दिल्ली पुलिस द्वारा उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर से हिरासत में लिए गए स्वतंत्र भारद्वाज को पटियाला हाउस कोर्ट में पेश करने की तैयारी पूरी कर ली गई है। शुक्रवार की देर शाम पुलिस ने उन्हें बुलंदशहर से पकड़ा था और इसके तुरंत बाद उन्हें दिल्ली लाया गया। कोर्ट में पेशी से पहले ही इस मामले ने तूल पकड़ लिया है। एक तरफ पुलिस कोर्ट से उनकी हिरासत की मांग करने की रणनीति बना रही है, तो दूसरी तरफ पार्लियामेंट स्ट्रीट थाने के बाहर भारी हंगामा और विरोध प्रदर्शन जारी है। स्वतंत्र भारद्वाज के खिलाफ पुलिस ने केवल पुरानी दर्ज प्राथमिकी में एससी/एसटी कानून की धाराएं ही नहीं जोड़ी हैं, बल्कि एक नए मामले में पॉक्सो अधिनियम के तहत भी प्राथमिकी दर्ज की है। इससे उनकी कानूनी मुश्किलें काफी बढ़ गई हैं।
पटियाला हाउस कोर्ट में पेशी और पुलिस की कानूनी तैयारी
स्वतंत्र भारद्वाज को कोर्ट में पेश किए जाने के दौरान दिल्ली पुलिस उनके खिलाफ लगे विभिन्न आरोपों और अब तक मिले साक्ष्यों के आधार पर आगे की रिमांड की मांग कर सकती है। पुलिस का कहना है कि आरोपी से पूछताछ और मामले से जुड़े अन्य पहलुओं की पड़ताल बेहद जरूरी है। जंतर-मंतर पर हुई मारपीट की घटना से लेकर सोशल मीडिया पर वायरल हुई बातचीत की ऑडियो-वीडियो क्लिप्स की जांच के लिए पुलिस को आरोपी की हिरासत की आवश्यकता है। दूसरी तरफ, बचाव पक्ष के वकीलों की तैयारी भी मजबूत दिख रही है, जो पुलिस की इस कार्रवाई को पूर्वाग्रह से ग्रसित और एकतरफा बताने की कोशिश में जुटे हैं।
संसद मार्ग थाने के बाहर हिंदू रक्षा दल का जोरदार प्रदर्शन
शनिवार, 5 सितंबर 2026 को स्वतंत्र भारद्वाज की गिरफ्तारी और हिरासत की खबर फैलते ही हिंदू रक्षा दल के कार्यकर्ता बड़ी संख्या में नई दिल्ली स्थित पार्लियामेंट स्ट्रीट थाने के बाहर एकत्र हो गए। थाने के बाहर प्रदर्शन कर रहे कार्यकर्ताओं के हाथों में स्वतंत्र भारद्वाज के पोस्टर थे, जिनमें उन्हें संत और साधु के रूप में चित्रित किया गया था। कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी करते हुए दिल्ली पुलिस की कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाए और इसे एकतरफा और अन्यायपूर्ण करार दिया।
प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि पुलिस केवल एक पक्ष की शिकायत के आधार पर ही इतनी कठोर और त्वरित कार्रवाई कर रही है, जबकि घटना के दूसरे पहलू और विरोधी पक्ष की भूमिका की पूरी तरह अनदेखी की जा रही है। प्रदर्शन में शामिल लोगों ने पार्लियामेंट स्ट्रीट थाने के अधिकारियों को एक ज्ञापन भी सौंपा। इस ज्ञापन में मांग की गई है कि मामले के दूसरे पक्ष से जुड़े लोगों की गतिविधियों और भूमिका की भी निष्पक्ष जांच की जाए, और यदि जांच में कोई अपराध या उकसावे की बात पाई जाती है तो उनके खिलाफ भी तुरंत एफआईआर दर्ज कर उचित कानूनी कार्रवाई की जाए।
जंतर-मंतर पर 23 जून को हुई घटना से जुड़ा पूरा विवाद
इस संपूर्ण घटनाक्रम का मूल आधार 23 जून 2026 की शाम को नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर घटित हुई एक झड़प है। उस दिन जंतर-मंतर पर CJP नामक संगठन का एक विरोध प्रदर्शन चल रहा था। इस प्रदर्शन के दौरान एक व्यक्ति अपनी 14 वर्षीय नाबालिग बेटी के साथ वहां मौजूद था और अपने मोबाइल फोन से कार्यक्रम की वीडियो रिकॉर्डिंग कर रहा था। उसी समय वहां मौजूद कुछ युवकों के साथ उसकी कहासुनी हो गई।
शिकायत के अनुसार, देखते ही देखते बहस बढ़ गई और दो-तीन युवकों ने उस व्यक्ति को घेर लिया। आरोप है कि उन युवकों ने पीड़ित के साथ मारपीट की, उसके सिर पर घूंसे मारे और लोहे के कड़े जैसी किसी भारी एवं ठोस वस्तु से हमला किया। इस हमले में व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हो गया, जिसके बाद उसे इलाज के लिए तत्काल आरएमएल अस्पताल (राम मनोहर लोहिया अस्पताल) ले जाया गया। अस्पताल में की गई डॉक्टरी जांच में पीड़ित के सिर पर दो कटे हुए गंभीर घाव पाए गए थे।
प्राथमिकी संख्या 62/2026 और वायरल पॉडकास्ट का मामला
जंतर-मंतर पर हुई इस मारपीट की शिकायत मिलने के बाद पार्लियामेंट स्ट्रीट थाने में एफआईआर संख्या 62/2026 दर्ज की गई थी। इस मामले में पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 115(2), धारा 126(2) और धारा 3(5) के तहत केस दर्ज किया था। इस प्राथमिकी में स्वतंत्र भारद्वाज और सूरज कुमार को नामजद आरोपी बनाया गया था।
मामले की जांच आगे बढ़ ही रही थी कि इस बीच इंटरनेट पर एक पॉडकास्ट की वीडियो क्लिप तेजी से वायरल होने लगी। इस वायरल क्लिप में दावा किया गया कि स्वतंत्र भारद्वाज ने नाबालिग छात्रा के पिता पर हमला करने और उनके साथ मारपीट की बात स्वीकार की थी। इस ऑडियो-वीडियो क्लिप के सामने आने के बाद दिल्ली पुलिस ने कार्रवाई तेज की और उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में दबिश देकर स्वतंत्र भारद्वाज को हिरासत में ले लिया। हालांकि, कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि वायरल क्लिप की प्रामाणिकता और कानूनी मान्यता की जांच अदालत में होना अभी बाकी है।
नाबालिग की शिकायत के बाद पॉक्सो एक्ट के तहत नया मुकदमा
इस मामले ने उस वक्त और अधिक गंभीर रूप धारण कर लिया जब पीड़ित नाबालिग लड़की ने सोशल मीडिया पर मिल रही धमकियों को लेकर पुलिस में एक नई शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में यह आरोप लगाया गया कि घटना के बाद से ही उसे और उसके परिवार को इंटरनेट माध्यमों से गंभीर परिणाम भुगतने की धमकियां दी जा रही हैं। इस शिकायत में भी स्वतंत्र भारद्वाज का नाम शामिल किया गया था।
नाबालिग द्वारा दी गई इस शिकायत को गंभीरता से लेते हुए दिल्ली पुलिस ने यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम (POCSO Act) के तहत एक नया अलग मुकदमा दर्ज कर लिया। इसके साथ ही पुरानी प्राथमिकी में भी एससी/एसटी कानून से संबंधित धाराएं जोड़ दी गईं। वर्तमान में पुलिस का साइबर सेल यह पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि सोशल मीडिया पर नाबालिग को धमकियां देने वाले अकाउंट किसके हैं और उनके पीछे किस व्यक्ति का हाथ है। जांच अधिकारियों का स्पष्ट कहना है कि डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर जिसकी भी भूमिका सिद्ध होगी, उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। दूसरी ओर, समर्थकों का कहना है कि पॉक्सो और एससी/एसटी जैसी गंभीर धाराओं का पुलिस द्वारा दुरुपयोग किया जा रहा है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से जुड़े वीडियो और निशु आजाद का जिक्र
थाने के बाहर प्रदर्शन कर रहे हिंदू रक्षा दल के कार्यकर्ताओं ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए एक और विवादित मामला उजागर किया। प्रदर्शनकारियों का दावा है कि सोशल मीडिया पर एक ऐसा वीडियो प्रसारित किया गया था, जिसमें देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर बेहद आपत्तिजनक और अमर्यादित बातें कही गई थीं। कार्यकर्ताओं का कहना था कि इस वीडियो में प्रधानमंत्री की 'तेरहवीं' से जुड़ा एक अत्यंत विवादित संदर्भ प्रस्तुत किया गया था।
समर्थकों ने आरोप लगाया कि इस कथित वीडियो में निशु आजाद नाम की महिला भी उपस्थित थीं। प्रदर्शनकारियों की मांग है कि पुलिस केवल स्वतंत्र भारद्वाज के मामलों पर केंद्रित रहने के बजाय इस वीडियो की भी जांच करे और इसमें शामिल लोगों पर कार्रवाई करे। हालांकि, पुलिस अधिकारियों का कहना है कि किसी वीडियो में किसी व्यक्ति की केवल उपस्थिति मात्र से उसका कोई आपराधिक कृत्य साबित नहीं हो जाता। पुलिस का कहना है कि वीडियो की सत्यता, उसे बनाने के उद्देश्य, उसकी रिकॉर्डिंग के स्थान और उसे सोशल मीडिया पर अपलोड या शेयर करने वाले सभी पक्षों की निष्पक्ष जांच की जाएगी, जिसके बाद ही कोई वैधानिक निष्कर्ष निकाला जा सकता है।
पुलिस की जांच प्रक्रिया और वर्तमान स्थिति
वर्तमान समय में यह मामला दो ध्रुवों के बीच फंसा हुआ दिखाई दे रहा है। एक तरफ जहां स्वतंत्र भारद्वाज के समर्थक सड़कों पर उतरकर पुलिस कार्रवाई को राजनीति से प्रेरित और एकतरफा करार दे रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ दिल्ली पुलिस का स्पष्ट रुख है कि वह पूरी तरह से निष्पक्षता, शिकायतों और एकत्र किए गए तकनीकी व भौतिक साक्ष्यों के आधार पर कानूनी प्रक्रिया का पालन कर रही है।
जंतर-मंतर पर 23 जून 2026 को हुई मारपीट की साधारण झड़प से शुरू हुआ यह विवाद अब एससी/एसटी एक्ट, पॉक्सो एक्ट, ऑनलाइन धमकियों और राजनीतिक वीडियो तक फैल चुका है। समर्थकों की प्रमुख मांग यही है कि निष्पक्षता बनाए रखने के लिए दोनों पक्षों की शिकायतों को समान प्राथमिकता दी जाए। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि पटियाला हाउस कोर्ट में होने वाली आगामी सुनवाई इस मामले में अत्यंत महत्वपूर्ण साबित होगी, जहां पुलिस को आरोपी की गिरफ्तारी के ठोस आधार और जांच की दिशा पेश करनी होगी। जब तक अदालत में जांच प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती, तब तक किसी भी पक्ष के दावों को अंतिम सत्य मानना जल्दबाजी होगी।





















