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छत्तीसगढ़ और ओडिशा में मिले विशालकाय अजगर, जानिए यह सांप इंसानों के लिए कितना खतरनाकभारत
5 सित॰ 2026, 2:24 pm (1 दिन पहले)· 3

छत्तीसगढ़ और ओडिशा में मिले विशालकाय अजगर, जानिए यह सांप इंसानों के लिए कितना खतरनाक

छत्तीसगढ़ के डोंगरगढ़ शहर और ओडिशा के मलकानगिरी जिले में हाल ही में विशालकाय इंडियन रॉक पाइथन देखे जाने से लोगों में हड़कंप मच गया, हालांकि दोनों अजगरों ने किसी को नुकसान नहीं पहुंचाया. जानिए यह सांप कितना बड़ा होता है, इसका काटना कितना खतरनाक है और भारत में इसे लेकर क्या कानून है.

पिछले कुछ दिनों में दो अलग-अलग राज्यों से अजगर देखे जाने की खबरें सामने आईं, जिन्होंने स्थानीय लोगों की धड़कनें बढ़ा दीं. छत्तीसगढ़ के डोंगरगढ़ शहर में करीब 10 फीट लंबा अजगर निकला, तो वहीं ओडिशा के मलकानगिरी जिले के गोडागुडा गांव में एक घर के भीतर से 9 फीट का अजगर बरामद हुआ, जिसका वजन लगभग 20 किलोग्राम आंका गया. राहत की बात यह रही कि दोनों ही मामलों में सांप ने किसी को नुकसान नहीं पहुंचाया और उसे सुरक्षित रेस्क्यू कर लिया गया. इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर लोगों के मन में यह सवाल खड़ा कर दिया कि आखिर इंडियन रॉक पाइथन होता क्या है, इसका आकार कितना बड़ा हो सकता है और यह इंसानों के लिए कितना खतरनाक साबित हो सकता है.

गोडागुडा गांव में कैसे मिला अजगर

मलकानगिरी के गोडागुडा गांव की यह घटना दिलचस्प है. गांव में रहने वाला एक किशोर अपने घर में मुर्गे-मुर्गियां और बत्तखें पालता था. कुछ दिनों से उसे हर रोज़ एक-दो बत्तखें कम मिल रही थीं, जिसकी वजह वह समझ नहीं पा रहा था. शुक्रवार की सुबह जब फिर एक बत्तख नदारद मिली, तो उसने घर के कोने-कोने में उसकी तलाश शुरू की. इसी तलाश के दौरान उसे घर के भीतर एक बड़ा अजगर कुंडली मारे बैठा दिखा, जिसे देखकर पूरा परिवार सहम गया. परिवार ने बिना देर किए पड़ोसियों को इसकी जानकारी दी और स्नेक हेल्पलाइन से संपर्क साधा. सूचना के कुछ ही देर बाद हेल्पलाइन से जुड़े एक होमगार्ड जवान मौके पर पहुंचे और बड़ी सूझबूझ के साथ अजगर को पकड़ा. जांच में सांप पूरी तरह स्वस्थ पाया गया, जिसके बाद वन विभाग की मौजूदगी में उसे आसपास के जंगल में छोड़ दिया गया.

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इंडियन रॉक पाइथन की पहचान और ठिकाना

अजगर के नाम से मशहूर इंडियन रॉक पाइथन असल में एक बिना जहर वाला विशालकाय सांप है, जिसका वैज्ञानिक नाम पाइथन मोलुरस (Python molurus) है. यह प्रजाति खासतौर पर भारतीय उपमहाद्वीप की घनी झाड़ियों, दलदली जमीन और पथरीली घाटियों में पनपती है. इसका बसेरा देश के लगभग हर कोने में मिलता है, पश्चिमी घाट से लेकर पश्चिम बंगाल, झारखंड, असम और गुजरात के जंगलों के साथ-साथ मध्य भारत के इलाकों में भी यह आसानी से देखा जा सकता है.

कितना बड़ा और भारी होता है यह अजगर

आमतौर पर एक वयस्क इंडियन रॉक पाइथन की लंबाई 8 से 12 फीट यानी करीब 2.4 से 3 मीटर तक होती है, हालांकि कुछ मामलों में इसकी लंबाई 15 से 20 फीट तक भी दर्ज की गई है. वजन की बात करें तो एक सामान्य वयस्क अजगर का भार 30 से 52 किलोग्राम के बीच रहता है, मगर बेहद विशालकाय अजगरों का वजन 90 किलोग्राम तक भी नापा गया है.

काट लेने पर शरीर पर क्या असर पड़ता है

चूंकि यह सांप जहरीला नहीं है, इसलिए इसके काटने से खून में कोई विष नहीं फैलता. लेकिन इसके जबड़े में पीछे की तरफ मुड़े हुए बारीक और नुकीले दांतों की कतार होती है, जो त्वचा में गहरे घाव बना सकती है और तेज दर्द दे सकती है. साथ ही सांप के मुंह की लार में मौजूद बैक्टीरिया की वजह से घाव के पकने या टिटनेस होने का खतरा भी बना रहता है, इसलिए काटने पर तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी माना जाता है.

क्या यह इंसानों पर हमला करता है

स्वभाव से यह सांप बेहद सुस्त और डरपोक किस्म का होता है और इंसान इसके शिकार की सूची में शामिल नहीं होते. यह तभी आक्रामक होता है जब कोई उसे छेड़ दे, गलती से उस पर पैर रख दे या उसे अपनी जान पर खतरा महसूस हो. फिर भी बहुत बड़े आकार के अजगर से दूरी बनाए रखनी चाहिए, क्योंकि अगर वह किसी को कसकर अपनी कुंडली में जकड़ ले तो उसकी ज़बरदस्त ताकत की वजह से हड्डियां टूटने या दम घुटने जैसी नौबत आ सकती है. दरअसल यह सांप चूहे, मुर्गा-बत्तख, खरगोश, सियार या छोटे मवेशियों जैसे शिकार को दांतों से काटकर नहीं बल्कि अपने मजबूत शरीर से लपेटकर उनका दम घोंटता है और फिर उन्हें बिना चबाए पूरा निगल जाता है.

अजगर को लेकर क्या कहता है कानून

भारत में इंडियन रॉक पाइथन को कानूनी तौर पर पूरा संरक्षण हासिल है. यह वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की अनुसूची I में शामिल है, यानी इसे मारना या किसी भी तरह से इसे नुकसान पहुंचाना गंभीर अपराध है और इसके लिए सख्त सजा का प्रावधान है. यही वजह है कि डोंगरगढ़ और गोडागुडा जैसे मामलों में लोगों ने सांप को मारने के बजाय हेल्पलाइन और वन विभाग की मदद ली.

सवाल-जवाब

छत्तीसगढ़ और ओडिशा में अजगर कहां-कहां मिले?
छत्तीसगढ़ के डोंगरगढ़ शहर और ओडिशा के मलकानगिरी जिले के गोडागुडा गांव में हाल ही में इंडियन रॉक पाइथन देखे गए.
दोनों अजगरों की लंबाई और वजन कितना था?
डोंगरगढ़ वाला अजगर करीब 10 फीट लंबा था, जबकि गोडागुडा गांव में मिला अजगर करीब 9 फीट लंबा और लगभग 20 किलोग्राम वजनी था.
क्या इंडियन रॉक पाइथन जहरीला होता है?
नहीं, यह पूरी तरह जहर रहित सांप है.
इसका वैज्ञानिक नाम क्या है?
इसका वैज्ञानिक नाम पाइथन मोलुरस (Python molurus) है.
यह सांप औसतन कितना लंबा और भारी होता है?
आमतौर पर इसकी लंबाई 8 से 12 फीट और वजन 30 से 52 किलोग्राम के बीच होता है, हालांकि कुछ अजगर 20 फीट लंबे और 90 किलोग्राम तक भारी भी पाए गए हैं.
क्या इंडियन रॉक पाइथन इंसानों पर हमला करता है?
यह आमतौर पर हमला नहीं करता, सिर्फ तभी आक्रामक होता है जब उसे छेड़ा जाए, उस पर पैर पड़ जाए या जान का खतरा महसूस हो.
अजगर अपने शिकार को कैसे मारता है?
यह शिकार को काटता नहीं बल्कि अपने शरीर से कुंडली मारकर जकड़ लेता है और दम घोंटकर उसे साबुत निगल जाता है.
इंडियन रॉक पाइथन को लेकर भारत में क्या कानून है?
यह वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम 1972 की अनुसूची I के तहत संरक्षित है और इसे नुकसान पहुंचाना दंडनीय अपराध है.
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टिप्पणियाँ 2

Karan Malhotra@karan-malhotra·1 दिन पहले

यह घटना वन्यजीव और मानव बस्तियों के बीच बढ़ते टकराव का गंभीर संकेत है। छत्तीसगढ़ और ओडिशा के इन मामलों में राहत की बात यह रही कि वन विभाग और हेल्पलाइन की समय पर कार्रवाई से जनहानि टल गई। हालांकि, अवैध अतिक्रमण और आवास के सिकुड़ने से ऐसे जीव रिहायशी इलाकों का रुख कर रहे हैं, जिससे भविष्य में कानून-व्यवस्था और वन्यजीव संरक्षण दोनों के मोर्चे पर प्रशासन के लिए सुरक्षा संबंधी नई चुनौतियाँ खड़ी हो सकती हैं।

Rohan Verma@rohan-verma·1 दिन पहले

यह स्पष्ट है कि इंसानी बस्तियों के नजदीक ऐसे जीवों का पहुँचना सिर्फ वन्यजीव संघर्ष नहीं, बल्कि हमारे जंगलों और प्राकृतिक गलियारों के सिकुड़ने का परिणाम है। हालांकि ये अजगर विषहीन होते हैं और इनके काटने पर कोई जहर नहीं फैलता, फिर भी इनके जबड़े के गहरे घाव और संक्रमण का खतरा रहता है। प्रशासन और वन विभागों को चाहिए कि वे त्वरित रेस्क्यू के साथ-साथ इन प्रजातियों के प्राकृतिक आवासों की सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाएं, ताकि भविष्य में इस तरह के जोखिमों को समय रहते टाला जा सके।

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