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केरल के कोझिकोड में शिक्षिकाओं का नशा नेटवर्क बेनकाब, 12 हजार वेतन वाली टीचरों के खातों से मिले लाखों रुपयेभारत
29 जुल॰ 2026, 10:15 pm (7 घंटे पहले)· 0

केरल के कोझिकोड में शिक्षिकाओं का नशा नेटवर्क बेनकाब, 12 हजार वेतन वाली टीचरों के खातों से मिले लाखों रुपये

केरल के कोझिकोड जिले में समग्र शिक्षा केरल के तहत काम करने वाली तीन महिला शिक्षिकाओं को एमडीएमए की तस्करी के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। 12 से 13 हजार रुपये का मासिक वेतन पाने वाली इन शिक्षिकाओं के बैंक खातों में लाखों रुपये का लेनदेन पाया गया है।

केरल के कोझिकोड जिले में एक ऐसा वाकया सामने आया है जिसने शिक्षा जगत के साथ साथ पूरे समाज को झकझोर कर रख दिया है। वडाकरा इलाके में पुलिस ने एक बड़े सिंथेटिक ड्रग्स नेटवर्क का पर्दाफाश करते हुए तीन महिला शिक्षिकाओं को गिरफ्तार किया है। यह तीनों शिक्षिकायें जिले के पूर्वी हिस्से में स्थित पहाड़ी इलाके पेराम्बरा के ब्लॉक रिसोर्स सेंटर से जुड़ी हुई थीं, जो केंद्र सरकार की स्कूली शिक्षा योजना समग्र शिक्षा केरल के अंतर्गत संचालित होता है। डिस्ट्रिक्ट एंटी नारकोटिक्स स्पेशल एक्शन फोर्स की जांच में यह खुलासा हुआ है कि ये शिक्षिकायें केवल नशीले पदार्थों का सेवन ही नहीं कर रही थीं, बल्कि इंस्टाग्राम और डिजिटल माध्यमों के जरिये ग्राहकों को जोड़कर एमडीएमए की सप्लाई में मुख्य बिचौलिए की भूमिका निभा रही थीं।

ऑपरेशन तूफान और पांच आरोपियों की गिरफ्तारी का घटनाक्रम

गृह विभाग द्वारा चलाए जा रहे ऑपरेशन तूफान के तहत इस पूरे मामले की जांच के लिए एक विशेष जांच टीम का गठन किया गया था। वडाकरा थाने के निरीक्षक ए. वी. दिनेश के नेतृत्व में चल रही इस जांच में पुलिस ने अब तक कुल पांच लोगों को शिकंजे में लिया है। इस नेटवर्क की कड़ियां 26 जून को तब खुलनी शुरू हुईं जब वडाकरा के निवासी सफवान को एमडीएमए के साथ रंगे हाथों पकड़ा गया। सफवान से पूछताछ के दौरान मिली डिजिटल जानकारी, बैंक खातों के ब्यौरे और बैंक भुगतान के लिए इस्तेमाल हुए क्यूआर कोड की पड़ताल ने जांच टीम को इन शिक्षिकाओं तक पहुंचा दिया।

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इसके बाद पुलिस ने 11 जुलाई को शारीरिक शिक्षा अनुदेशक के. सी. कीर्तना को गिरफ्तार किया, जिसके खाते में नशीले पदार्थों के पैसों का हस्तांतरण पाया गया था। जांच आगे बढ़ी तो 26 जुलाई को विशेष शिक्षिका के. काव्या को गिरफ्तार किया गया, जो ऑटिज्म से पीड़ित बच्चों को पढ़ाती थी और जिसके बैंक खाते का इस्तेमाल नेटवर्क के मौद्रिक लेनदेन में हुआ था। इसके दो दिन बाद यानी 28 जुलाई को ट्रेनर वी. पी. नीष्मा की गिरफ्तारी हुई। उसी दिन पुलिस ने कन्नूर जिले से एक डिलीवरी वर्कर जिजिल कुरियाकोस को भी दबोच लिया, जो बेंगलुरु से माल लाने, पैसों का तालमेल बिठाने और कूरियर जैसी डिलीवरी संभालने का काम करता था।

मामूली वेतन और खातों में लाखों का संदिग्ध लेन-देन

29 जुलाई को आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कन्नूर रेंज के डीआईजी के. कार्तिक और कोझिकोड ग्रामीण पुलिस प्रमुख मेरिन जोसेफ ने मामले के वित्तीय विवरण साझा किए। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि आरोपी शिक्षिकाओं का आधिकारिक मासिक वेतन महज 12,000 से 13,000 रुपये के बीच था, जबकि उनके बैंक खातों की जांच करने पर लाखों रुपये के भारी-भरकम वित्तीय लेनदेन की जानकारी सामने आई। जांच एजेंसियों को अंदेशा है कि इन खातों का सीधा इस्तेमाल अंतरराज्यीय नशा तस्करी नेटवर्क द्वारा पैसों के आदान-प्रदान के लिए किया जा रहा था।

शिक्षिकाओं के इस अवैध व्यापार में उतरने के पीछे की वजह उनका खुद का नशे का आदी होना बताया जा रहा है। शुरुआत में इन महिलाओं ने निजी इस्तेमाल के लिए ड्रग्स खरीदना शुरू किया था, लेकिन जब उनकी सीमित आय इस महंगे नशे का खर्च उठाने में असमर्थ साबित हुई, तो वे कमीशन के लालच में खुद इस सिंडिकेट की एजेंट बन गईं। कीर्तना और काव्या सहकर्मी होने के साथ-साथ हमेशा एक साथ देखी जाती थीं, जिससे आसपास के लोगों को उनकी गहरी दोस्ती पर कभी कोई शक नहीं हुआ। आश्चर्य की बात यह भी है कि कीर्तना स्कूलों में चलाए जाने वाले नशा विरोधी अभियानों में सक्रिय रहती थी और छात्र-छात्राओं के लिए जुम्बा कक्षाओं का आयोजन भी करती थी।

कॉलेज छात्रों को बनाया निशाना और जुम्बा क्लास की आड़ में धंधा

महिला शिक्षिकाओं की गिरफ्तारी के बाद शुरुआत में अभिभावकों और आम जनता के बीच यह भारी डर फैल गया था कि कहीं स्कूली बच्चे भी इस घातक नशे की चपेट में न आ गए हों। हालांकि, पुलिस द्वारा 29 जुलाई को जारी किए गए आधिकारिक बयान में स्पष्ट किया गया कि अब तक की जांच में किसी भी स्कूली छात्र के इस नेटवर्क में शामिल होने के प्रमाण नहीं मिले हैं। आरोपियों ने अपना मुख्य निशाना कॉलेज के छात्रों और युवा वर्ग को बनाया था। इसके अतिरिक्त, जांच दल इस पहलू की भी बारीकी से जांच कर रहा है कि क्या इन आरोपियों ने शिक्षा विभाग की अन्य शिक्षिकाओं को भी इस दलदल में घसीटने का प्रयास किया था।

तस्करी के इस पूरे तंत्र को छिपाने के लिए आरोपियों ने अपनी पेशेवर साख और रोजमर्रा की गतिविधियों का इस्तेमाल किया। उन्होंने जुम्बा कक्षाओं और बेकरी उत्पादों (बन) की बिक्री को ड्रग्स के लेन-देन के मुख्य आवरण के रूप में इस्तेमाल किया। बेंगलुरु से एमडीएमए की खेप कोझिकोड तक पहुंचाई जाती थी, जिसके लिए आरोपी बेंगलुरु यात्राओं की तस्वीरें और वीडियो बेझिझक इंस्टाग्राम पर साझा करते थे। ग्राहकों से संपर्क साधने के लिए खाड़ी देशों का एक फोन नंबर उपलब्ध कराया जाता था। ऑनलाइन भुगतान प्राप्त होने के बाद ग्राहक को गुप्त स्थान (डेड ड्रॉप) की लोकेशन भेजी जाती थी, जहां जाकर ग्राहक खुद छिपा कर रखी गई नशीली सामग्री उठा लेता था। इस पूरी प्रक्रिया में खाद्य वितरण ऐप से जुड़ा जिजिल कुरियाकोस महत्वपूर्ण कड़ी का काम करता था।

शिक्षा विभाग की सख्त कार्रवाई और आपातकालीन दिशा-निर्देश

इस सनसनीखेज खुलासे के बाद केरल का शिक्षा विभाग पूरी तरह हरकत में आ गया है। राज्य परियोजना निदेशालय से प्राप्त सख्त निर्देशों के आधार पर विभाग ने के. सी. कीर्तना और के. काव्या को सेवा से तत्काल प्रभाव से बर्खास्त कर दिया है, जबकि वी. पी. नीष्मा की बर्खास्तगी की प्रक्रिया को अंतिम रूप दिया जा रहा है। यह तीनों महिलाएं अस्थायी अनुबंध पर कार्यरत थीं।

घटना की गंभीरता को देखते हुए समग्र शिक्षा केरल (एसएसके) ने सभी जिला परियोजना समन्वयकों को राज्य भर के विशेष शिक्षकों और प्रशिक्षकों की आपात बैठक बुलाने का आदेश दिया है। इसके साथ ही, राज्य परियोजना निदेशक ने 29 जुलाई को एक विशेष परिपत्र जारी कर सभी ब्लॉक रिसोर्स सेंटर के समन्वयकों को कड़े निर्देश दिए हैं कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में कार्यरत विशेष शिक्षकों और अनुबंध कर्मचारियों के कामकाज तथा गतिविधियों पर निरंतर और कड़ी निगरानी बनाए रखें।

सवाल-जवाब

वडाकरा एमडीएमए केस में कुल कितने लोगों को गिरफ्तार किया गया है?
पुलिस ने इस मामले में कुल पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिनमें तीन महिला शिक्षिकायें, एक युवक और एक डिलीवरी वर्कर शामिल हैं।
क्या इस ड्रग्स नेटवर्क में स्कूली बच्चे शामिल थे?
पुलिस जांच में स्कूली बच्चों के शामिल होने का कोई सुराग नहीं मिला है; आरोपियों ने मुख्य रूप से कॉलेज के छात्रों को अपना निशाना बनाया था।
आरोपी शिक्षिकाओं की सैलरी कितनी थी और खातों में कितना पैसा मिला?
शिक्षिकाओं की मासिक सैलरी 12,000 से 13,000 रुपये थी, लेकिन उनके बैंक खातों की जांच करने पर लाखों रुपये का वित्तीय लेनदेन पाया गया।
एमडीएमए की सप्लाई किस शहर से की जा रही थी?
नशीला पदार्थ एमडीएमए बेंगलुरु से लाया जाता था और फिर कोझिकोड में ग्राहकों तक पहुंचाया जाता था।
शिक्षा विभाग ने आरोपी शिक्षिकाओं पर क्या कार्रवाई की है?
शिक्षा विभाग ने संविदा पर कार्यरत दो शिक्षिकाओं की सेवाएं समाप्त कर दी हैं और तीसरी शिक्षिका को बर्खास्त करने की प्रक्रिया जारी है।
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