राजस्थान के नागौर शहर अंतर्गत बड़ली इलाके में उस समय भारी दहशत फैल गई, जब पोटेशियम नाइट्रेट के एक गोदाम में अचानक आग भड़क उठी और उसके तुरंत बाद एक प्रचंड विस्फोट हुआ। इस दर्दनाक हादसे में प्राथमिक रूप से दो लोगों के मारे जाने की बात सामने आ रही है। धमाका इतना तेज था कि आसपास का पूरा इलाका दहल उठा और चारों तरफ अफरा-तफरी का माहौल बन गया। शुरुआती जानकारी के अनुसार हादसे के वक्त इमारत के भीतर कई अन्य श्रमिक भी कार्य कर रहे थे, जिसके चलते हताहतों की संख्या में बढ़ोतरी होने का गंभीर अंदेशा बना हुआ है। घटना की खबर मिलते ही नागौर कोतवाली थाना पुलिस और दमकल विभाग की गाड़ियां तुरंत घटनास्थल पर पहुंच गईं और राहत अभियान छेड़ दिया गया।
धमाके के बाद राहत और बचाव अभियान तेज
विस्फोट की तीव्रता को देखते हुए अग्निशमन दल के कर्मचारियों ने तेजी से पानी की बौछारें शुरू कर आग पर नियंत्रण पाने की कोशिशें शुरू कीं। पुलिस और बचाव दलों का प्राथमिक उद्देश्य इमारत में फंसे श्रमिकों को सुरक्षित बाहर निकालना और आग को रिहायशी दायरे में फैलने से रोकना है। इस पूरे हादसे में दो व्यक्तियों की मौत होने की बात कही जा रही है, हालांकि अभी तक शवों की शिनाख्त और घायलों की सटीक तादाद को लेकर आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है। प्रशासनिक टीमें और बचाव कर्मी मलबे तथा परिसर का मुआयना कर यह पता लगाने में जुटे हैं कि घटना के समय कुल कितने मजदूर अंदर मौजूद थे और उनमें से कितने लोग सुरक्षित निकलने में कामयाब रहे।
पोटेशियम नाइट्रेट और बारूद निर्माण से जुड़ा परिसर
शुरुआती पड़ताल में यह तथ्य सामने आया है कि संबंधित परिसर के पास पटाखे बनाने की आधिकारिक अनुमति अथवा लाइसेंस मौजूद था। इसी सिलसिले में वहां पोटेशियम नाइट्रेट का भारी स्टॉक जमा कर रखा गया था और कथित तौर पर उससे बारूद तैयार करने की प्रक्रिया चल रही थी। इसी काम के दौरान अज्ञात कारणों से पहले लपटें उठीं और फिर रासायनिक सामग्री की चपेट में आने से भीषण विस्फोट हो गया। हालांकि आग भड़कने और उसके बाद हुए धमाके के वास्तविक कारणों का कोई भी तकनीकी या आधिकारिक ब्योरा फिलहाल जारी नहीं किया गया है।
लाइसेंस की शर्तों और नियमों की होगी प्रशासनिक जांच
धमाके की गूंज सुनते ही बड़ी तादाद में स्थानीय बाशिंदे मौके पर जमा हो गए, जिन्हें नियंत्रित करने के लिए पुलिस बल को काफी मशक्कत करनी पड़ी। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि राहत व बचाव कार्य मुकम्मल होने के बाद विस्तृत तकनीकी जांच शुरू की जाएगी। इस जांच के दायरे में यह देखा जाएगा कि गोदाम में किस मात्रा में रासायनिक पदार्थ जमा था, भंडारण की प्रक्रिया मानकों के अनुकूल थी या नहीं और वहां सुरक्षा संबंधी तय नियमों का पालन हो रहा था या नहीं। फिलहाल प्राथमिकता लपटों को पूरी तरह बुझाने, संभावित रूप से फंसे कामगारों को सुरक्षित निकालने और पूरे इलाके को सुरक्षित घोषित करने की है।


















