Saharanpur जिले के किसान बहुत बड़े पैमाने पर धान की खेती करते हैं। यहां मुख्य रूप से Basmati किस्म की बुवाई की जाती है। इसके साथ ही कई किसानों ने अगेती धान की फसल भी लगाई है, जो अब कुछ ही समय में पककर तैयार होने वाली है। हालांकि, इस महत्वपूर्ण समय पर फसलों में कई तरह की बीमारियां और परेशानियां सामने आ रही हैं। एक तरफ जहां धान के पौधे जड़ों से धीरे-धीरे सूखते जा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ कुछ खेतों में खड़ी हरी पत्तियां तेजी से पीली पड़ती जा रही हैं।
फसलों में बढ़ते संक्रमण के लक्षण और खतरे
धान में दिखने वाली यह समस्या कई अलग-अलग कारणों से पैदा हो सकती है। अगर खेत में मच्छर जैसे दिखने वाले हॉपर कीटों का हमला बढ़ जाए, तो फसल को भारी नुकसान पहुंच सकता है। TrendKia से बातचीत में विशेषज्ञों ने बताया कि यदि किसान समय रहते इन शुरुआती लक्षणों को पहचान लें, तो वे अपनी पूरी फसल को नष्ट होने से बचा सकते हैं। इसके विपरीत, लापरवाही बरतने पर यह संक्रमण धीरे-धीरे पूरे खेत को अपनी चपेट में ले लेता है, जिससे फसल पूरी तरह नष्ट हो सकती है। इतना ही नहीं, यह बीमारी अगली बुवाई वाली फसल को भी प्रभावित कर सकती है।
Krishi Vigyan Kendra के विशेषज्ञों की सलाह और उपचार
कृषि विज्ञान से जुड़े विशेषज्ञ इस संकट से निपटने के लिए किसानों को सटीक सलाह दे रहे हैं। Krishi Vigyan Kendra के प्रभारी और प्रोफेसर Dr. I.K. Kushwaha ने TrendKia को बताया कि अगर धान की फसल में पौधे का ऊपरी सिरा सूखता हुआ दिखे, तो बिना देर किए Copper Oxychloride का छिड़काव किया जाना चाहिए। यह एक बेहद प्रभावी फफूंदनाशी दवा है। इसका इस्तेमाल 2 ग्राम प्रति लीटर पानी की दर से घोल बनाकर शाम के वक्त करना चाहिए, जिससे इस बीमारी पर नियंत्रण पाया जा सके।
इसके साथ ही Dr. I.K. Kushwaha ने बताया कि यदि धान की पत्तियां हरी से पीली हो रही हैं, तो यह सीधे तौर पर पौधों में सूक्ष्म पोषक तत्वों यानी माइक्रोन्यूट्रिएंट्स की कमी का संकेत है। इस समस्या से निजात पाने के लिए बाजार में मिलने वाले विभिन्न प्रकार के माइक्रोन्यूट्रिएंट्स का छिड़काव करके पत्तियों के पीलेपन को आसानी से रोका जा सकता है।
Hopper Burn से बचाव का सही तरीका
कई इलाकों में धान की फसलों पर हॉपर जैसे हानिकारक कीटों का प्रकोप देखा गया है। इन कीटों के प्रभाव से पौधों में छोटे-छोटे गोल छल्ले बनने लगते हैं और पौधा धीरे-धीरे सूखने लगता है। इस स्थिति को कृषि वैज्ञानिक Hopper Burn के नाम से जानते हैं।
यदि खेतों में इन कीटों का संक्रमण ज्यादा दिखाई दे, तो उपयुक्त कीटनाशक रसायनों का इस्तेमाल करना चाहिए। हालांकि, इसके छिड़काव को लेकर बेहद सावधानी बरतनी होगी। कीटनाशक का छिड़काव केवल उन्हीं विशिष्ट जगहों पर करना चाहिए जहां पौधों पर छल्ले दिखाई दे रहे हों। अगर पूरे खेत में अंधाधुंध छिड़काव किया गया, तो ये कीट उड़कर दूसरे हिस्सों में फैल जाएंगे और पूरे खेत की फसल को बर्बाद कर देंगे।













