रात के समय बिस्तर पर करवटें बदलते वक्त शायद ही कोई इस बात पर ध्यान देता है कि शरीर की कौन सी पोजीशन सेहत पर क्या असर डालती है। कई लोग सीधे, उल्टे या किसी भी हाल में सोना पसंद करते हैं, लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञ हमेशा बाईं करवट सोने की सिफारिश करते हैं। इस मुद्रा में सोने से पेट से जुड़ी कई समस्याओं, विशेष रूप से एसिड रिफ्लक्स से राहत पाने में काफी मदद मिलती है। हालांकि, केवल सोने का तरीका ही नहीं, बल्कि रात के समय खानपान की आदतें भी आपकी नींद और पाचन तंत्र को सीधे तौर पर प्रभावित करती हैं। एनेस्थेसियोलॉजिस्ट और इंटरवेंशनल पेन मेडिसिन फिजिशियन डॉक्टर कुणाल सूद ने इंस्टाग्राम के जरिए नींद की गुणवत्ता को तय करने वाले पांच अहम पहलुओं और आदतों पर रोशनी डाली है।
विशेषज्ञ के अनुसार, रात्रिकालीन विश्राम और आपकी रोजमर्रा की दिनचर्या के बीच गहरा संबंध होता है। इस प्रक्रिया में देर रात भोजन करना, पेट के अंदर असहजता महसूस होना, खानपान से जुड़ी कुछ खास आदतें और अन्य कई बाहरी कारक भी अपनी अहम भूमिका निभाते हैं। जब आप अपनी जीवनशैली में इन छोटी-छोटी बातों को नजरअंदाज करते हैं, तो उसका सीधा असर आपकी सेहत और नींद के चक्र पर पड़ता है।
बाईं करवट सोने से एसिड रिफ्लक्स में राहत
एसिड रिफ्लक्स की स्थिति तब पैदा होती है जब पेट के अंदर मौजूद एसिड वापस चढ़कर भोजन नली यानी फूड पाइप और गले तक पहुंच जाता है। ऐसा आमतौर पर तब होता है जब भोजन नली के निचले हिस्से में मौजूद वॉल्व कमजोर या ढीला पड़ जाता है। हालांकि खानपान और जीवनशैली के तौर-तरीकों को अक्सर इस समस्या की मुख्य वजह माना जाता है, लेकिन शरीर की सोने की मुद्रा इस पर नियंत्रण पाने में बेहद कारगर साबित हो सकती है। डॉक्टर कुणाल सूद का कहना है कि जब कोई व्यक्ति बाईं ओर करवट लेकर सोता है, तो पेट और अन्नप्रणाली को जोड़ने वाले हिस्से, जिसे लोअर ओसोफेजियल स्फिंक्टर यानी एलईएस कहा जाता है, उसे पेट के एसिड के स्तर से ऊपर बनाए रखने में सहायता मिलती है। इस स्थिति के कारण एसिड के लिए वापस भोजन नली की तरफ लौट पाना बेहद कठिन हो जाता है, जिससे सीने में जलन और खट्टी डकारों जैसी समस्याओं से सुरक्षा मिलती है।
सोने से ठीक पहले खाने के नुकसान
यदि आपको रात में बिस्तर पर जाने से ठीक पहले भारी मात्रा में खाना खाने की आदत है, तो यह आपकी नींद की गुणवत्ता को बुरी तरह प्रभावित कर सकता है। इसके पीछे मुख्य वैज्ञानिक कारण यह है कि जब शरीर को रात के वक्त विश्राम करना चाहिए, उस दौरान पाचन तंत्र पूरी सक्रियता से काम कर रहा होता है। यह स्थिति शरीर के लिए आराम करना कठिन बना देती है और रात भर बार-बार नींद टूटने या गहरी नींद न आने की शिकायत बनी रहती है। डॉक्टर ने इस बात पर विशेष जोर दिया है कि अगर आप रात को सोने से महज दो घंटे पहले भारी भोजन का सेवन करते हैं, तो इससे आपकी नींद में भारी खलल पड़ सकता है। सोने से ठीक पहले भोजन करने से शरीर में घ्रेलिन और इंसुलिन जैसे हार्मोन अत्यधिक उत्तेजित हो जाते हैं, जो नींद के लिए जिम्मेदार मेलाटोनिन हार्मोन के स्तर को बढ़ाने में बड़ी बाधा उत्पन्न करते हैं। इस गड़बड़ी की वजह से आपके शरीर की प्राकृतिक जैविक लय पूरी तरह बिगड़ जाती है और स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव पड़ता है।



















