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बॉम्बे हाईकोर्ट से सजा के बाद तरुण तेजपाल मामले की पीड़िता ने बयां किया 13 वर्षों की कानूनी लड़ाई और कोर्ट का कड़वा सचगोवा
13 अग॰ 2026, 9:07 am (43 दिन पहले)· 0

बॉम्बे हाईकोर्ट से सजा के बाद तरुण तेजपाल मामले की पीड़िता ने बयां किया 13 वर्षों की कानूनी लड़ाई और कोर्ट का कड़वा सच

गोवा में वर्ष 2013 के यौन उत्पीड़न मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट द्वारा पूर्व तहलका संपादक तरुण तेजपाल को 10 साल की सजा सुनाए जाने के बाद पीड़िता ने 13 वर्षों की लंबी कानूनी लड़ाई, क्रॉस-एग्जामिनेशन और सामाजिक दबाव पर अपनी चुप्पी तोड़ी है।

पूर्व तहलका संपादक तरुण तेजपाल के खिलाफ यौन उत्पीड़न की लंबी और कठिन कानूनी लड़ाई लड़ने वाली पीड़िता ने घटना के 13 वर्षों बाद पहली बार सार्वजनिक रूप से अपनी चुप्पी तोड़ी है। हाल ही में बॉम्बे हाईकोर्ट की गोवा पीठ द्वारा तरुण तेजपाल को यौन उत्पीड़न का दोषी ठहराते हुए 10 साल की सजा सुनाए जाने के बाद, पीड़िता ने अदालत के कमरों से लेकर समाज के तानों तक की खौफनाक सच्चाई को बयां किया है। उन्होंने बताया कि जब कोई महिला किसी रसूखदार और प्रभावशाली व्यक्ति के खिलाफ इंसाफ मांगने के लिए कानूनी कदम उठाती है, तो न्याय पाने की इस प्रक्रिया में उसे खुद कितनी बार संदेह के तराजू में तोला जाता है।

अदालत के भीतर गहन पूछताछ और गरिमा पर सवाल

पीड़िता ने 13 साल के लंबे अदालती सफर के दौरान हुई गहन जांच और लगातार हुए अपमान को याद किया है। सुनवाई के दौरान अदालत में उनसे हजारों पन्नों की लंबी पूछताछ की गई, जिसमें उनके अतीत, निजी आचरण, पहनावे, मैसेजों और राजनीतिक विचारों को लेकर सवाल खड़े किए गए। उन्होंने बताया कि कोर्ट ट्रायल की प्रक्रिया के दौरान उनकी तस्वीरों और निजी संवादों को सार्वजनिक जांच का विषय बनाया गया। इस पूरी प्रक्रिया ने उन्हें यह गहराई से अहसास कराया कि सत्ता किस प्रकार शरीर और न्याय प्रणाली के माध्यम से अपना प्रभाव दिखाती है।

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पीड़िता के व्यवहार और स्टीरियोटाइप पर कानूनी प्रक्रिया

अपने कड़वे अनुभवों को साझा करते हुए पीड़िता ने खुलासा किया कि क्रॉस-एग्जामिनेशन के समय उनसे यह अजीब सवाल पूछा गया कि कथित हमले के दौरान वे रोईं क्यों नहीं और भय के कारण अकड़ यानी फ्रीज क्यों गईं। इसके साथ ही उनसे यह सवाल भी किया गया कि घटना घटित होने के बाद भी उन्होंने तहलका संस्थान में अपनी नौकरी और काम करना क्यों जारी रखा। उन्होंने कहा कि पूरी कानूनी प्रक्रिया ने उनके आचरण और विश्वसनीयता को रूढ़िवादी स्टीरियोटाइप के चश्मे से देखने का प्रयास किया। इससे यह स्पष्ट होता है कि व्यवस्था में किसकी निजता, गरिमा और मानवता की रक्षा होती है और किसके शरीर तथा चरित्र को फैसले का विषय बनाया जाता है।

13 सालों का सामाजिक संघर्ष और मिले तमाम लेबल

बीते 13 वर्षों के दौरान समाज और अदालती कार्यवाहियों के दौरान उन्हें तरह-तरह के तमगों और लेबलों से नवाजा गया। उन्होंने याद किया कि इस लंबे दौर में उन्हें कभी पीड़िता, कभी झूठी, कभी सरवाइवर तो कभी पॉलिटिकल प्लांट जैसे शब्द कहे गए। निचली अदालत और हाईकोर्ट के दो अलग-अलग फैसलों के बाद भी उस दौर की खौफनाक यादें आज भी ताजा हैं। पीड़िता ने जोर देकर कहा कि यद्यपि इस कानूनी लड़ाई में उन्होंने अपना बहुत कुछ गंवाया और बहुत कुछ खोया, लेकिन इसके साथ ही उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और अपनी नई जिंदगी का निर्माण भी किया।

मामले का पृष्ठभूमि, 2013 की घटना और न्यायिक यात्रा

यह संवेदनशील मामला वर्ष 2013 का है, जब गोवा में तहलका द्वारा आयोजित थिंकफेस्ट कार्यक्रम के दौरान एक 5 सितारा होटल की लिफ्ट में दो कथित घटनाएं हुई थीं। उस समय पीड़िता तहलका में एक जूनियर सहयोगी के रूप में कार्यरत थीं। इस मामले की शुरुआती सुनवाई गोवा सेशन कोर्ट में चली थी, जिसने वर्ष 2021 में तरुण तेजपाल को बरी करने का फैसला सुनाया था। सेशन कोर्ट के फैसले के खिलाफ राज्य सरकार ने बॉम्बे हाईकोर्ट में अपील की थी। बॉम्बे हाईकोर्ट की गोवा बेंच ने सेशन कोर्ट के फैसले को रद्द करते हुए तरुण तेजपाल को यौन उत्पीड़न का दोषी पाया और 10 साल की कठोर सजा सुनाई। उधर, तरुण तेजपाल ने हाईकोर्ट के इस फैसले को आगे चुनौती देने की बात कही है।

सवाल-जवाब

तरुण तेजपाल मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट ने क्या फैसला सुनाया है?
बॉम्बे हाईकोर्ट की गोवा बेंच ने पूर्व तहलका संपादक तरुण तेजपाल को 2013 के यौन उत्पीड़न मामले में दोषी ठहराते हुए 10 साल की सजा सुनाई है।
यह घटना कब और कहां घटी थी?
यह घटना नवंबर 2013 में गोवा के एक 5 सितारा होटल की लिफ्ट में तहलका के थिंकफेस्ट कार्यक्रम के दौरान घटी थी।
इससे पहले गोवा सेशन कोर्ट का क्या फैसला था?
वर्ष 2021 में गोवा की सेशन कोर्ट ने तरुण तेजपाल को सभी आरोपों से बरी कर दिया था, जिसके खिलाफ राज्य सरकार ने हाईकोर्ट में अपील की थी।
13 साल बाद पीड़िता ने अदालत के अनुभवों के बारे में क्या बताया?
पीड़िता ने बताया कि सुनवाई के दौरान उनसे हजारों पन्नों के क्रॉस-एग्जामिनेशन में उनके व्यक्तिगत जीवन, पहनावे, मैसेजों और आचरण को लेकर तीखे सवाल पूछे गए।
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