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धुबरी में 48,000 करोड़ रुपये के थर्मल पावर प्लांट का शिलान्यास, असम को मिलेंगे 25,000 रोजगारअसम
20 सित॰ 2026, 3:36 pm (11 दिन पहले)· 1

धुबरी में 48,000 करोड़ रुपये के थर्मल पावर प्लांट का शिलान्यास, असम को मिलेंगे 25,000 रोजगार

असम के धुबरी जिले में 3,200 मेगावाट क्षमता के विशाल अल्ट्रा-सुपरक्रिटिकल थर्मल पावर प्रोजेक्ट की नींव रखी गई, जिसमें 48,000 करोड़ रुपये का निवेश होगा।

पूर्वोत्तर के ऊर्जा परिदृश्य में एक बड़े औद्योगिक विस्तार की शुरुआत करते हुए असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने धुबरी जिले के चापर इलाके में एक विशाल ताप विद्युत संयंत्र का भूमिपूजन किया। अदाणी पावर लिमिटेड की ओर से तैयार किया जाने वाला यह अल्ट्रा-सुपरक्रिटिकल थर्मल पावर स्टेशन 3,200 मेगावाट की कुल उत्पादन क्षमता से लैस होगा। इस विशाल परियोजना को धरातल पर उतारने के लिए लगभग 48,000 करोड़ रुपये की विशाल पूंजी लगाई जा रही है, जिससे यह राज्य के इतिहास के सबसे बड़े औद्योगिक निवेशों में शामिल हो गया है।

बिजली उत्पादन के इस केंद्र में 800 मेगावाट की क्षमता वाली चार अलग-अलग आधुनिक इकाइयां स्थापित की जाएंगी। निर्माण कार्य के दौरान जमीनी स्तर पर करीब 20,000 लोगों को प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष काम मिलने की संभावना जताई गई है। इसके अलावा जब यह संयंत्र पूरी तरह चालू होकर बिजली उत्पादन शुरू कर देगा, तब नियमित परिचालन में लगभग 5,000 कर्मियों के लिए आजीविका के अवसर बने रहेंगे। तय योजना के तहत संयंत्र की इकाइयों को दिसंबर 2030 से चरणबद्ध तरीके से ग्रिड के साथ जोड़ा जाएगा।

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अर्थव्यवस्था और रोजगार को नई गति

भूमिपूजन समारोह के मंच से बोलते हुए मुख्यमंत्री ने रेखांकित किया कि यह विशाल संयंत्र राज्य के भीतर बड़े पैमाने पर रोजगार के नए रास्ते खोलेगा। भारी निर्माण गतिविधियों और वाणिज्यिक आपूर्ति श्रृंखला से असम की आर्थिक गतिविधियों को तेज रफ्तार मिलेगी, जिससे राज्य सरकार के राज्य वस्तु एवं सेवा कर राजस्व संग्रह में भी उल्लेखनीय इजाफा दर्ज होगा।

मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि यह परियोजना एडवांटेज असम इन्वेस्टर समिट 2.0 से उपजे भरोसे का ठोस परिणाम है और राज्य तेजी से पूरे क्षेत्र का प्रमुख ऊर्जा केंद्र बनकर उभर रहा है। उन्होंने रेखांकित किया कि इस संयंत्र से न केवल नौकरियों की भरमार होगी, बल्कि स्थानीय छोटे उद्योगों और व्यवसायों को भी इसके इर्द-गिर्द खड़े होने वाले व्यापक औद्योगिक तंत्र में अपनी सक्रिय हिस्सेदारी दर्ज करने का सुनहरा मौका मिलेगा।

राज्य में समूह की बड़ी निवेश योजनाएं

अदाणी समूह के निदेशक जीत अदाणी ने भी इस अवसर पर पूर्वोत्तर के विकास में साझेदारी को लेकर प्रतिबद्धता जताई। जीत अदाणी ने कहा, “आज असम के लिए एक महत्वपूर्ण नए अध्याय की शुरुआत हो रही है।” उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि असम की अनूठी भौगोलिक बनावट उसे पूरे देश के लिए एक शक्तिशाली ऊर्जा भंडार यानी बैटरी में तब्दील करने की असाधारण क्षमता रखती है, जिससे भारत के भविष्य के विकास को निर्बाध गति मिल सकती है।

चापर में बन रहा यह ताप विद्युत संयंत्र अदाणी समूह की ओर से असम के बिजली क्षेत्र में प्रस्तावित कुल 63,000 करोड़ रुपये के भारी-भरकम पूंजी निवेश पैकेज की एक अहम कड़ी है। इस व्यापक योजना में हरित ऊर्जा का घटक भी मजबूती से शामिल है। अदाणी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड के जरिए राज्य में 2,700 मेगावाट की कुल क्षमता वाले दो पंप्ड स्टोरेज प्रोजेक्ट्स विकसित किए जा रहे हैं। इसके साथ ही, अदाणी एनर्जी सॉल्यूशंस लिमिटेड उपभोक्ताओं और वितरण प्रणाली को आधुनिक बनाने के मकसद से राज्यभर में स्मार्ट मीटर लगाने का व्यापक काम संभाल रही है।

निविदा प्रक्रिया और स्थानीय कारोबारी अवसर

इस ताप विद्युत स्टेशन के लिए निविदा प्रक्रिया पहले ही पूरी हो चुकी है। अदाणी पावर लिमिटेड ने अक्टूबर 2025 में प्रतिस्पर्धी बोली जीतते हुए इस परियोजना को हासिल किया था। इसके उपरांत, असम पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड ने नवंबर 2025 में कंपनी को औपचारिक लेटर ऑफ अवार्ड सौंपा था।

आने वाले तीन से चार वर्षों के दौरान पूरे असम में विभिन्न बुनियादी और औद्योगिक क्षेत्रों को मिलाकर समूह का कुल पूंजीगत खर्च 80,000 करोड़ रुपये के पार जाने की रूपरेखा बनाई गई है। चापर परियोजना के मूर्त रूप लेने से क्षेत्रीय ठेकेदारों, निर्माण सामग्री के आपूर्तिकर्ताओं, मालवाहक परिवहन संचालकों और तकनीकी सेवा प्रदाताओं के लिए व्यापार के नए दरवाजे खुलेंगे, जिससे स्थानीय कारोबारी समुदाय भी बड़े औद्योगिक नेटवर्क के साथ सीधे जुड़कर आगे बढ़ सकेगा।

सवाल-जवाब

असम में यह नया थर्मल पावर प्लांट किस जगह स्थापित किया जा रहा है?
यह नया 3,200 मेगावाट का अल्ट्रा-सुपरक्रिटिकल ताप विद्युत संयंत्र असम के धुबरी जिले के चापर में स्थापित किया जा रहा है।
इस परियोजना पर कुल कितनी लागत आएगी?
इस परियोजना के निर्माण पर अदाणी पावर लिमिटेड द्वारा लगभग 48,000 करोड़ रुपये का निवेश किया जा रहा है।
संयंत्र से बिजली उत्पादन की शुरुआत कब तक होने की उम्मीद है?
संयंत्र की चार 800 मेगावाट की इकाइयों को दिसंबर 2030 से चरणबद्ध तरीके से चालू किया जाना निर्धारित है।
इस पावर प्लांट के जरिए कितने रोजगार पैदा होने का अनुमान है?
निर्माण के दौरान लगभग 20,000 लोगों को काम मिलेगा, जबकि संचालन शुरू होने के बाद करीब 5,000 नियमित नौकरियां पैदा होंगी।
अदाणी पावर को इस प्रोजेक्ट के लिए लेटर ऑफ अवार्ड कब मिला था?
कंपनी ने अक्टूबर 2025 में बोली जीती थी और नवंबर 2025 में असम पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड से लेटर ऑफ अवार्ड प्राप्त किया था।
अदाणी समूह की असम में कुल कितनी पूंजी निवेश करने की योजना है?
समूह ने बिजली क्षेत्र में 63,000 करोड़ रुपये और अगले तीन से चार वर्षों में विभिन्न क्षेत्रों को मिलाकर 80,000 करोड़ रुपये से अधिक निवेश की घोषणा की है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Meera Joshi@meera-joshi·10 दिन पहले

इस विशाल औद्योगिक परियोजना से असम में उत्पन्न होने वाले 25,000 रोजगार के अवसर केवल आर्थिक विकास तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह स्थानीय परिवारों के मानसिक स्वास्थ्य और कल्याण (वेलनेस) को भी बेहद सकारात्मक रूप से प्रभावित करेंगे। रोजगार सुरक्षा से वित्तीय तनाव कम होता है, जिससे पारिवारिक रिश्तों में मिठास आती है और लोगों का आत्म-विकास होता है। हालांकि, इतने बड़े पैमाने पर होने वाले औद्योगिक बदलाव के साथ-साथ कार्यस्थल पर मानसिक स्वास्थ्य, स्वस्थ जीवनशैली और कर्मचारियों के वर्क-लाइफ बैलेंस को प्राथमिकता देना भी बेहद जरूरी होगा, ताकि यह आर्थिक उन्नति समग्र मानवीय विकास में बदल सके।

Arjun Mehta@arjun-mehta·10 दिन पहले

धुबरी जैसे सीमावर्ती और आर्थिक रूप से पिछड़े माने जाने वाले जिले में 48,000 करोड़ रुपये का यह निवेश असम सरकार की औद्योगिक विकेंद्रीकरण नीति का एक महत्वपूर्ण संकेत है। राजनीतिक दृष्टिकोण से, विकास के पहिये को गुवाहाटी केंद्रित दायरे से बाहर ले जाकर निचले असम में भारी उद्योग स्थापित करना शासन की प्राथमिकताओं में बदलाव दर्शाता है। हालांकि, 2030 तक इस महत्वाकांक्षी परियोजना को तय समय पर पूरा करना और स्थानीय युवाओं को वादे के अनुसार रोजगार दिलाना राज्य प्रशासन के लिए सबसे बड़ी कसौटी होगी, क्योंकि ऐसे बड़े पूंजी निवेशों की राजनीतिक साख उनके जमीनी क्रियान्वयन पर ही निर्भर करती है।

Priya Sharma@priya-sharma·10 दिन पहले

अर्जुन की बात को सामाजिक और जीवनशैली के नजरिये से आगे बढ़ाएं तो धुबरी जैसे क्षेत्र में इतना बड़ा निवेश स्थानीय जीवन स्तर में युगांतरकारी बदलाव ला सकता है। 25 हजार रोजगार के अवसरों का सीधा असर केवल घरेलू आय तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह आधुनिक टाउनशिप संस्कृति, बेहतर स्वास्थ्य-शिक्षा और स्थानीय युवाओं की जीवनशैली में गुणात्मक सुधार की नींव रखेगा। हालांकि, इस भारी औद्योगिक विकास के साथ-साथ पर्यावरण, स्वच्छ परिवेश और स्थानीय सांस्कृतिक ताने-बाने का संतुलन बनाए रखना भी बेहद जरूरी होगा, ताकि यह आर्थिक प्रगति एक टिकाऊ और स्वस्थ जीवनशैली में बदल सके।

Karan Malhotra@karan-malhotra·10 दिन पहले

धुबरी जैसे रणनीतिक और सीमावर्ती जिले में 48,000 करोड़ रुपये का यह विशाल निवेश कानून-व्यवस्था और सार्वजनिक सुरक्षा के लिहाज से भी अभूतपूर्व प्रशासनिक तैयारियों की मांग करता है। निर्माण चरण में 20,000 कामगारों की आवाजाही और भारी मशीनरी की सुरक्षा के लिए स्थानीय पुलिस प्रशासन को सख्त सुरक्षा ग्रिड और कड़े सत्यापन तंत्र स्थापित करने होंगे। महत्वपूर्ण ऊर्जा बुनियादी ढांचे की सुरक्षा, भूमि विवादों का त्वरित कानूनी निपटारा और ठेकेदारी व्यवस्था में किसी भी प्रकार की अवैध वसूली या असामाजिक तत्वों पर रोक लगाना परियोजना की निर्बाध प्रगति के लिए अत्यंत आवश्यक रहेगा।

Ravikash Gupta@ravikash·10 दिन पहले

सुरक्षा और प्रशासनिक सतर्कता के साथ-साथ इस 48,000 करोड़ रुपये के मेगा प्रोजेक्ट का वित्तीय और आपूर्ति पक्ष भी उतना ही महत्वपूर्ण है। 3,200 मेगावाट क्षमता के इस अल्ट्रा-सुपरक्रिटिकल प्लांट के लिए लगातार भारी मात्रा में कोयले की रसद, मजबूत रेलवे कनेक्टिविटी और पानी की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित करना सबसे बड़ी परिचालन चुनौती होगी। इतने बड़े पूंजीगत व्यय (Capex) से राज्य के राजस्व और स्थानीय सहायक उद्योगों को बड़ा प्रोत्साहन मिलेगा, लेकिन दिसंबर 2030 तक चरणबद्ध कमीशनिंग के लक्ष्य को हासिल करने के लिए समय पर ग्रिड एकीकरण और कड़े लागत नियंत्रण की दरकार होगी। पूर्वोत्तर में ऊर्जा आत्मनिर्भरता और औद्योगिक निवेश का यह पैमाना पूरे क्षेत्र की आर्थिक तस्वीर बदल सकता है।

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