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डेटिंग ऐप पर बनी नज़दीकी और न्यायिक अधिकारी से ₹52 लाख की वसूली, आरोपी दीपक वत्स की जमानत याचिका दिल्ली कोर्ट ने ठुकराईभारत
13 जून 2026, 10:42 am (47 दिन पहले)· 0

डेटिंग ऐप पर बनी नज़दीकी और न्यायिक अधिकारी से ₹52 लाख की वसूली, आरोपी दीपक वत्स की जमानत याचिका दिल्ली कोर्ट ने ठुकराई

हरियाणा की एक न्यायिक अधिकारी से डेटिंग ऐप के ज़रिए नज़दीकियां बढ़ाकर 52 लाख रुपये से अधिक ऐंठने के आरोपी दीपक वत्स को दिल्ली की अदालत ने जमानत देने से इनकार कर दिया, यह कहते हुए कि वह जांच में अधूरी सामग्री दे रहा है और सहयोग नहीं कर रहा।

डेटिंग ऐप पर शुरू हुई एक मुलाकात किस तरह 52 लाख रुपये की कथित ठगी और हनी ट्रैप के आरोप तक पहुंच गई — इसी मामले में दिल्ली की एक अदालत ने आरोपी दीपक वत्स को जमानत देने से साफ इनकार कर दिया है। आरोप है कि वत्स ने हरियाणा की एक न्यायिक अधिकारी से भावनात्मक रिश्ते की आड़ में 52 लाख रुपये से अधिक की रकम हासिल की।

अदालत ने जमानत क्यों खारिज की

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सौरभ प्रताप सिंह लालेर ने जमानत याचिका खारिज करते हुए आरोपी के रवैये पर सीधी टिप्पणी की। अदालत का मानना रहा कि वत्स जांच में सहयोग करने के बजाय उसमें अड़चन डाल रहा है। न्यायाधीश ने कहा कि आरोपी ने जांच एजेंसियों के सामने अपनी बातचीत और संचार के सिर्फ चुनिंदा हिस्से रखे, जबकि कई अहम जानकारियां दबा ली गईं। अदालत के मुताबिक उसके खिलाफ अब तक जुटाए गए सबूत अपने आप में गंभीर सवाल खड़े करते हैं, और जो सामग्री उसने पेश की वह अधूरी है।

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मामले की शुरुआत — एक डेटिंग ऐप

पूरा विवाद एक डेटिंग ऐप के ज़रिए बने कथित रिश्ते से जुड़ा है। शिकायत में कहा गया है कि आरोपी ने इसी भावनात्मक जुड़ाव का फ़ायदा उठाकर न्यायिक अधिकारी से 52 लाख रुपये से ज़्यादा की रकम ऐंठ ली। दूसरी ओर वत्स का अपना पक्ष इससे उलट है — उसका दावा है कि दोनों के बीच सहमति से संबंध थे और जितने भी पैसे का लेन-देन हुआ, वह पूरी तरह स्वेच्छा से किया गया था।

जांच में जिन कमियों पर अदालत ने उंगली रखी

सुनवाई के दौरान अदालत ने सिर्फ आरोपी ही नहीं, बल्कि जांच के तौर-तरीकों पर भी सवाल उठाए। न्यायाधीश ने रेखांकित किया कि आरोपी का मोबाइल फोन पुलिस के पास होने के बावजूद शिकायतकर्ता पक्ष से जुड़े इलेक्ट्रॉनिक सबूत जुटाने की दिशा में पर्याप्त कोशिश नहीं हुई।

इसी को देखते हुए अदालत ने जांच अधिकारी को कई स्पष्ट निर्देश दिए। जांच अधिकारी से कहा गया कि वह डेटिंग ऐप की पूरी चैट, व्हाट्सऐप के रिकॉर्ड, कॉल डिटेल रिकॉर्ड और दोनों पक्षों के बीच हुई कथित मुलाकातों का ब्योरा जुटाए। इसके साथ ही पांच लाख रुपये की नकद जमा राशि और उन संस्थाओं की भी पड़ताल करने को कहा गया, जिनके ज़रिए यह धनराशि इधर से उधर हुई।

पीड़िता ने खुद नहीं, घरेलू सहायिका ने दी थी शिकायत

इस मामले का एक दिलचस्प पहलू अदालत ने अलग से दर्ज किया। प्राथमिकी खुद न्यायिक अधिकारी ने नहीं, बल्कि उनकी घरेलू सहायिका ने दर्ज कराई थी — जबकि अधिकांश वित्तीय लेन-देन न्यायिक अधिकारी के ही खातों से हुए थे। अदालत ने कहा कि शिकायत को पढ़ने पर असली पीड़ित कौन है, यह स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं होती।

हालांकि न्यायाधीश ने साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि सामाजिक संकोच या निजी कारणों से तथ्य छिपाना जांच में सहयोग न करने का बहाना नहीं बन सकता। अंततः मामले की गंभीरता और अब तक उपलब्ध साक्ष्यों को सामने रखते हुए अदालत इस नतीजे पर पहुंची कि आरोपी जांच में पूरा सहयोग नहीं कर रहा, और इसी आधार पर उसे जमानत देने से इनकार कर दिया गया।

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