घरों के बगीचों अथवा खेतों में गेंदे की बागवानी करने वाले लोग अक्सर पौधों में कम फूल आने की समस्या से परेशान रहते हैं। पौधे जब सीधे ऊपर की तरफ बढ़ते हैं, तो उनमें सीमित टहनियां ही निकल पाती हैं। इसका सीधा नुकसान फूलों की संख्या पर पड़ता है। ऐसे में वानस्पतिक विकास की दिशा बदलकर हर पौधे को फूलों से भरपूर बनाने के लिए एक खास बागवानी तरीका बेहद कारगर माना जाता है, जिसे कृषि शब्दावली में पिचिंग के नाम से जाना जाता है। कोडरमा स्थित कृषि विज्ञान केंद्र के वरीय कृषि वैज्ञानिक डॉ. अजय कुमार राय के अनुसार, यह साधारण सी दिखने वाली प्रक्रिया गेंदे की उपज को कई गुना तक बढ़ाने की क्षमता रखती है।
सीधी बढ़वार रोकने से क्या होता है बदलाव
सामान्य परिस्थितियों में गेंदा एकल दिशा में तेजी से ऊपर की ओर बढ़ता है। जब पूरा पोषण केवल मुख्य तने की लंबाई बढ़ाने में खर्च होता है, तो किनारे की टहनियों को पनपने का अवसर नहीं मिल पाता। इसका परिणाम यह होता है कि पौधे का ढांचा कमजोर रह जाता है और कलियों की संख्या घट जाती है। इसी प्राकृतिक बढ़वार को मोड़ने के लिए मुख्य डाली के सबसे ऊपरी शीर्ष को काट दिया जाता है। इस हिस्से के हटते ही तने का विकास रुक जाता है और जड़ से मिलने वाला पोषण पार्श्व कलियों की ओर बहने लगता है। नतीजतन, मुख्य तने के दोनों ओर से कई नई और मजबूत उप-शाखाएं तेजी से फूटने लगती हैं।
झाड़ीदार बनावट से तय होती है फूलों की संख्या
डॉ. अजय कुमार राय ने स्पष्ट किया कि जितनी ज्यादा स्वस्थ शाखाएं विकसित होंगी, कलियां लगने की गुंजाइश भी उतनी ही अधिक तैयार होगी। उन्होंने रेखांकित किया कि बागवानों को पौधे की सिर्फ ऊंचाई देखकर संतुष्ट होने के बजाय उसके फैलाव और मजबूती पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। यदि पौधा केवल सीधा ऊपर भागता रहा और झाड़ीदार न बन पाया, तो उस पर लगने वाले फूलों की कुल गिनती बहुत सीमित रह जाएगी। इसके उलट, जब शीर्ष भाग को सही वक्त पर छांट दिया जाता है, तो पौधा चारों तरफ से फैलकर घना रूप ले लेता है। यह संतुलित ढांचा आगे चलकर पौधे को भारी मात्रा में फूलों का भार संभालने लायक बना देता है।
सुरक्षित छंटाई के लिए अपनाएं यह तरीका
गेंदे के पौधे की पिचिंग करते समय उसकी उम्र और पत्तियों की स्थिति को परखना सबसे पहला काम है। इस काम में जल्दबाजी करने से बचना चाहिए। जब पौधा गमले या खेत की मिट्टी में भलीभांति जड़ें जमा ले और उस पर पर्याप्त संख्या में हरी पत्तियां निकल आएं, तभी छंटाई की प्रक्रिया शुरू करनी चाहिए। इसके लिए किसी साफ और बेहद धारदार कैंची का इस्तेमाल करना आवश्यक है, जिससे तने पर चिकना कट लगे और ऊतकों को किसी तरह का अनावश्यक खिंचाव या आघात न पहुंचे। ध्यान रखें कि पौधे की हर शाखा को नहीं काटना है, बल्कि सिर्फ बीच वाले मुख्य तने के अग्र भाग को ही अलग किया जाता है। शीर्ष हटाने के उपरांत पौधे को नियमित नमी और संतुलित पोषण देना जारी रखें, ताकि नवजात शाखाएं तेजी से वृद्धि कर सकें।





















