दीपावली पर्व से ठीक पहले राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के खुदरा बाजारों में पटाखों की अनियंत्रित खरीद-फरोख्त सामने आने के बाद देश की सबसे बड़ी अदालत ने गहरी नाराजगी जाहिर की है। मंगलवार 3 नवंबर 2026 को इस विषय को संज्ञान में लेते हुए पीठ ने स्पष्ट किया कि पाबंदियों का खुलेआम उल्लंघन कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। न्यायमूर्ति एमएम सुंदरेश तथा न्यायमूर्ति प्रसन्ना बी वराले के संयुक्त कोरम ने केंद्र सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी को निर्देश जारी किया कि वे जमीनी हकीकत का मुआयना कराएं और नियमों को तोड़ने वालों पर त्वरित कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करवाएं। पीठ ने संकेत दिया कि सोमवार 2 नवंबर को जारी व्यापक दिशा-निर्देशों के तुरंत बाद बाजार में जिस तरह अवैध सामग्रियां नजर आ रही हैं, वह गंभीर चिंता का सबब है।
दुकानों पर नियमों की धज्जियां उड़ने पर अदालत की सख्त टिप्पणी
अदालती कार्यवाही के दौरान जस्टिस सुंदरेश ने सरकारी वकील का ध्यान राजधानी के बाजारों में छपी तस्वीरों व जानकारियों की ओर खींचा। पीठ ने बताया कि कड़े आदेश के बावजूद खुदरा काउंटरों पर वैध लाइसेंस के बिना, साथ ही साथ प्रामाणिक क्यूआर कोड के बगैर भी हर किस्म के पटाखों का स्टॉक धड़ल्ले से ग्राहकों को बेचा जा रहा है।
जस्टिस सुंदरेश ने स्थिति की गंभीरता को रेखांकित करते हुए अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल से कहा, "लाइसेंस प्राप्त, बिना लाइसेंस वाले, क्यूआर कोड वाले या बिना क्यूआर कोड वाले, सब कुछ उपलब्ध है. कृपया इस पर ध्यान दें." पीठ का यह सख्त रुख तब सामने आया जब यह तथ्य उजागर हुआ कि विक्रेता पर्यावरण अनुकूल उत्पादों की आड़ लेकर प्रतिबंधित सामग्रियां ग्राहकों को मुहैया करा रहे हैं।
अदालत द्वारा निर्धारित दो दिवसीय छूट और कड़े सुरक्षा मानक
सर्वोच्च न्यायालय ने 2 नवंबर को जारी अपने विस्तृत फैसले में दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र के लिए एक विशेष संतुलन बनाने की कोशिश की थी। इस व्यवस्था के तहत 4 नवंबर से 6 नवंबर तक अधिकृत व प्रमाणित हरित पटाखों की बिक्री की छूट तय की गई थी, जबकि नागरिकों के लिए इन्हें छोड़ने की अनुमति केवल 7 और 8 नवंबर के पावन दिनों पर दी गई थी। इसके अतिरिक्त आतिशबाजी के समय को भी अत्यंत सीमित रखा गया था, जिसके तहत केवल सुबह 6 से 7 बजे तक और रात 8 से 10 बजे तक ही आतिशबाजी चलाने की इजाजत थी। अदालत ने स्पष्ट कर दिया था कि 9 नवंबर से पूरे क्षेत्र में पटाखों पर संपूर्ण प्रतिबंध स्वतः प्रभाव से दोबारा लागू हो जाएगा।
पर्यावरण सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए केवल उन्हीं पटाखों को मंजूरी दी गई थी जिन्हें पेट्रोलियम एवं विस्फोटक सुरक्षा संगठन (पेसो) तथा वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद-राष्ट्रीय पर्यावरण अभियांत्रिकी अनुसंधान संस्थान (सीएसआईआर-नीरी) द्वारा प्रमाण पत्र जारी किया गया हो। बिना इन दोनों संस्थाओं की आधिकारिक मुहर के किसी भी उत्पाद का विनिर्माण अथवा विक्रय पूरी तरह गैरकानूनी घोषित किया गया था।
लड़ी, बेरियम और इंटरनेट के जरिए बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध
अदालत ने पटाखों की बिक्री को केवल स्थानीय प्रशासन द्वारा चिन्हित स्थानों तक ही सीमित रखने का हुक्म दिया था। इसके अलावा ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स या इंटरनेट आधारित माध्यमों से पटाखों की किसी भी प्रकार की ऑनलाइन डिलीवरी पर पूरी तरह रोक लगाई गई थी। ग्राहकों द्वारा हर पैकेट की सत्यता परखने के उद्देश्य से प्रत्येक डिब्बे पर उत्पाद-विशिष्ट क्यूआर कोड चस्पा करना अनिवार्य बनाया गया था। इसके साथ ही हवा में अत्यधिक विषैला धुआं छोड़ने वाले बेरियम रसायनों के इस्तेमाल तथा आपस में जुड़ी पटाखों की लड़ियां (लड़ी) तैयार करने अथवा बेचने पर संपूर्ण मनाही लागू की गई थी।
प्रमुख बाजारों में जांच के दौरान उजागर हुई विसंगतियां
राजधानी के भीड़भाड़ वाले व्यापारिक केंद्रों जैसे सदर बाजार, चांदनी चौक, शास्त्री नगर, सरोजिनी नगर तथा न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी में 22 अक्टूबर और 2 नवंबर को की गई पड़ताल में नियमों की भारी अनदेखी पाई गई। दुकानों पर हरित, प्रदूषण मुक्त और शून्य प्रदूषण के बड़े-बड़े दावे करते हुए उत्पाद प्रदर्शित किए गए थे। हालांकि जब खरीदारों ने संपर्क किया, तो पिछले दरवाजे से हानिकारक पारंपरिक पटाखे भी बेचे जा रहे थे।
इतना ही नहीं, बाजार में मौजूद कई डिब्बों पर अनिवार्य क्यूआर कोड गायब पाए गए, जबकि कुछ पैकेटों पर छपे कोड को स्कैन करने पर वे प्रयोगशाला की प्रामाणिक रिपोर्ट के बजाय केवल कारोबारी कैटलॉग खोल रहे थे। कई दुकानदारों ने प्रतिबंधित पटाखों को छिपाकर रखा हुआ था और मांग आने पर ही उन्हें बाहर निकाल रहे थे।
निगरानी तंत्र की विफलता पर शीर्ष अदालत की चिंता
दिल्ली-एनसीआर में वायु गुणवत्ता संकट और प्रदूषण पर दायर जनहित याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए अदालत ने माना कि पूर्व में लगाए गए एकमुश्त प्रतिबंध जमीनी स्तर पर अवैध कारोबार रोकने में नाकाम साबित हुए हैं। पीठ ने गहरा असंतोष व्यक्त किया कि प्रशासनिक तंत्र की सुस्ती के चलते पुराने जहरीले पटाखों को हरित पटाखों के लेबल तले बेचा जा रहा है और संबंधित निगरानी एजेंसियां न्यायिक निर्देशों का अक्षरशः पालन कराने में चूक रही हैं।














