, जानें सभी 12 राशियों का हाल
बीकानेर के सती माता मंदिर में अनोखा शृंगार, फूलों की जगह 50 लाख रुपये के असली नोटों से सजाया गया दरबारराजस्थान
12 सित॰ 2026, 11:59 am (13 दिन पहले)· 3

बीकानेर के सती माता मंदिर में अनोखा शृंगार, फूलों की जगह 50 लाख रुपये के असली नोटों से सजाया गया दरबार

बीकानेर के ऐतिहासिक सती माता मंदिर में भाद्रपद अमावस्या के अवसर पर फूलों की जगह लगभग 50 लाख रुपये के असली नोटों से भव्य सजावट की गई है, जो श्रद्धालुओं के बीच आकर्षण का केंद्र बनी हुई है।

राजस्थान के बीकानेर शहर से आस्था और भव्यता की एक बेहद अनोखी और अद्भुत तस्वीर सामने आई है। यहाँ नत्थूसर गेट के बाहर हांडी-कुंडी क्षेत्र में स्थित प्रसिद्ध सती माता मंदिर को इस बार फूलों की जगह असली नोटों की गड्डियों से सजाया गया है। मां सती माता भक्त मंडल के सदस्यों द्वारा किए गए इस भव्य शृंगार में लगभग 50 लाख रुपये के असली नोटों का इस्तेमाल किया गया है। मंदिर के गर्भगृह से लेकर पूरे दरबार तक फैली इस सजावट को देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुँच रहे हैं। आयोजन से जुड़े लोगों का कहना है कि बीकानेर के इतिहास में यह पहला मौका है जब किसी मंदिर के शृंगार में इतनी बड़ी मात्रा में असली नकदी का इस्तेमाल किया गया है, जो इस समय पूरे क्षेत्र में आकर्षण का बहुत बड़ा केंद्र बना हुआ है।

गर गोत्र का पवित्र इतिहास और अग्रवाल समाज की मान्यताएँ

सती माता मंदिर की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और धार्मिक महत्व के बारे में जानकारी देते हुए मंदिर समिति के मनीष कुमार अग्रवाल ने बताया कि यह पवित्र स्थान मुख्य रूप से अग्रवाल समाज के गर गोत्र के लोगों की कुलदेवी का मंदिर है। सनातन परंपरा और सामाजिक संरचना के अनुसार अग्रवाल समाज में कुल 18 गोत्र माने जाते हैं। इन सभी गोत्रों में से गर गोत्र के परिवारों को विशेष रूप से चौधरी की सम्मानजनक उपाधि दी गई है। समाज के बुजुर्गों और इतिहास के जानकारों की ऐसी मान्यता है कि इसी पावन स्थल पर एक माता अपने पुत्र की मृत्यु के पश्चात उनके पीछे सती हो गई थीं। इस ऐतिहासिक घटना के बाद से ही यह स्थान समूचे अग्रवाल समाज और विशेष रूप से गर गोत्र के लोगों की गहरी श्रद्धा और अटूट आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। यहाँ हर साल विशाल धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है, जिसमें देश-विदेश से समाज के लोग एकत्रित होते हैं।

ये भी पढ़ें

भाद्रपद अमावस्या पर पारंपरिक धार्मिक अनुष्ठान

भाद्रपद अमावस्या के पवित्र अवसर पर इस मंदिर परिसर में दो दिवसीय भव्य धार्मिक महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है। इस महोत्सव के दौरान वर्षों से चली आ रही पारंपरिक रीतियों का पूरी श्रद्धा के साथ पालन किया जाता है। परंपरा के अनुसार, उत्सव के दिन गर गोत्र के सभी परिवारों के लोग सुबह बहुत जल्दी उठते हैं और पूरी शुद्धता के साथ अपने घरों में विशेष प्रसाद तैयार करते हैं। इस पारंपरिक प्रसाद में मुख्य रूप से लापसी, मालपुआ, केसर पेड़ा और अन्य स्वादिष्ट मीठे व्यंजन शामिल होते हैं। इसके बाद परिवार के सभी सदस्य ताजे मौसमी फलों को लेकर अपने घरों से नंगे पैर पैदल यात्रा करते हुए मंदिर पहुँचते हैं। मंदिर प्रांगण में पहुँचकर सभी श्रद्धालु पूरे विधि-विधान और मंत्रोच्चार के साथ मां सती की विशेष पूजा-अर्चना करते हैं और सामूहिक रूप से आयोजित होने वाली महाआरती में सम्मिलित होकर सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। इस उत्सव को लेकर महिलाओं और युवाओं में विशेष उत्साह देखा जा रहा है।

नए नोटों की गड्डियों से कलात्मक और भव्य शृंगार

इस वर्ष मां सती माता भक्त मंडल के उत्साही सदस्यों ने मंदिर की सजावट को एक बिल्कुल नया और अनूठा रूप देने का संकल्प लिया था। इस कलात्मक शृंगार में विभिन्न मूल्य वर्ग के असली नोटों का उपयोग बेहद खूबसूरती के साथ किया गया है। मंदिर की दीवारों, स्तंभों और माता के सिंहासन के चारों ओर एक रुपये, दो रुपये, पांच रुपये, दस रुपये, पचास रुपये, सौ रुपये, दो सौ रुपये और पांच सौ रुपये के नोटों की नई गड्डियों को कलात्मक ढंग से सजाया गया है। इस सजावट में प्रयुक्त अधिकांश नोट सीधे बैंकों से जारी की गई एकदम नई और फ्रेश गड्डियों के रूप में हैं। अलग-अलग रंगों के इन नए नोटों को मिलाकर ऐसी सुंदर आकृतियाँ और डिजाइन तैयार किए गए हैं कि देखने वाले दंग रह जा रहे हैं। दर्शन के लिए मंदिर पहुँचने वाले श्रद्धालु इस अभूतपूर्व दृश्य को देखकर आश्चर्यचकित हैं और इस अद्भुत शृंगार को अपने मोबाइल फोन के कैमरों में सहेजने से खुद को रोक नहीं पा रहे हैं।

भक्तों का आपसी सहयोग और सुरक्षा के विशेष प्रबंध

मनीष कुमार अग्रवाल ने इस विशेष सजावट के पीछे की कहानी साझा करते हुए बताया कि भक्त मंडल के सदस्य पिछले दो से तीन वर्षों से माता के दरबार को नोटों से सजाने की योजना बना रहे थे। सामान्य तौर पर हर साल मंदिर के विशेष शृंगार और सजावट के लिए जयपुर और पुष्कर जैसे शहरों से विशेष रूप से ताजे फूलों को मँगाया जाता था। लेकिन इस वर्ष कुछ नया और ऐतिहासिक करने के उद्देश्य से सभी सदस्यों ने सर्वसम्मति से असली नोटों से शृंगार करने का निर्णय लिया। इस अनूठे कार्य के लिए आवश्यक पूरी राशि किसी एक व्यक्ति द्वारा नहीं, बल्कि भक्त मंडल के सदस्यों और श्रद्धालुओं द्वारा आपसी सहयोग के माध्यम से जुटाई गई है। जिन भक्तों ने भी इस पावन कार्य के लिए नोटों की गड्डियां दी हैं, उन्हें यह पूरी राशि धार्मिक कार्यक्रम के विधिवत संपन्न होने के बाद सुरक्षित रूप से वापस सौंप दी जाएगी। मंदिर परिसर में इतनी बड़ी मात्रा में नकदी की मौजूदगी को ध्यान में रखते हुए सुरक्षा के अत्यंत कड़े और पुख्ता इंतजाम किए गए हैं ताकि किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना को रोका जा सके।

सवाल-जवाब

सती माता मंदिर कहाँ स्थित है?
यह मंदिर राजस्थान के बीकानेर शहर में नत्थूसर गेट के बाहर हांडी-कुंडी क्षेत्र में स्थित है।
इस बार मंदिर की सजावट में कुल कितने रुपये के नोटों का उपयोग किया गया है?
मंदिर के भव्य शृंगार में लगभग 50 लाख रुपये के असली नोटों का उपयोग किया गया है।
सजावट के लिए इस्तेमाल किए गए नोट किस मूल्य वर्ग के हैं?
सजावट में एक, दो, पांच, दस, पचास, सौ, दो सौ और पांच सौ रुपये के नए और फ्रेश नोटों की गड्डियों का उपयोग किया गया है।
सजावट के लिए यह राशि कहाँ से एकत्रित की गई थी?
यह राशि मां सती माता भक्त मंडल के सदस्यों और श्रद्धालुओं द्वारा आपसी सहयोग के रूप में एकत्रित की गई है, जिसे कार्यक्रम के बाद वापस कर दिया जाएगा।
अग्रवाल समाज के गर गोत्र का इस मंदिर से क्या संबंध है?
सती माता मंदिर मुख्य रूप से अग्रवाल समाज के गर गोत्र की कुलदेवी का पवित्र स्थान है, जिन्हें चौधरी की उपाधि प्राप्त है।
मंदिर में भाद्रपद अमावस्या पर कौन से पारंपरिक व्यंजन प्रसाद के रूप में चढ़ाए जाते हैं?
इस अवसर पर श्रद्धालु अपने घरों में लापसी, मालपुआ और केसर पेड़ा जैसी पारंपरिक मिठाइयाँ तैयार करके माता को अर्पित करते हैं।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp