मेघालय में स्थानीय जनजातियों के अधिकारों और जनसांख्यिकीय सुरक्षा को लेकर दबाव समूहों ने राज्य सरकार के खिलाफ कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। दस प्रमुख सामाजिक और छात्र संगठनों के साझा मंच, संयुक्त समन्वय समिति ने प्रशासन को एक महीने का वक्त देते हुए चेतावनी दी है कि यदि बाहरी लोगों के प्रवेश को नियंत्रित करने वाले मौजूदा कानूनों को धरातल पर नहीं उतारा गया, तो वे बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन शुरू करेंगे।
मुख्यमंत्री को सौंपा गया मांग पत्र
संगठनों के गठबंधन ने 3 नवंबर को राज्य के मुख्यमंत्री कोनराड के संगमा को एक विस्तृत पत्र भेजा। इस पत्र में आरोप लगाया गया कि राज्य की मूल आबादी के आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक हितों की रक्षा के लिए बने नियमों को लागू करने में सरकार लगातार सुस्ती बरत रही है। समिति के अनुसार, स्थानीय पहचान को सुरक्षित रखने के लिए तंत्र विकसित करने की मांग वर्ष 2013-14 से उठाई जा रही है, परंतु एक दशक बीतने के बाद भी प्रमुख मुद्दे जस के तस बने हुए हैं।
प्रशासन से लंबित कानूनों पर मांगा जवाब
साझा मंच ने विशेष रूप से मेघालय रेजिडेंट्स सेफ्टी एंड सिक्योरिटी एक्ट 2016 के तहत प्रवेश और निकास बिंदुओं की व्यवस्था को सक्रिय न किए जाने पर जवाब मांगा है। इसके साथ ही मेघालय आइडेंटिफिकेशन रजिस्ट्रेशन (सेफ्टी एंड सिक्योरिटी) ऑफ माइग्रेंट वर्कर्स एक्ट 2020 के प्रावधानों को पूरी सख्ती से लागू करने की मांग दोहराई गई है। संगठनों का कहना है कि पड़ोसी राज्यों और सीमाओं के पार से आने वाले लोगों के नियमन के बिना स्थानीय आबादी सुरक्षित महसूस नहीं कर सकती।
भूमि संरक्षण और सीमा विवाद का मुद्दा
पत्र में मेघालय बेनामी ट्रांजैक्शन प्रोहिबिशन एंड डिटेक्शन एक्ट को अमलीजामा पहनाने में विफलता पर भी गहरी चिंता जताई गई है। इसके अतिरिक्त, अंतरराज्यीय और अंतरराष्ट्रीय सीमाओं के अनसुलझे मामलों को भी मूल निवासियों की संवेदनशीलता से जोड़ते हुए उठाया गया। सामाजिक समूहों का स्पष्ट मत है कि खासी, जयंतिया और गारो समुदायों के अस्तित्व और संसाधनों को बाहरी दबावों से बचाने के लिए इन वैधानिक प्रावधानों का क्रियान्वयन अनिवार्य है।
राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी का आरोप
संयुक्त समन्वय समिति ने मौजूदा प्रशासन पर ढिलाई बरतने का आरोप लगाते हुए कहा कि कानूनों को कड़ाई से लागू न करना स्थानीय लोगों के लिए गंभीर स्थिति पैदा कर रहा है। संगठन ने पत्र में दर्ज किया,
"The State Government's lack of political will to enforce and stringently implement these laws poses a grave threat to the indigenous people, including the Khasi, Jaiñtia, and Garo communities."
गठबंधन में शामिल संगठन
इस अल्टीमेटम का समर्थन करने वाले संगठनों में फेडरेशन ऑफ खासी जयंतिया एंड गारो पीपल, हिनिएवट्रेप नेशनल यूथ फ्रंट, री-भोई यूथ फेडरेशन, जयंतिया स्टूडेंट्स यूनियन और गारो स्टूडेंट्स यूनियन शामिल हैं। इसके साथ ही ए-चिक यूथ वेलफेयर ऑर्गनाइजेशन, एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेसी एंड एम्पावरमेंट, फेडरेशन फॉर ए-चिक फ्रीडम, ऑल ए-चिक यूथ वेलफेयर सोसाइटी तथा ए-चिक हॉलिस्टिक अवेकनिंग मूवमेंट ने भी इस मांग का पूर्ण समर्थन किया है। समिति ने स्पष्ट किया है कि यदि निर्धारित अवधि में ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो व्यापक जन आंदोलन छेड़ा जाएगा।



















