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देहरादून में क्रोशिया के धागों से गढ़ी जा रही आत्मनिर्भरता, नंदा स्वयं सहायता समूह के हैंडबैग्स ने खींचा सबका ध्यानउत्तराखंड
10 अक्तू॰ 2026, 5:49 pm (27 दिन पहले)· 3

देहरादून में क्रोशिया के धागों से गढ़ी जा रही आत्मनिर्भरता, नंदा स्वयं सहायता समूह के हैंडबैग्स ने खींचा सबका ध्यान

देहरादून के रायपुर में नंदा स्वयं सहायता समूह की महिलाएं घर बैठे क्रोशिया की मदद से आकर्षक हैंडबैग और होम डेकोर उत्पाद तैयार कर रही हैं, जिनकी मांग प्रदर्शनियों से लेकर ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स तक तेजी से बढ़ रही है।

उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में महिलाओं का एक समूह पारंपरिक हस्तकला को आधुनिक फैशन ट्रेंड के साथ जोड़कर स्वरोजगार की नई इबारत लिख रहा है। रायपुर क्षेत्र में सक्रिय नंदा स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिलाएं अपने घरों में रहकर क्रोशिया और मजबूत धागों की मदद से उच्च गुणवत्ता वाले हैंडबैग और कपड़े के उत्पाद तैयार कर रही हैं। हाथ से बुने गए ये उत्पाद न केवल पर्यावरण के अनुकूल हैं, बल्कि अपने टिकाऊपन, प्रीमियम फिनिशिंग और आकर्षक डिजाइनों के चलते बाजार में उपलब्ध बड़े वाणिज्यिक ब्रांडों के उत्पादों के समक्ष भी एक मजबूत विकल्प बनकर उभर रहे हैं।

घर बैठे हुनर से कमाई और उत्पादन की पूरी प्रक्रिया

इस रचनात्मक पहल से जुड़ी चेतना शर्मा के अनुसार, यह व्यवस्था विशेष रूप से उन महिलाओं के लिए आय का जरिया बन चुकी है जो पारिवारिक या अन्य कारणों से घर से बाहर जाकर नौकरी करने में असमर्थ हैं। कार्यप्रणाली के तहत समूह की महिला कारीगर अपने घर पर ही क्रोशिया तकनीक से अलग-अलग छोटे पैच बुनती हैं। इन सभी तैयार पैच को बाद में मुख्य कार्यालय में एकत्र किया जाता है, जहां उन्हें जोड़कर अंतिम उत्पाद का रूप दिया जाता है। इस संगठित प्रक्रिया के जरिए केवल हैंडबैग ही नहीं, बल्कि टी कोस्टर, कार्डिगन, मफलर, टेबल कवर और कुशन कवर जैसे कई उपयोगी और सजावटी घरेलू उत्पाद भी तैयार किए जा रहे हैं।

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मजबूत धागे, ट्रेंडी स्टाइल और आसान रख-रखाव

इन हस्तनिर्मित बैग्स के निर्माण में मुख्य रूप से एक्रेलिक और ब्रायलॉन सामग्री का उपयोग किया जाता है, जिससे उत्पाद लंबे समय तक टिकाऊ बने रहते हैं। बैग्स के डिजाइन को समकालीन पसंद के अनुसार ढाला गया है, जिसमें पिंटरेस्ट से प्रेरित ग्रेनी स्क्वायर, सनफ्लावर डिजाइन, टॉड बैग और कॉलेज जाने वाली युवतियों के लिए विस्कोस बैग शामिल हैं। इन उत्पादों की सबसे बड़ी विशेषता इनका लचीला उपयोग है, जिन्हें दफ्तर के औपचारिक परिधानों से लेकर वैवाहिक आयोजनों के पारंपरिक और भारी कपड़ों के साथ आसानी से इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके अलावा, इन्हें घर पर सामान्य रूप से धोया जा सकता है और लंबे समय तक इस्तेमाल के बाद भी इनका रंग या धागा खराब नहीं होता है।

प्रदर्शनियों और ऑनलाइन माध्यम से बिक्री का विस्तार

हस्तनिर्मित क्रोशिएट उत्पादों की बिक्री के लिए स्थानीय प्रदर्शनियों के साथ-साथ डिजिटल माध्यमों का व्यापक सहारा लिया जा रहा है। देहरादून में आयोजित होने वाले विभिन्न मेलों और प्रदर्शनियों में इन उत्पादों को प्रदर्शित किया जाता है, जहां ग्राहकों का अच्छा रुझान देखने को मिलता है। इसके अतिरिक्त, जो उपभोक्ता इन फैशनेबल और पर्यावरण के अनुकूल उत्पादों को खरीदना चाहते हैं, वे ‘Mini ‘s cozy knot’ के माध्यम से संपर्क स्थापित कर सकते हैं। यह प्रयास न केवल स्थानीय हस्तशिल्प को नया बाजार उपलब्ध करा रहा है, बल्कि महिलाओं को आर्थिक संबल प्रदान कर स्वावलंबन को भी मजबूती दे रहा है।

सवाल-जवाब

नंदा स्वयं सहायता समूह की महिलाएं कौन से उत्पाद तैयार करती हैं?
महिलाएं क्रोशिया और धागों की मदद से हैंडबैग, टी कोस्टर, कार्डिगन, मफलर, टेबल कवर और कुशन कवर जैसे उत्पाद बनाती हैं।
इन क्रोशिएट बैग्स को बनाने में किन सामग्रियों का इस्तेमाल किया जाता है?
बैग्स को मजबूत और टिकाऊ बनाने के लिए मुख्य रूप से एक्रेलिक और ब्रायलॉन सामग्री का उपयोग किया जाता है।
क्या इन हस्तनिर्मित बैग्स को घर पर धोया जा सकता है?
हां, ये बैग पूरी तरह धोने योग्य हैं और लंबे समय तक इस्तेमाल के बाद भी इनका धागा या रंग खराब नहीं होता।
इन बैग्स में कौन-कौन से प्रमुख डिजाइन उपलब्ध हैं?
इनमें पिंटरेस्ट से प्रेरित ग्रेनी स्क्वायर, सनफ्लावर डिजाइन, टॉड बैग और कॉलेज छात्राओं के लिए विस्कोस बैग शामिल हैं।
ग्राहक इन बैग्स को कहां से खरीद सकते हैं?
ग्राहक देहरादून में लगने वाली प्रदर्शनियों के अलावा ऑनलाइन माध्यम ‘Mini ‘s cozy knot’ पर संपर्क करके इन्हें खरीद सकते हैं।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Amit Patel@amit-patel·26 दिन पहले

घर से काम करके खुद पैसे कमाना वाकई बहुत बढ़िया बात है, महिलाओं के लिए तो कमाल का ज़रिया है।

Arjun Mehta@arjun-mehta·26 दिन पहले

देहरादून की इन महिलाओं का क्रोशिया वाला काम वाकई बहुत प्यारा और टिकाऊ लग रहा है, खासकर कॉलेज जाने वाली लड़कियों के लिए टॉड बैग्स अच्छे हैं। बस एक बात समझ नहीं आई कि ऑनलाइन ऑर्डर देने के बाद ये बैग्स देश के दूसरे शहरों में डिलिवर हो पाते हैं या सिर्फ देहरादून के मेलों तक ही सीमित हैं?

Ravikash Gupta@ravikash·26 दिन पहले

अर्जुन जी, मिनीज़ कोज़ी नॉट के ज़रिए ये देश भर में ऑनलाइन आर्डर ले रही हैं, इसलिए दूसरे शहरों में भी मिल जाएंगे।

Rohan Verma@rohan-verma·26 दिन पहले

देहरादून की महिलाओं की यह कोशिश वाकई बहुत बढ़िया है। घर बैठे हुनर से जुड़कर पैसे कमाना और पर्यावरण के अनुकूल बैग बनाना एक बेहतरीन कदम है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·26 दिन पहले

रोहन भाई, सही कहा आपने। ऐसे छोटे कामों से घर की महिलाओं को जो आर्थिक मदद मिलती है, उससे घरेलू मामलों में भी काफी राहत रहती है।

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