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महंगे जिम के बजाय पारंपरिक लाठी से खुद को फिट रख रहे हैं राजस्थान के यह सरकारी शिक्षकराजस्थान
18 सित॰ 2026, 2:53 pm (19 मिनट पहले)· 0

महंगे जिम के बजाय पारंपरिक लाठी से खुद को फिट रख रहे हैं राजस्थान के यह सरकारी शिक्षक

करौली के सरकारी स्कूल शिक्षक कपिल पाराशर रोजाना 150 किलोमीटर का सफर तय करने के बावजूद अपना पारंपरिक दंड अभ्यास करना नहीं भूलते। आधुनिक जिम के महंगे उपकरणों के बजाय उन्होंने महज एक लाठी के सहारे खुद को पूरी तरह फिट रखा हुआ है।

आज के इस दौर में जहां फिटनेस के नाम पर लोग महंगे जिम, आलीशान वर्कआउट मशीनों और भारी-भरकम फीस के जाल में फंसे हुए हैं, वहीं राजस्थान के करौली में एक ऐसा शख्स भी है जो इस चकाचौंध से बिल्कुल दूर है। हम बात कर रहे हैं एक सरकारी स्कूल शिक्षक की, जिन्होंने सेहतमंद रहने के लिए किसी आधुनिक मशीनरी को नहीं, बल्कि भारत की सदियों पुरानी पारंपरिक लाठी को अपना जरिया बनाया है। केवल एक लाठी और रोजाना की अटूट लगन के दम पर उन्होंने अपनी फिटनेस को एक नया मुकाम दिया है।

सफर की थकान पर भारी पड़ा सेहत का संकल्प

कपिल पाराशर करौली के चटीकना मोहल्ला के रहने वाले हैं। वह धौलपुर जिले के बाड़ी में स्थित राजकीय बालिका उच्च प्राथमिक विद्यालय में एक सरकारी शिक्षक के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। उनके पेशेवर जीवन की सबसे बड़ी चुनौती उनकी रोजाना की यात्रा है। उन्हें अपने घर से स्कूल जाने और वापस आने के लिए प्रतिदिन करीब 150 किलोमीटर की लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। इतनी लंबी और थका देने वाली यात्रा के बाद भी कपिल कभी अपने स्वास्थ्य से समझौता नहीं करते। उनका दृढ़ विश्वास है कि एक स्वस्थ शरीर ही इंसान को बिना किसी मानसिक तनाव के ऊर्जावान बनाए रख सकता है।

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दिनचर्या का अहम हिस्सा बना दंड अभ्यास

स्कूल की गंभीर जिम्मेदारियों के बीच कपिल अपनी दिनचर्या में से कम से कम 45 मिनट से लेकर एक घंटे तक का समय अपने खास व्यायाम के लिए जरूर निकालते हैं। वह प्रतिदिन सुबह तैयार होकर स्कूल जाने से पहले इस पारंपरिक अभ्यास को पूरा करते हैं। चाहे मौसम भीषण गर्मी का हो, कड़ाके की ठंड हो या फिर मूसलाधार बारिश, उनका यह अभ्यास कभी नहीं थमता। शुरुआत में उन्होंने इसे केवल एक साधारण शौक के तौर पर अपनाकर देखना शुरू किया था, लेकिन धीरे-धीरे यह अभ्यास उनकी जीवनशैली का एक अनिवार्य हिस्सा बन गया। कपिल को प्राचीन भारतीय शारीरिक विधाओं और पारंपरिक मार्शल आर्ट में बहुत गहरी रुचि है।

सदियों पुरानी शारीरिक विधा का सम्मान

कपिल ने करीब 12 साल पहले इस दंड अभ्यास को अपने जीवन में नियमित रूप से शामिल किया था, जबकि पिछले 8 वर्षों से वे इसके जरिए खुद को पूरी तरह चुस्त-दुरुस्त रख रहे हैं। उनका मानना है कि लाठी या दंड का यह अभ्यास केवल एक व्यायाम नहीं है, बल्कि यह हमारी महान भारतीय संस्कृति और प्राचीन शारीरिक कलाओं से जुड़ा एक अद्भुत माध्यम है। इस पारंपरिक कला के निरंतर अभ्यास से शरीर की ताकत, सहनशक्ति, लचीलापन और शारीरिक संतुलन को बहुत मजबूती मिलती है। आज के युवा जहां सेहत बनाने के लिए कृत्रिम तरीकों और जिम की मशीनों पर निर्भर हो रहे हैं, वहीं कपिल की यह देसी दिनचर्या पुरानी परंपराओं की प्रासंगिकता को फिर से साबित करती है।

युवाओं के लिए एक जरूरी संदेश

कपिल पाराशर का कहना है कि आज की युवा पीढ़ी में फिटनेस को लेकर जागरूकता बढ़ी है, जो कि निश्चित रूप से एक सकारात्मक संकेत है। जिम जाकर शारीरिक व्यायाम करने में कोई बुराई नहीं है, लेकिन इसके साथ ही युवाओं को भारत की मिट्टी से जुड़े पारंपरिक व्यायामों और प्राचीन शारीरिक कलाओं के महत्व को भी समझना चाहिए। आधुनिक संसाधनों के इस्तेमाल के साथ-साथ अगर हम अपनी पारंपरिक पद्धतियों को भी अपने जीवन में शामिल करेंगे, तो इससे न केवल हमारा शरीर मजबूत रहेगा, बल्कि हमारी आने वाली पीढ़ियां भी इस समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से रूबरू हो सकेंगी। कपिल की यह अनूठी दिनचर्या साबित करती है कि खुद को तंदुरुस्त रखने के लिए किसी भारी-भरकम खर्च या महंगे उपकरणों की जरूरत नहीं होती, बल्कि इसके लिए केवल कड़े अनुशासन, नियमितता और इच्छाशक्ति की आवश्यकता होती है।

सवाल-जवाब

कपिल पाराशर कौन हैं और वे क्या करते हैं?
कपिल पाराशर राजस्थान के करौली के रहने वाले एक सरकारी शिक्षक हैं, जो धौलपुर जिले के एक सरकारी स्कूल में कार्यरत हैं।
कपिल खुद को फिट रखने के लिए किस पारंपरिक तरीके का उपयोग करते हैं?
वे खुद को फिट रखने के लिए भारतीय परंपरा से जुड़े 'दंड अभ्यास' (लाठी घुमाने और व्यायाम करने की प्राचीन विधा) का उपयोग करते हैं।
उन्हें प्रतिदिन अपने स्कूल आने-जाने के लिए कितनी दूरी तय करनी पड़ती है?
उन्हें प्रतिदिन अपने निवास स्थान से स्कूल जाने और वापस लौटने के लिए लगभग 150 किलोमीटर का लंबा सफर तय करना पड़ता है।
वे इस पारंपरिक व्यायाम को रोजाना कितने समय तक करते हैं?
वे रोजाना सुबह स्कूल जाने से पहले लगभग 45 मिनट से लेकर एक घंटे तक इस पारंपरिक अभ्यास को नियमित रूप से करते हैं।
कपिल को इस दंड अभ्यास को करते हुए कितना समय हो चुका है?
कपिल को इस दंड अभ्यास को नियमित रूप से करते हुए लगभग 12 साल हो चुके हैं, जबकि पिछले 8 वर्षों से वे इसके जरिए पूरी तरह फिट हैं।
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