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दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ चुनाव में 20 प्रत्याशी आजमा रहे किस्मत, प्रमुख पदों पर कड़ा मुकाबलादिल्ली
19 सित॰ 2026, 10:24 am (41 दिन पहले)· 1

दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ चुनाव में 20 प्रत्याशी आजमा रहे किस्मत, प्रमुख पदों पर कड़ा मुकाबला

दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ चुनाव 2026 में चार मुख्य पदों के लिए कुल 20 उम्मीदवार मैदान में उतरे हैं, जिनमें खिलाड़ी, कानून के छात्र और विभिन्न संगठनों के प्रमुख चेहरे शामिल हैं।

दिल्ली विश्वविद्यालय के नॉर्थ और साउथ कैंपस में छात्र संघ चुनाव 2026 को लेकर सरगर्मियां तेज हो गई हैं। कॉलेजों की कैंटीन, नुक्कड़ और पार्कों में चुनावी बहस का दौर जारी है। इस बार केंद्रीय पैनल के चार प्रमुख पदों अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सचिव और संयुक्त सचिव के लिए कुल 20 उम्मीदवार अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। मैदान में उतरे प्रत्याशियों की पृष्ठभूमि काफी विविध है, जिसमें राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी, कानून की पढ़ाई कर रहे छात्र और कई वैचारिक संगठनों के सक्रिय कार्यकर्ता शामिल हैं।

अध्यक्ष पद पर त्रिकोणीय मुकाबला

अध्यक्ष पद की कुर्सी के लिए इस बार 7 उम्मीदवार मैदान में ताल ठोक रहे हैं। मुख्य मुकाबला अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी), नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (एनएसयूआई) और वामपंथी छात्र गठबंधन (आइसा-एसएफआई) के बीच माना जा रहा है।

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  • यश डबास (एबीवीपी): बौद्ध अध्ययन विभाग (डिपार्टमेंट ऑफ बुद्धिस्ट स्टडीज) के छात्र यश मूल रूप से कंझावाला के रहने वाले हैं और टेनिस खिलाड़ी के तौर पर खेल की पृष्ठभूमि से आते हैं।
  • विजय शंकर मीणा (एनएसयूआई): यह भी बौद्ध अध्ययन विभाग से जुड़े हैं और मूल रूप से राजस्थान के निवासी हैं।
  • अनन्या रतूड़ी (आइसा-एसएफआई गठबंधन): पीजीडीएवी कॉलेज की छात्रा अनन्या वामपंथी मोर्चे की तरफ से अध्यक्ष पद की मुख्य उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ रही हैं।

उपाध्यक्ष और सचिव पद के दावेदार

उपाध्यक्ष पद के लिए कुल 5 प्रत्याशियों के बीच चुनावी जंग है। इस पद पर एबीवीपी के इशू मौर्य और एनएसयूआई के वीर चतरथ के बीच सीधा मुकाबला देखा जा रहा है। इशू मौर्य कैंपस लॉ सेंटर के छात्र हैं और इससे पहले सत्यवती कॉलेज (मॉर्निंग) के अध्यक्ष भी रह चुके हैं, जबकि वीर चतरथ बौद्ध अध्ययन विभाग के छात्र हैं।

सचिव पद की बात करें तो एबीवीपी ने श्री अरबिंदो कॉलेज की बास्केटबॉल खिलाड़ी रिया छाबड़ी को चुनाव मैदान में उतारा है, जो अपनी ऊर्जावान पहचान के लिए जानी जाती हैं। उनके सामने एनएसयूआई की तरफ से नम्रता चौधरी और वामपंथी गठबंधन की ओर से स्टेंजिन डेस्क्योंग चुनौती पेश कर रही हैं।

संयुक्त सचिव पद और बौद्ध अध्ययन विभाग की भूमिका

संयुक्त सचिव पद के लिए एबीवीपी के उम्मीदवार लक्ष्यराज सिंह हैं, जो कैंपस लॉ सेंटर से पढ़ाई कर रहे हैं। लक्ष्यराज राष्ट्रीय स्तर के हैंडबॉल खिलाड़ी रहे हैं और एशियन गेम्स तथा वर्ल्ड चैंपियनशिप से जुड़े रहे हैं। इस पद पर उनके सामने एनएसयूआई के प्रत्याशी गोपाल चौधरी के अलावा अन्य निर्दलीय उम्मीदवार भी मैदान में डटे हैं।

इस पूरे चुनाव में डिपार्टमेंट ऑफ बुद्धिस्ट स्टडीज एक प्रमुख केंद्र बनकर उभरा है, जहां से कई अहम पदों के उम्मीदवार नामांकित हैं और अपने चुनावी अभियान को आगे बढ़ा रहे हैं। कैंपस की राजनीति में खेल और विधि संकाय से जुड़े युवाओं की बढ़ती भागीदारी इस बार के छात्र संघ दंगल को खास बना रही है।

सवाल-जवाब

डूसू चुनाव 2026 में कुल कितने उम्मीदवार मैदान में हैं?
इस चुनाव में चार प्रमुख पदों के लिए कुल 20 उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे हैं।
डूसू चुनाव में किन चार प्रमुख पदों के लिए मतदान होता है?
अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सचिव और संयुक्त सचिव के पदों के लिए चुनाव होता है।
अध्यक्ष पद के लिए कितने प्रत्याशी चुनाव लड़ रहे हैं?
अध्यक्ष पद के लिए कुल 7 उम्मीदवार अपनी किस्मत आजमा रहे हैं।
अध्यक्ष पद पर प्रमुख दावेदार कौन-कौन हैं?
एबीवीपी से यश डबास, एनएसयूआई से विजय शंकर मीणा और आइसा-एसएफआई गठबंधन से अनन्या रतूड़ी मुख्य दावेदार हैं।
उपाध्यक्ष पद के लिए मुख्य मुकाबला किनके बीच है?
उपाध्यक्ष पद पर एबीवीपी के इशू मौर्य और एनएसयूआई के वीर चतरथ के बीच कड़ा मुकाबला माना जा रहा है।
सचिव पद पर कौन से प्रमुख चेहरे मैदान में हैं?
सचिव पद के लिए एबीवीपी की रिया छाबड़ी, एनएसयूआई की नम्रता चौधरी और वामपंथी गठबंधन की स्टेंजिन डेस्क्योंग मैदान में हैं।
संयुक्त सचिव पद के उम्मीदवार लक्ष्यराज सिंह की क्या पृष्ठभूमि है?
लक्ष्यराज सिंह कैंपस लॉ सेंटर के छात्र हैं और राष्ट्रीय स्तर के हैंडबॉल खिलाड़ी रह चुके हैं।
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टिप्पणियाँ 5

Li Wei@li-wei·40 दिन पहले

दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्र संघ चुनाव में विधि संकाय और खेल पृष्ठभूमि से जुड़े युवाओं की सक्रिय भागीदारी यह दर्शाती है कि कैंपस की राजनीति अब पेशेवर नेतृत्व और जन-संवाद के नए दौर में प्रवेश कर रही है। बौद्ध अध्ययन विभाग जैसे विशिष्ट केंद्रों का इस चुनावी केंद्र के रूप में उभरना अकादमिक प्राथमिकताओं और छात्र राजनीति के बीच बदलते समीकरणों का एक दिलचस्प संकेत है, जो आगे चलकर राष्ट्रीय स्तर के राजनीतिक नेतृत्व की दिशा को भी प्रभावित कर सकता है।

Arjun Mehta@arjun-mehta·40 दिन पहले

दिल्ली विश्वविद्यालय के इन चुनावों में मुख्यधारा की राजनीतिक पार्टियों के वैचारिक प्रभाव के साथ-साथ विधि संकाय और खेल पृष्ठभूमि के युवाओं का मैदान में उतरना राष्ट्रीय राजनीति की एक छोटी बानगी पेश करता है। बौद्ध अध्ययन विभाग का राजनीतिक केंद्र बनना यह दर्शाता है कि छात्र संगठन अब रणनीतिक अकादमिक इकाइयों पर विशेष ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।

Sandeep Yadav@sandeep-yadav·40 दिन पहले

यह बेहद दिलचस्प है कि कैसे इस बार के छात्र संघ चुनावों में राष्ट्रीय स्तर के टेनिस, बास्केटबॉल और हैंडबॉल जैसे खेलों से जुड़े खिलाड़ी सक्रिय राजनीति की मुख्य धारा में उतर रहे हैं। खेल के मैदान पर अनुशासन, टीमवर्क और रणनीति का जो हुनर ये युवा सीखते हैं, वही अब परिसर की चुनावी जंग और जनसंपर्क अभियानों में इनकी सबसे बड़ी ताकत बनता दिखाई दे रहा है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·40 दिन पहले

यह चुनाव सिर्फ राजनीतिक दलों की ताकत का परीक्षण नहीं है, बल्कि विधि और खेल पृष्ठभूमि के छात्रों की बढ़ती सक्रियता आपराधिक निवारण और कैंपस अनुशासन जैसे कानूनी मुद्दों पर सीधा प्रभाव डालेगी। प्रशासन को इस बार लिंगादोह समिति के नियमों और संभावित आचार संहिता के उल्लंघनों पर पैनी नजर रखनी होगी, क्योंकि प्रचार के दौरान हिंसक झड़पों की आशंका हमेशा बनी रहती है।

Rohan Verma@rohan-verma·40 दिन पहले

करण मल्होत्रा के विश्लेषण को आगे बढ़ाते हुए, यह ध्यान देना आवश्यक है कि इन चुनावों में खेल और विधि पृष्ठभूमि के उम्मीदवारों की बहुलता प्रशासनिक और कानूनी मोर्चे पर नए समीकरण तय करेगी। बौद्ध अध्ययन विभाग जैसे विशिष्ट शैक्षणिक केंद्रों का चुनावी केंद्र बनना यह दर्शाता है कि छात्र राजनीति अब पारंपरिक दायरे से निकलकर अकादमिक और वैचारिक प्राथमिकताओं के एक नए दौर में प्रवेश कर रही है, जिस पर विश्वविद्यालय प्रशासन की सतर्क नजर अनिवार्य है।

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