बिहार के बेगूसराय जिले में स्थित मध्य विद्यालय चेरिया बरियारपुर ने अपनी बेहतरीन शैक्षणिक व्यवस्था और पढ़ाई के माहौल से एक नई मिसाल पेश की है। अमूमन सरकारी स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की कमी की शिकायतें सामने आती हैं, लेकिन इस विद्यालय की कहानी बिल्कुल अलग है। यहाँ कक्षा छह की वर्ग शिक्षिका रूपम कुमारी अपनी रचनात्मक शिक्षण शैली के माध्यम से विद्यार्थियों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रही हैं। वह खेल-खेल के नए तरीकों से बच्चों को गणित और विज्ञान जैसे जटिल विषय पढ़ाती हैं, जिससे कठिन से कठिन अवधारणाएँ भी विद्यार्थियों को आसानी से समझ में आ जाती हैं।
खेल-खेल में कठिन विषयों की पढ़ाई और बच्चों में बढ़ता उत्साह
कक्षा छह में प्रवेश करते ही विद्यार्थियों का उत्साह और ऊर्जा साफ़ दिखाई देती है। रूपम कुमारी का मुख्य उद्देश्य यह रहता है कि पढ़ाई बच्चों पर बोझ न बने। इसी वजह से वह पारंपरिक रटंत प्रणाली के बजाय गतिविधियों और खेल पर आधारित शिक्षण विधियों का सहारा लेती हैं। गणित के मुश्किल सूत्र हों या विज्ञान की जटिल परिभाषाएँ, रूपम कुमारी उन्हें दैनिक जीवन से जुड़े उदाहरणों के साथ बेहद सरल तरीके से प्रस्तुत करती हैं। इस अनूठे तरीके के कारण बच्चे कक्षाओं में पूरी एकाग्रता के साथ भाग लेते हैं और उनसे पूछे गए प्रश्नों का उत्तर देने में हिचकिचाते नहीं हैं। जब कक्षा के बच्चों से गणित के जटिल विषयों पर सवाल पूछे गए, तो उन्होंने बिना किसी झिझक के उनकी सटीक परिभाषाएँ बताकर अपनी गहरी समझ का परिचय दिया।
विद्यार्थियों का अनुभव और शिक्षिका के प्रति लगाव
शिक्षिका की इस लगन का सीधा असर बच्चों के प्रदर्शन और उनके मनोबल पर दिख रहा है। कक्षा छह की छात्रा आशी कुमारी ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि उनकी क्लास टीचर उन्हें बहुत अच्छी लगती हैं। वह गणित और विज्ञान को इतनी सरलता से समझाती हैं कि कक्षा में पढ़ाई करना एक मनोरंजक अनुभव बन जाता है। इसी प्रकार कक्षा छह के छात्र अनिकेत कुमार ने भी अपनी शिक्षिका की प्रशंसा करते हुए कहा कि मैडम के पढ़ाने के अनूठे अंदाज की वजह से उनका ध्यान पूरी तरह पढ़ाई में लगा रहता है और स्कूल आने का उनका मन हमेशा उत्साहित रहता है। बच्चों का यह सकारात्मक रवैया दर्शाता है कि सही दिशा और प्रेरणा मिलने पर सरकारी स्कूलों के विद्यार्थी भी किसी से पीछे नहीं हैं।
साल 2022 में नियुक्ति से लेकर चेरिया बरियारपुर तक का सफर
रूपम कुमारी की शिक्षण यात्रा साल 2022 में शुरू हुई थी, जब सरकारी प्रक्रिया के तहत उनकी पहली बहाली हुई। उनकी शुरुआती पोस्टिंग बेगूसराय जिले के ही खोदावंदपुर क्षेत्र में हुई थी। इसके बाद स्थानांतरण होकर वह मध्य विद्यालय चेरिया बरियारपुर में आईं। यहाँ आने के बाद उन्होंने अपने समर्पण से स्कूल की शैक्षणिक गतिविधियों में एक नया प्राण फूँक दिया। वह बताती हैं कि जब बच्चे उनसे कहते हैं कि उन्हें उनकी कक्षा में पढ़ना बेहद पसंद है, तो यह प्रतिक्रिया उनके लिए सबसे बड़ा पुरस्कार होती है। उनका मानना है कि बेगूसराय और बिहार के ग्रामीण इलाकों के बच्चों में असाधारण प्रतिभा है; बस आवश्यकता इस बात की है कि उन्हें सही मार्गदर्शन, प्रोत्साहन और सीखने के लिए अनुकूल माहौल उपलब्ध कराया जाए।
प्राचार्य संजय कुमार का कुशल नेतृत्व और विद्यालय का बदलाव
इस विद्यालय के शैक्षणिक परिवर्तन में केवल एक शिक्षिका का योगदान ही नहीं, बल्कि स्कूल के प्राचार्य संजय कुमार का कुशल नेतृत्व भी मुख्य आधार रहा है। प्राचार्य संजय कुमार ने अपने प्रयासों से विद्यालय में एक ऐसा अनुशासित और सकारात्मक माहौल तैयार किया है, जहाँ शिक्षक अपनी पूरी क्षमता और रचनात्मकता के साथ पढ़ा सकें। उन्होंने शिक्षकों को नई-नई प्रयोगधर्मी शिक्षण तकनीकों को अपनाने के लिए लगातार प्रेरित किया। प्राचार्य के इस समर्थन और दृष्टिकोण की वजह से ही रूपम कुमारी जैसी शिक्षिका अपने विचारों को जमीन पर उतार सकी हैं और आज वे जिले भर के शैक्षणिक गलियारों में चर्चा का विषय बनी हुई हैं।
सरकारी शिक्षा व्यवस्था के लिए एक अनुकरणीय उदाहरण
बिहार में जहाँ एक तरफ बुनियादी ढाँचे और गुणवत्ता को लेकर अक्सर बहस होती रहते हैं, वहीं चेरिया बरियारपुर का यह सरकारी स्कूल यह साबित करता है कि संकल्प और निष्ठा से व्यवस्था की तस्वीर बदली जा सकती है। जब शिक्षक अपनी जिम्मेदारी को केवल एक नौकरी न मानकर समाज निर्माण का माध्यम समझते हैं, तब विद्यार्थियों के सपनों को सही उड़ान मिलती है। यह विद्यालय यह संदेश देता है कि यदि प्रधानाध्यापक का प्रशासनिक सहयोग और शिक्षकों का समर्पण एक साथ मिल जाए, तो सरकारी विद्यालयों में भी निजी स्कूलों से बेहतर शिक्षा का माहौल तैयार किया जा सकता है।


















