राजस्थान के झुंझुनूं जिले में सरकारी सेवाओं और डिजिटल सहायता के नाम पर चलाए जा रहे ई-मित्र केंद्र की आड़ में एक बड़े साइबर फ्रॉड का भंडाफोड़ हुआ है। मुकुंदगढ़ पुलिस और साइबर पुलिस की संयुक्त टीम ने कार्रवाई करते हुए कसेरू निवासी अंकित कुमार को गिरफ्तार किया है, जिसने महज 18 महीनों की अवधि में 40 करोड़ रुपये से अधिक की साइबर ठगी का अवैध साम्राज्य बना लिया था। आरोपी अपने कस्टमर सर्विस पॉइंट (सीएसपी) और ई-मित्र केंद्र पर आने वाले सीधे-सादे नागरिकों के आधार, पैन कार्ड और बायोमेट्रिक अंगूठे के निशानों का गलत इस्तेमाल करके उनके नाम पर फर्जी बैंक खाते खोलता था। इसके बाद इन खातों का उपयोग अंतरराज्यीय साइबर अपराधियों द्वारा ठगी गई रकम को ठिकाने लगाने और कमीशन के बदले नकद निकासी में किया जाता था।
फर्जीवाड़े का पर्दाफाश और पीड़ित की आपबीती
इस पूरे गिरोह की कारगुजारियों का खुलासा मुकुंदगढ़ निवासी एक नागरिक अक्षय की शिकायत के बाद हुआ। अक्षय ने 4 अगस्त 2026 को पुलिस थाने में आधिकारिक रिपोर्ट दर्ज करवाई। पीड़ित ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि 10 अप्रैल 2025 को वह आरोपी अंकित कुमार के ई-मित्र केंद्र पर अपनी एसएसओ आईडी बनवाने के उद्देश्य से गया था। वहां केंद्र संचालक अंकित ने उससे आधार कार्ड और पैन कार्ड प्राप्त किए। इसके बाद प्रक्रिया के बहाने उससे 15 से 20 बार बायोमेट्रिक अंगूठा लगवाया गया और उसे करीब 4 से 5 घंटे तक केंद्र पर बैठाकर रखा गया।
इसी दौरान पीड़ित के मोबाइल पर फिनो पेमेंट बैंक से कई तरह के एसएमएस अलर्ट आने लगे। हालांकि आरोपी अंकित ने चालाकी से पीड़ित का मोबाइल फोन अपने हाथ में लिया और उन सभी बैंक संदेशों को तुरंत डिलीट कर दिया। काफी समय बीत जाने के बाद आरोपी ने सर्वर न चलने की बात कहकर पीड़ित को वापस घर भेज दिया। बाद में जब गहन जांच की गई तो पता चला कि आरोपी ने पीड़ित की जानकारी और सहमति के बिना फिनो पेमेंट बैंक में उसका खाता खोल लिया था और उसका इस्तेमाल साइबर अपराध के अवैध लेनदेन में किया जा रहा था।
16 खातों में 40 करोड़ का ट्रांजेक्शन और 92 पासबुक बरामद
पुलिस जांच में सामने आया कि 31 वर्षीय आरोपी अंकित कुमार, जो मुकुंदगढ़ थाने के कसेरू गांव का निवासी है, उसने अपने नाम से 16 विभिन्न बैंक खाते खोल रखे थे। इन 16 खातों से महज 18 महीने के भीतर 40 करोड़ रुपये से अधिक की राशि का संदिग्ध लेनदेन किया गया था। इसके अलावा पुलिस कार्रवाई के दौरान बरामद की गई 92 बैंक पासबुकों से जुड़े खातों के तार देश के विभिन्न राज्यों से जुड़े पाए गए हैं, जिन पर भारत भर में 16 साइबर शिकायतें पहले से ही दर्ज हैं।
जांच अधिकारियों के अनुसार आरोपी अपने सीएसपी केंद्र के माध्यम से साइबर अपराधियों के साथ साठगांठ बनाकर काम करता था। वह साइबर गैंग से ठगी की अवैध रकम ऑनलाइन खातों में प्राप्त करता था और फिर अपने कमीशन की कटौती करके अपराधियों को नकद राशि मुहैया कराता था। इस प्रक्रिया से साइबर फ्रॉड करने वाले गिरोहों को बिना अपनी पहचान उजागर किए आसानी से नकद पैसा मिल जाता था।
पुलिस टीम की बड़ी कार्रवाई और बरामद सामान की सूची
यह महत्वपूर्ण सफलता जिला पुलिस अधीक्षक कावेंद्र सिंह सागर (आईपीएस) के कड़े निर्देशों पर मिली। पूरी कार्रवाई का पर्यवेक्षण अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक देवेंद्र सिंह राजावत, क्षेत्र के पुलिस अधिकारी (सीओ) सुगन सिंह और साइबर थाना प्रभारी रामखिलाड़ी मीणा द्वारा किया गया। वहीं मुकुंदगढ़ थानाधिकारी गोपाल सिंह थालोर तथा साइबर थाना प्रभारी गोपाल लाल जांगिड़ के नेतृत्व में बनी संयुक्त पुलिस टीम ने दबिश देकर आरोपी को रंगे हाथों पकड़ा।
पुलिस ने आरोपी के कब्जे से भारी मात्रा में अवैध दस्तावेज और उपकरण जब्त किए हैं। बरामदगी की सूची में 2.68 लाख रुपये की नकदी, 2 लैपटॉप, 1 मोबाइल फोन, 17 अलग-अलग बैंकों के एटीएम कार्ड, 92 बैंक पासबुक, 7 चेकबुक, 38 नागरिकों के आधार कार्ड और 1 माइक्रो एटीएम मशीन शामिल हैं। पुलिस का मानना है कि इन दस्तावेजों का इस्तेमाल भी इसी तरह फर्जी खाते खोलने में किया जा रहा था।
नेटवर्क और सह-आरोपियों की तलाश जारी
अंकित कुमार को गिरफ्तार करने के बाद अब पुलिस और साइबर क्राइम सेल की टीमें उसके पूरे नेटवर्क को खंगालने में जुटी हैं। जांच एजेंसियां इस बात की गहनता से पड़ताल कर रही हैं कि इस फ्रॉड में आरोपी के साथ कौन-कौन से अन्य साथी शामिल थे। इसके अलावा देश भर के किन-किन साइबर अपराधियों को इसने नकद रकम ट्रांसफर की और 40 करोड़ रुपये की इस भारी-भरकम राशि के असली स्रोत तथा गंतव्य स्थान कहां-कहां हैं, इसकी भी विस्तृत जांच की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि आरोपी से पूछताछ के दौरान साइबर अपराध से जुड़े कई अन्य बड़े राज सामने आने की संभावना है।



















