भारत में इस समय सड़क बुनियादी ढांचे यानी रोड इंफ्रास्ट्रक्चर में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। सरकार रेलवे पर निर्भरता को कम करने के लिए देश के विभिन्न हिस्सों में हाई-स्पीड रोड नेटवर्क का जाल बिछाने पर विशेष ध्यान दे रही है। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण यानी NHAI द्वारा आधुनिक एक्सप्रेसवे और नेशनल हाईवे के निर्माण पर लाखों करोड़ रुपये का निवेश किया जा रहा है। NHAI की रणनीति यह है कि पहले अलग-अलग क्षेत्रों में छोटे-छोटे एक्सप्रेसवे पॉकेट बनाए जा रहे हैं और फिर बाद में उन्हें आपस में जोड़कर एक विशाल महा-एक्सप्रेसवे का रूप दिया जा रहा है। कई राज्यों को एक साथ जोड़ने वाली इन महत्वाकांक्षी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में दिल्ली-अमृतसर-कटरा एक्सप्रेसवे सबसे महत्वपूर्ण गलियारों में से एक है। जब इस एक्सप्रेसवे का निर्माण कार्य पूरी तरह से संपन्न हो जाएगा, तब दिल्ली, हरियाणा, पंजाब और जम्मू-कश्मीर के बीच सीधे तौर पर एक तेज और निर्बाध संपर्क स्थापित हो जाएगा। इसके चालू होने से यात्रियों को दिल्ली से अमृतसर और कटरा तक पहुंचने में वर्तमान समय की तुलना में आधे से भी कम समय लगेगा।
उत्तर भारत की यात्राओं को आसान बनाने वाला एक्सप्रेसवे
इस विशाल एक्सप्रेसवे परियोजना का सबसे बड़ा और प्रत्यक्ष लाभ उन हजारों यात्रियों, व्यावसायिक वाहन चालकों और आम जनता को मिलेगा जो इन राज्यों के बीच नियमित यात्रा करते हैं। वर्तमान में, यदि कोई व्यक्ति सड़क मार्ग से दिल्ली से पवित्र धार्मिक स्थल कटरा की यात्रा करता है, तो उसे लगभग 14 घंटे का लंबा और थका देने वाला सफर तय करना पड़ता है। हालांकि, जब यह पूरा 680 किलोमीटर लंबा एक्सेस-कंट्रोल्ड कॉरिडोर बनकर चालू हो जाएगा, तब दिल्ली से कटरा तक की यात्रा का समय घटकर मात्र 6 घंटे रह जाने की उम्मीद है। इसी तरह, दिल्ली से अमृतसर के बीच की दूरी तय करने में अभी लगभग 8 घंटे का समय लगता है, जो इस एक्सप्रेसवे के बनने के बाद घटकर केवल 4 घंटे रह जाएगा।
एक वैकल्पिक और तीव्र सड़क मार्ग प्रदान करके, यह नया एक्सप्रेसवे अत्यधिक व्यस्त रहने वाले NH-44 यानी ऐतिहासिक जीटी रोड पर वाहनों के बढ़ते दबाव को काफी हद तक कम कर देगा। जीटी रोड से ट्रैफिक का दबाव कम होने से न केवल सड़क दुर्घटनाओं में कमी आएगी और यात्रा अधिक सुरक्षित होगी, बल्कि पूरे उत्तर भारत में माल ढुलाई करने वाले भारी वाहनों की आवाजाही भी बेहद सुगम और तेज हो जाएगी। इससे ईंधन की खपत कम होगी और प्रदूषण पर भी नियंत्रण पाने में मदद मिलेगी।
आस्था का महामार्ग और धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा
680 किलोमीटर लंबे दिल्ली-अमृतसर-कटरा एक्सप्रेसवे को एक प्रमुख 'आस्था का मार्ग' भी माना रहा है, क्योंकि यह उत्तर भारत के कई प्रसिद्ध धार्मिक और सांस्कृतिक स्थलों को आपस में जोड़ता है। इस मार्ग के एक छोर पर देश की राजधानी दिल्ली है, जहां ऐतिहासिक जामा मस्जिद, प्राचीन कालका जी मंदिर और विशाल छतरपुर मंदिर जैसे विख्यात धार्मिक स्थल मौजूद हैं, जहां रोजाना हजारों श्रद्धालु आते हैं। जब यात्री इस एक्सप्रेसवे पर उत्तर दिशा की ओर बढ़ेंगे, तो वे सीधे पंजाब के अमृतसर पहुंच सकेंगे, जहां विश्व प्रसिद्ध स्वर्ण मंदिर (हरमंदिर साहिब) स्थित है। स्वर्ण मंदिर के दर्शन के लिए देश-विदेश से हर साल लाखों की संख्या में श्रद्धालु अमृतसर पहुंचते हैं।
इसके बाद यह एक्सप्रेसवे आगे बढ़कर जम्मू-कश्मीर के कटरा में समाप्त होता है, जो माता वैष्णो देवी मंदिर जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए मुख्य बेस कैंप है। कटरा में हर साल देश के कोने-कोने से लाखों श्रद्धालु माता के दर्शन के लिए पहुंचते हैं, और इनमें से कई श्रद्धालु कटरा के पास ही स्थित पवित्र शिव खोड़ी की भी यात्रा करते हैं। इस एक्सप्रेसवे की मदद से श्रद्धालु बहुत ही कम समय में दिल्ली, अमृतसर और कटरा के बीच आ-जा सकेंगे, जिससे न केवल बुजुर्ग श्रद्धालुओं और परिवारों के लिए यात्रा आसान होगी, बल्कि क्षेत्र में धार्मिक पर्यटन उद्योग को भी एक नया आयाम मिलेगा।
व्यापार और आर्थिक गतिविधियों को नई रफ्तार
धार्मिक और पर्यटन के क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव लाने के साथ-साथ दिल्ली-अमृतसर-कटरा एक्सप्रेसवे उत्तर भारत में व्यापार और क्षेत्रीय वाणिज्य को बढ़ावा देने में भी एक मील का पत्थर साबित होगा। यह हाई-स्पीड रोड नेटवर्क दिल्ली, हरियाणा, पंजाब और जम्मू-कश्मीर को आपस में सीधे जोड़ेगा। पंजाब और हरियाणा को मुख्य रूप से कृषि उत्पादों और विभिन्न प्रकार के औद्योगिक सामानों के उत्पादन का बड़ा केंद्र माना जाता है। वहीं दूसरी ओर, जम्मू-कश्मीर से बड़े पैमाने पर ताजे फल, फूल और ऊनी कपड़े, विशेष रूप से दुनिया भर में मशहूर पश्मीना शॉल, देश के अन्य हिस्सों में भेजे जाते हैं।
चूंकि दिल्ली एक बड़ा वैश्विक व्यापारिक हब है, इसलिए इस एक्सप्रेसवे के माध्यम से पंजाब, हरियाणा और जम्मू-कश्मीर के उत्पादों की पहुंच सीधे देश की राजधानी के बाजारों तक आसान हो जाएगी। इस एक्सप्रेसवे के पूरी तरह सक्रिय होने के बाद माल ढुलाई में लगने वाला समय बहुत कम हो जाएगा। जम्मू-कश्मीर के ताजे सेब और अन्य फल या पंजाब के औद्योगिक उत्पाद कुछ ही घंटों में दिल्ली की बड़ी मंडियों तक पहुंच सकेंगे, जिससे खराब होने वाले सामानों का नुकसान न्यूनतम होगा, परिवहन लागत में कमी आएगी और स्थानीय कारोबारियों को नए व्यापारिक अवसर मिलेंगे।
आधुनिक तकनीक और स्मार्ट ट्रैफिक सिस्टम
इस 680 किलोमीटर लंबे एक्सप्रेसवे को पूरी तरह से एक्सेस-कंट्रोल्ड बनाया जा रहा है, ताकि वाहनों की गति को नियंत्रित रखा जा सके और स्थानीय ट्रैफिक के अचानक मुख्य मार्ग पर आने से होने वाले हादसों को रोका जा सके। NHAI द्वारा इस एक्सप्रेसवे पर अत्याधुनिक सड़क सुरक्षा सुविधाओं और इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम यानी ITMS को लागू करने की योजना है। इस प्रणाली के तहत उन्नत कैमरों और सेंसरों के जरिए यातायात की रियल-टाइम निगरानी की जाएगी, जिससे दुर्घटनाओं का तुरंत पता लगाने और गति सीमाओं का उल्लंघन करने वाले वाहनों पर नजर रखने में मदद मिलेगी।
इसके साथ ही, एक्सप्रेसवे पर यात्रियों की सुविधा के लिए नियमित दूरी पर आधुनिक जन-सुविधाएं भी विकसित की जाएंगी। इनमें आधुनिक विश्राम गृह, स्वच्छ फूड कोर्ट, पेट्रोल पंप, इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए चार्जिंग स्टेशन और आपातकालीन चिकित्सा सहायता केंद्र शामिल होंगे। इस परियोजना का सकारात्मक प्रभाव केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि एक्सप्रेसवे के किनारे पड़ने वाले ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों के लोगों को भी इसका प्रत्यक्ष और परोक्ष लाभ मिलेगा। ग्रामीण क्षेत्रों में जमीन की कीमतें बढ़ेंगी और एक्सप्रेसवे के पास लॉजिस्टिक्स पार्क, होटल और रेस्तरां खुलने से स्थानीय स्तर पर युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
परियोजना की प्रगति और नया मील का पत्थर
इस विशाल एक्सप्रेसवे के निर्माण कार्य को समय पर और उच्च गुणवत्ता के साथ पूरा करने के लिए इसे कई चरणों में विभाजित किया गया है। जुलाई के महीने में इस दिशा में एक बड़ी प्रगति देखी गई जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना के तहत एक महत्वपूर्ण 33.81 किलोमीटर लंबे खंड का उद्घाटन किया। इस उद्घाटन ने 680 किलोमीटर लंबे कॉरिडोर को पूरा करने की दिशा में एक बड़ा कदम बढ़ाया है। जैसे-जैसे एक्सप्रेसवे के शेष हिस्सों का काम पूरा हो रहा है, यह स्पष्ट है कि दिल्ली-अमृतसर-कटरा एक्सप्रेसवे आने वाले समय में उत्तर भारत की कनेक्टिविटी की तस्वीर को पूरी तरह बदल देगा।


















