राजस्थान के खैरथल-तिजारा में साइबर ठगी की जांच के दौरान बड़ा हादसा, पुलिस की मौजूदगी में युवक ने लगाया फंदाउत्तर प्रदेश विधान परिषद चुनाव 2026: भाजपा ने बनाई बढ़त, सपा ने दी कड़ी टक्कर; सीएम योगी आदित्यनाथ ने दी बधाईपारे की सतह पर सोना बनाने का दावा, राजस्थान के वैज्ञानिक लाल बहादुर के प्रयोग की शुरू हुई वैज्ञानिक जांचफरीदाबाद में फर्जी जॉब ऑफर के ज़रिए 89750 रुपये की साइबर ठगी, गाजियाबाद के 3 आरोपी गिरफ्तारराजस्थान के डीग में पंचायत चुनाव के दौरान भड़की हिंसा, सरपंच प्रत्याशियों के गुटों में पथराव से कई घायलयूडीपी से पाला बदलकर एनपीपी में शामिल हुए दो विधायक, मेघालय में बदला राजनीतिक गणित500 करोड़ के ऑडियो क्लिप मामले पर बोले मनोज जरांगे, जांच न होने पर 29 तारीख को दी सीधे टकराव की चेतावनीइलाहाबाद हाई कोर्ट दो पैन कार्ड मामले में आजम खान और अब्दुल्ला आजम पर आदेश सुरक्षित करने के बाद निर्णय देगा29 अक्टूबर को चंद्रमा का मिथुन राशि में प्रवेश, इन 7 राशियों के खुलेंगे उन्नति के द्वारमैनपुरी विधानसभा सीट का तीन दशक का इतिहास और 2027 के भावी सियासी समीकरण
बंगाल की खाड़ी से आ रहे तूफान से पहले दक्षिण भारत में तबाही, तमिलनाडु के नीलगिरि में कटा संपर्कभारत
26 अक्तू॰ 2026, 1:39 pm (3 दिन पहले)· 0

बंगाल की खाड़ी से आ रहे तूफान से पहले दक्षिण भारत में तबाही, तमिलनाडु के नीलगिरि में कटा संपर्क

बंगाल की खाड़ी में चक्रवाती तूफान की दस्तक से पहले तमिलनाडु के नीलगिरि जिले में भारी बारिश ने विकराल रूप ले लिया है। मोयार नदी में बाढ़ आने से एक गांव का संपर्क कट गया है और भूस्खलन से यातायात पूरी तरह प्रभावित हुआ है।

दक्षिण भारत के तमिलनाडु में मौसम का मिजाज पूरी तरह बिगड़ चुका है और बंगाल की खाड़ी से उठ रहे चक्रवाती तूफान के पहुंचने से पहले ही भारी वर्षा ने हाहाकार मचा दिया है। नीलगिरि जिले में लगातार हो रही बारिश के कारण मोयार नदी उफान पर आ गई है। सोमवार 26 अक्टूबर 22 को बाढ़ आने के बाद तेंगुमारहाडा गांव का बाहरी इलाकों से संपर्क पूरी तरह टूट गया है। नदी का जलस्तर खतरे के निशान को पार कर चुका है, जिसके चलते वहां रहने वाले लोगों की आवाजाही पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। इस गंभीर स्थिति के कारण गांव के भीतर भोजन, जरूरी दवाइयों और अन्य जीवनोपयोगी वस्तुओं की आपूर्ति को लेकर स्थानीय निवासियों की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। इसके साथ ही कई जगहों पर हुए भूस्खलन ने हालात को और अधिक डरावना बना दिया है।

घने जंगलों के बीच फंसा तेंगुमारहाडा गांव

भौगोलिक स्थिति के अनुसार कोटागिरी तालुक के अंतर्गत आने वाला यह दूरदराज का तेंगुमारहाडा गांव घने जंगलों के बीच बसा हुआ है और यह सत्यमंगलम तथा मुदुमलाई बाघ अभयारण्यों के बिल्कुल करीब स्थित है। यहां के स्थानीय निवासियों को अपनी रोजमर्रा की जरूरतों और आवश्यक सेवाओं को पाने के लिए अमूमन नदी पार करके ही बाहर आना-जाना पड़ता है। बीते कुछ दिनों से लगातार बरस रहे बादलों के कारण इस पूरे इलाके में मोयार नदी का जलस्तर तेजी से ऊपर उठ गया है। सोमवार के दिन इस नदी में मटमैले और लाल रंग के पानी का बहुत तेज बहाव साफ तौर पर देखा गया। ऐसी खतरनाक परिस्थितियों में इस जानलेवा पानी को पार करना किसी खतरे से खाली नहीं है, इसलिए सुरक्षा के पुख्ता इंतजामों के तहत नदी के रास्ते होने वाले सभी प्रकार के आवागमन को रोक दिया गया है।

ये भी पढ़ें

पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन का तांडव

इस बीच पूरे पहाड़ी जिले में पिछले 24 घंटों के भीतर भूस्खलन की 60 से अधिक घटनाएं दर्ज की जा चुकी हैं। इन तमाम घटनाओं में मिट्टी के खिसकने की छोटी-मोटी वारदातों से लेकर बड़े पैमाने पर विशाल पहाड़ियों के दरक जाने जैसे खतरनाक हादसे भी शामिल हैं। इसी तरह की एक बड़ी भूस्खलन की घटना में शुक्रवार के दिन 51 साल के एक सरकारी बस ड्राइवर जनगराज की जान चली गई थी। वह मेट्टुपालयम-कुन्नूर पहाड़ी मार्ग पर परलियार के पास हुए भीषण लैंडस्लाइड की चपेट में आ गए थे। लगातार बरस रहे पानी के कारण पहाड़ों की ढलानें बेहद कमजोर और अस्थिर हो चुकी हैं, जिससे आने-जाने वाले लोगों के लिए हादसों का खतरा कई गुना बढ़ गया है।

रेलवे सेवाएं और यातायात पर पड़ा असर

पहाड़ों के दरकने और मलबे के ढलने की वजह से नीलगिरि माउंटेन रेलवे की आवाजाही पर भी इसका बुरा असर पड़ा है। रेलवे पटरियों के ऊपर भारी मात्रा में मलबा जमा हो जाने की वजह से कुन्नूर-मेट्टुपालयम रेल खंड पर ट्रेनों का संचालन फिलहाल अस्थायी तौर पर रोक दिया गया है। इसके अलावा मेट्टुपालयम-कुन्नूर मार्ग पर यातायात पूरी तरह बाधित होने की वजह से अब सभी वाहनों को वैकल्पिक रास्ते के रूप में कोटागिरी के माध्यम से भेजा जा रहा है। स्थानीय जिला प्रशासन और अग्निशमन एवं बचाव सेवा के तमाम कर्मचारी प्रभावित क्षेत्रों में मुस्तैदी के साथ राहत तथा बचाव अभियानों में जुटे हुए हैं। सड़कों पर फैले हुए मलबे और कीचड़ को हटाने का काम तेजी से किया जा रहा है। जिला कलेक्टर ने आम नागरिकों और पर्यटकों से साफ तौर पर यह अपील की है कि जब तक मौसम पूरी तरह सामान्य नहीं हो जाता, वे पहाड़ी सड़कों पर किसी भी तरह की फालतू यात्रा करने से बचें। किसी भी प्रकार की आपातकालीन सहायता की जरूरत पड़ने पर लोग जिला नियंत्रण कक्ष के अधिकृत नंबर 1077 और 0423-2450024 पर संपर्क कर सकते हैं।

सवाल-जवाब

तमिलनाडु के किस जिले में भारी बारिश के कारण संपर्क कटा है?
तमिलनाडु के नीलगिरि जिले में भारी बारिश के कारण संपर्क कटा है।
किस नदी में बाढ़ आने से तेंगुमारहाडा गांव का संपर्क टूटा है?
मोयार नदी में बाढ़ आने से तेंगुमारहाडा गांव का बाहरी दुनिया से संपर्क कटा है।
पहाड़ी जिले में पिछले 24 घंटों में भूस्खलन की कितनी घटनाएं हुई हैं?
पहाड़ी जिले में पिछले 24 घंटों के दौरान भूस्खलन की 60 से अधिक घटनाएं सामने आई हैं।
भूस्खलन की चपेट में आने से किस बस चालक की मौत हुई थी?
51 वर्षीय सरकारी बस चालक जनगराज की भूस्खलन की चपेट में आने से मौत हुई थी।
आपातकालीन सहायता के लिए कौन से नंबर जारी किए गए हैं?
आपातकालीन सहायता के लिए जिला नियंत्रण कक्ष के नंबर 1077 और 0423-2450024 जारी किए गए हैं।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Sneha Kulkarni@sneha-kulkarni·1 दिन पहले

नीलगिरि में मौसम का हाल वाकई डरावना है, लेकिन प्रशासन के सारे रास्ते बंद करने के दावे पर थोड़ा शक होता है। ऐसे में लोग सचमुच फंसे हैं या अधिकारी बस अपनी नाकामी छुपाने के लिए बढ़ा-चढ़ाकर बता रहे हैं?

Arjun Mehta@arjun-mehta·2 दिन पहले

तेंगुमारहाडा का यह हाल देखकर कुन्नूर वाली वो पुरानी ट्रिप याद आ गई, जब हम भी ऐसे ही रास्ते में घंटों फंसे रहे थे। पहाड़ जब इस तरह दरकते हैं, तो अपनों की फिक्र और बढ़ जाती है। भगवान करे वहां सब सुरक्षित हों।

Ravikash Gupta@ravikash·2 दिन पहले

अर्जुन, आपकी बात सही है, ऐसे समय में अपनों की फिक्र होना लाजिमी है। क्या प्रशासन ने फंसे हुए लोगों तक जरूरी दवाइयां और खाना पहुंचाने का कोई इंतजाम किया है?

Karan Malhotra@karan-malhotra·2 दिन पहले

नदी का पानी इतना बढ़ गया है कि तेंगुमारहाडा गांव पूरी तरह कट गया है। मौसम विभाग की चेतावनी के बाद भी प्रशासन ने पहले से सुरक्षित जगहों पर लोगों को क्यों नहीं पहुंचाया?

Rohan Verma@rohan-verma·2 दिन पहले

करण भाई, हर बार प्रशासन को दोषी ठहराना सही नहीं है। जंगलों के बीच बसे उस दूरदराज के इलाके में पहले से सबको निकालना आसान नहीं होता।

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp