देश के हवाई अड्डों, मेट्रो नेटवर्क, परमाणु संयंत्रों और महत्वपूर्ण सरकारी प्रतिष्ठानों की सुरक्षा का जिम्मा संभालने वाली सीआईएसएफ को अब एक नया और हाईटेक ठिकाना मिलने जा रहा है। नई दिल्ली के लोधी रोड स्थित सीजीओ कॉम्प्लेक्स में बनने वाली यह नौ मंजिला इमारत फोर्स के लिए किसी किले से कम नहीं होगी। रविवार को केंद्रीय गृह राज्य मंत्री बंडी संजय कुमार ने इस नए मुख्यालय की आधारशिला रखी। इस पूरे इन्फ्रास्ट्रक्चर विकास पर कुल 136 करोड़ रुपये से अधिक की राशि खर्च की जा रही है।
कमांड और कंट्रोल का नया केंद्र
करीब 75.78 करोड़ रुपये की लागत से तैयार होने वाला यह नौ मंजिला मुख्यालय सीआईएसएफ के ऑपरेशंस का मुख्य केंद्र होगा। यहां एक अत्याधुनिक कमांड सेंटर बनाया जाएगा, जहां से देश भर में फैली सुरक्षा गतिविधियों की निगरानी और योजना बनाई जाएगी। इस इमारत में डीजी ऑफिस के साथ ही विभिन्न विभागों के कार्यालय, एक एडवांस कंट्रोल रूम, कॉन्फ्रेंस हॉल, ऑडिटोरियम, लाइब्रेरी और जिम जैसी आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध होंगी।
बढ़ती जिम्मेदारियां और नई चुनौतियां
समय के साथ सीआईएसएफ के कार्यक्षेत्र का विस्तार हुआ है। अब फोर्स न केवल एयरपोर्ट्स की सुरक्षा कर रही है, बल्कि प्रमुख बंदरगाहों के सुरक्षा ऑडिट की जिम्मेदारी भी संभाल रही है। इसे इंटरनेशनल शिप एंड पोर्ट फैसिलिटी सिक्योरिटी कोड के तहत एक मान्यता प्राप्त सुरक्षा संगठन का दर्जा मिला है। इसके अतिरिक्त, जम्मू-कश्मीर जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में उच्च सुरक्षा वाली जेलों की निगरानी का काम भी सीआईएसएफ को दिया गया है।
जवानों के लिए बेहतर सुविधाएं और ट्रेनिंग
TrendKia के अनुसार, इस अवसर पर तीन बड़े प्रोजेक्ट्स का लोकार्पण किया गया। हैदराबाद की नेशनल इंडस्ट्रियल सिक्योरिटी अकादमी में 34.22 करोड़ रुपये की लागत से अधीनस्थ अधिकारी मेस 'आदित्य' और 20.53 करोड़ रुपये की लागत से बनी ट्रेनिंग बिल्डिंग 'अभ्यास' को शुरू किया गया। साथ ही, तमिलनाडु के शिवगंगा जिले में 5.50 करोड़ रुपये की लागत से बनी चौथी रिजर्व बटालियन की आवासीय कॉलोनी को भी राष्ट्र को समर्पित किया गया।
महिला सशक्तिकरण और कल्याणकारी कदम
महिला भागीदारी को बढ़ावा देने के लिए एक ऐतिहासिक निर्णय लेते हुए सरकार ने हरियाणा के नूंह में सीआईएसएफ की पहली पूर्ण महिला रिजर्व बटालियन को मंजूरी दी है, जिसमें 1,024 महिला कर्मी शामिल होंगी। इसके अलावा, ड्यूटी के दौरान शहीद हुए जवानों के परिवारों को पर्सनल एक्सीडेंट इंश्योरेंस स्कीम के तहत एक-एक करोड़ रुपये की सहायता राशि प्रदान की गई। साथ ही, विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को कस्टमाइज्ड मोटराइज्ड व्हीलचेयर भी बांटी गई हैं।
आधुनिक खतरों से निपटने की तैयारी
बंडी संजय कुमार ने कहा कि सरकार जवानों के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि अब ड्यूटी के दौरान अक्षम होने वाले जवानों को नौकरी से नहीं निकाला जाएगा, बल्कि उन्हें सर्विस बेनिफिट्स के साथ काम करने का मौका दिया जाएगा। ड्रोन और साइबर हमलों जैसे हाइब्रिड खतरों का मुकाबला करने के लिए राजस्थान के आरटीसी बहरोड़ को 'सेंटर ऑफ एक्सीलेंस' के रूप में विकसित किया जा रहा है। फोर्स की साइबर क्षमता बढ़ाने के लिए आईआईटी मद्रास प्रवर्तक और नेशनल फोरेंसिक साइंसेज यूनिवर्सिटी जैसे संस्थानों के साथ मिलकर विशेष ट्रेनिंग दी जा रही है।













